प्रबन्ध एक विज्ञान है-विज्ञान ज्ञान की किसी भी शाखा का व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध अध्ययन है जो कारण एवं परिणाम के सम्बन्ध बतलाता है। विज्ञान की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
विज्ञान ज्ञान का क्रमबद्ध समूह है।
विज्ञान के सिद्धान्त कारण एवं परिणाम के बीच में सम्बन्ध स्थापित करते हैं।
विज्ञान के सिद्धान्त प्रयोगों, अवलोकनों एवं परिणामों पर आधारित होते हैं।
वैज्ञानिक सिद्धान्त, वैधता एवं उपयोग के लिए सार्वभौमिक होते हैं।
वैज्ञानिक ज्ञान विश्वसनीय है क्योंकि इसका किसी भी चरण पर प्रमाणन किया जा सकता है।
प्रबन्ध को उपरोक्त विशेषताओं के सन्दर्भ में देखा जाये तो यह कहा जा सकता है कि प्रबन्ध भी विज्ञान है क्योंकि प्रबन्ध में विज्ञान की अग्रलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं-
1. प्रबन्ध में ज्ञान का विषयपरक अध्ययन किया जाता है।
2. प्रबन्ध विषय का व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध ज्ञान होता है।
3. प्रबन्ध के सिद्धान्तों एवं विचारधाराओं का विकास वैज्ञानिक विधियों के प्रयोग से हुआ है।
4. प्रबन्ध के सिद्धान्त विज्ञान की तरह सार्वभौमिक हैं जो सभी प्रकार के संगठनों में लागू होते हैं।
5. विज्ञान के समान प्रबन्ध के सिद्धान्त भी विभिन्न घटकों के बीच कारण एवं परिणाम का सम्बन्ध स्थापित करते हैं।
प्रबन्ध व्यावहारिक विज्ञान है, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान की तरह शुद्ध विज्ञान नहीं होता है। शुद्ध विज्ञान के सिद्धान्त स्थायी एवं सार्वभौमिक होते हैं और वे कारण एवं परिणाम में एकदम सही सम्बन्ध स्थापित करते हैं। प्रबन्ध के सिद्धान्त गतिशील होते हैं और समय एवं परिस्थितियों के अनुसार प्रबन्धकों द्वारा इनका उपयोग किया जाता है। अतः प्रबन्ध एक विज्ञान है लेकिन व्यावहारिक विज्ञान।