Question
कवि गम्भीर यथार्थवादी होता है,

Answer

कवि यथार्थ का यथातथ्य वित्रण भले ही न करे किन्तु यथार्थ में उसे जो रुचिकर नहीं लगता उसे हटाकर अपने मनोनुकूल चरित्र की सृष्टि करता है। कवि जिस आदर्श को प्रस्तुत करता है उसका मूल यथार्थ ही है इसलिए उसे गंभीर यथार्थवादी कहा गया है।

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