प्रशिक्षण की आवश्यकता-किसी भी संस्था में प्रशिक्षण की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है-
1. सीखने के समय में कमी-यदि प्रशिक्षक योग्यता प्राप्त हो एवं कुशल नियन्त्रक हो तो उसके द्वारा दिये जाने वाले प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थियों को सीखने में बहुत कम समय लगता है।
2. निष्पादन में सुधार-प्रशिक्षण न केवल नये कर्मचारियों के लिए होता है वरन् यह पुराने कर्मचारियों के लिए भी होता है। इससे कर्मचारियों के अपने वर्तमान कार्य के निष्पादन स्तर को ऊँचा उठाने में सहायता मिलती है।
3. मानवीय आवश्यकताओं का प्रबन्धन-यदि किसी कम्पनी को कुशल एवं दक्ष कर्मचारियों की आवश्यकता है तो प्रशिक्षण के माध्यम से संस्था में आवश्यकतानुसार तैयार किये जा सकते हैं।
4. दृष्टिकोण एवं सोच में परिवर्तन लानासंस्था में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करने का एक उददेश्य संस्था के कर्मचारियों के दृष्टिकोण एवं सोच में बदलाव लाना भी है। प्रशिक्षण कर्मचारियों को अधिक सहयोग एवं वफादारी प्रदान करने के लिए तैयार करता
5. कार्य सम्बन्धी समस्याओं को हल करने में सहायता करना-पर्यवेक्षण से जुड़े अथवा प्रति घण्टे की दर से पारिश्रमिक पाने वाले कर्मचारी दोनों को ही प्रशिक्षण देने से आवर्त, अनुपस्थिति, दुर्घटनाओं एवं शिकायतों में कमी आती है। श्रम-प्रबन्ध, नेतृत्व, मानवीय सम्बन्ध एवं प्रशासन के क्षेत्र में पर्यवेक्षकों को दिया जाने वाला प्रशिक्षण अधिकारी-अधीनस्थों के बीच सम्बन्धों में सुधार ला सकता है। साथ ही प्रशिक्षण घटता मनोबल, निराशाजनक ग्राहक सेवा, अत्यधिक क्षय एवं निराशाजनक कार्यप्रणालियाँ आदि समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायता करता है।
6. कर्मचारियों को लाभ-प्रशिक्षण की सहायता से कर्मचारी नूतन ज्ञान एवं कार्य में निपुणता व दक्षता प्राप्त करते हैं। इससे उनकी बाजार में कीमत एवं धनोपार्जन शक्ति में वृद्धि होती है।