2. मनोरंजन का जीवन में महत्त्व - आज वैज्ञानिक युग में यान्त्रिकता बढ़ गई है और मानव - जीवन अधिकाधिक जटिल, नीरस एवं संघर्षमय बनता जा रहा है। आज हम एक क्षण के लिए भी सन्तोष और विश्राम का अनुभव नहीं कर पाते हैं। इस कारण अब मानव स्वयं को भी एक यन्त्र और हर समय अत्यन्त व्यस्त मानने लगा है। इसलिए आज मानव - जीवन के लिए मनोरंजन का विशेष महत्त्व है। जिस प्रकार शरीर को पुष्ट बनाने के लिए उत्तम भोजन व स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन के लिए मनोरंजन परम विश्रान्तिदायक माना जाता है।
3. मनोरंजन के साधनों का विकास - प्राचीन काल में भी मनोरंजन की आवश्यकता अनुभव की जाती थी। उस समय लोगों के पास समय की कमी नहीं थी, इस कारण उनके मनोरंजन ऐसे होते थे कि अधिकाधिक समय कट सके। इसलिए उस समय नाटक, मेले - तमाशे एवं महोत्सव ऐसे होते थे, जिनसे कई दिनों और रातों तक मनोरंजन हो जाता था। परन्तु वर्तमान में सभ्यता के विकास और मानव - रुचि के परिवर्तन के साथ मनोरंजन के साधन भी बदल गये हैं।
4. मनोरंजन के आधनिक साधन - वर्तमान समय में मनोरंजन के साधनों के रूप में रेडियो, टेलीविजन, फोटोग्राफी, वीडियो गेम्स, टेपरिकार्डर एवं खेलों का अत्यधिक महत्त्व है। अब टेलीविजन पर विविध धारावाहिक, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, विज्ञान अभिरुचि के कार्यक्रम, कृषि - बागवानी से सम्बन्धित प्रसारण, क्रिकेट या हॉकी आदि के मैच, विशिष्ट समारोहों का आँखों देखा प्रसारण एवं समाचार - दर्शन आदि कार्यक्रम आने लगे हैं, जिनसे घर बैठे ही मनोरंजन हो जाता है।
ललित - कला से सम्बन्धित साधन; जैसे मुशायरा, कवि - सम्मेलन, संगीत - नृत्य के कार्यक्रम, हास्य - सम्मेलन आदि से भी आधुनिक समय में अच्छा मनोरंजन हो जाता है। वर्तमान समय में मेले - तमाशे, पर्यटन, साहसिक खेल आदि साधनों से भी मनोरंजन हो जाता है। इनसे व्यावहारिक ज्ञान भी बढ़ता है।
5. उपसंहार - जीवन में अन्य कार्यों की भाँति मनोरंजन का उपयोग भी उचित मात्रा में होना चाहिए। मनोरंजन सदैव स्वस्थ - प्रकृति का होना चाहिए। आधुनिक समय में मनोरंजन के साधनों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ती जा रही है। इससे आज के अतिव्यस्त मानव को भी आनन्द मिल सकेगा और उसके जीवन की नीरसता और यान्त्रिकता समाप्त हो जाएगी।
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