MCQ
परिनालिका के अन्दर क्षेत्र की तीव्रता है
  • A
    इसकी लम्बाई के अनुक्रमानुपाती
  • B
    इसमें प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती
  • C
    इसके फेरों की कुल संख्या के व्युत्क्रमानुपाती
  • D
    इसमें प्रवाहित धारा के व्युत्क्रमानुपाती

Answer

स्वप्रयत्न

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त्रिज्या $1 \mathrm{~cm}$ के दो चालक गोले $1 \mathrm{~m}$ से वियुक्त हैं। दोनों पर समान आवेश $1 \mu \mathrm{C}$ दिया गया है। एक गोले का विभव $v 0$ है। अनंत पर विभव शून्य है। दूरी से सम्पर्क में लाने में किया गया कार्य
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता बढती है
एक प्रोटॉन तथा एक एल्फा कण, किसी एक समान चुम्बकीय क्षेत्र $B$ के प्रदेश में प्रवेश करते हैं। इनकी गति की दिशा क्षेत्र $B$ के लम्बवत् है। यदि दोनों कणों के लिए वृत्ताकार कक्षाओं की त्रिज्या आपस में बराबर है और प्रोटॉन द्वारा अर्जित की गई गतिज ऊर्जा $1 MeV$ है तो एल्फा कण द्वारा अर्जित ऊर्जा होगी
${ }_6 C ^{12}$ एक स्थिर कण दो टुकड़ों में फटता है जिनका द्रव्यमान क्रमशः $m _1$ व $m _2$ है। ये दोनों विपरीत दिशाओं में वेग $v _1$ तथा $v _2$ से जाते हैं। इनकी गतिज ऊर्जाओं का अनुपात $E _1 / E _2$ होगा-
विघुत-चुम्बकीय तरंगों की प्रकृति होती है-
उत्तल लेंस के लिए बैगनी तथा लाल प्रकाश के लिए फोकस दूरियां $f_V$ तथा $f_R$ है। अवतल लेंस के लिए यही फोकस दूरियां $F _{ V }, F _{ R }$ हैं । तो
एक विद्युत चुम्बकीय विकिरण के फोटॉंन का संवेग है। $3.3$ $\times 10^{-29}\ kgm / sec$ इसकी संबंधित आवृत्ति है:
$\left( h =6.6 \times 10^{-34} Js ; c =3 \times 10^8 ms ^{-1}\right. )$
3000Å तरंग दैर्ध्य वाले प्रकाश की आवृत्ति है
दर्शाये गये परिपथ में दो सेलों $A$ तथा $B$ का प्रतिरोध नगण्य है, जब $V_A=12 V , R_1=500 \Omega$ तथा $R=100 \Omega$ है तो, गैल्वेनोमीटर $(G)$ में कोई विक्षेप नहीं होता है। $V_B$ का मान है :

जब किसी कुंडली के निकट किसी चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव दूर ले जाया जाता है तब उसमें उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा की दिशा होती है