मृदा के निम्नलिखित कार्य हैं-
(1) भू-पपड़ी एवं वायुमण्डल के मध्य में मुदा एक आन्तरिक सतह होती है। इस प्रकार यह प्राकृतिक साधनों, जैसे-ऊर्जा, जल, गैस एवं पोषक तत्वों का पुनःचक्रण करती है।
(2) मृदा पौधों की वृद्धि के लिए यांत्रिक आधार, जल एवं पोषक तत्व तथा पादप जड़ों को ऑक्सीजन प्रदान करती है।
(3) मृदा सूर्य ऊष्मा का भण्डार करती है और उसे वृद्धि करते हुए पौधों को प्रदान करती है।
(4) मृदा की ऊपरी सतह कृषि फसलों के उत्पादन में प्रयोग की जाती है।
(5) मृदा विभिन्न जीवों (पादप एवं जन्तु) के लिए प्राकृतिक निवास स्थान होती है।
(6) मृदा का प्रयोग इमारतों के निर्माण, सड़कें तथा निरर्थक पदार्थों को मिलाने में किया जाता है।