व्यावसायिक संस्थाओं की स्थापना उद्देश्य प्राप्त करने के लिए ही होती है। विशिष्ट उद्देश्य, लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किये जाने वाले क्रिया-कलापों के साथ योजनाओं में निर्धारित किये जाते हैं। अतः नियोजन उद्देश्यपूर्ण होता है। नियोजन तब तक निरर्थक होता है जब तक यह संस्थानों के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहयोग प्रदान नहीं करता है। नियोजन के द्वारा ही उद्देश्यों तथा उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कार्यों, साधनों, कार्यविधियों आदि का निर्धारण किया जाता है। नियोजन का मूल उद्देश्य संस्था के उद्देश्यों को न्यूनतम लागत एवं प्रयासों से अधिकतम सफलता के साथ पूरा करना तथा संस्था की कार्यकुशलता में वृद्धि करना होता है। अत: नियोजन उद्देश्यपूर्ण होता है।