Question
पर्यावरण प्रदूषण

Answer

पर्यावरण का अर्थ- ‘पर्यावरण’ का शाब्दिक अर्थ है—चारों ओर का वातावरण, जिसमें हम सब साँस लेते हैं। इसके अंतर्गत वायु, जल, धरती, ध्वनि आदि से युक्त पूरा प्राकृतिक वातावरण आ जाता है।
प्रदूषण के कारण – आज हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि जिस पर्यावरण में हमारा जीवन पलता है, वही प्रदूषित होता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है–अंधाधुंध वैज्ञानिक प्रगति। अधिक उत्पादन की होड़ में हमने अत्यधिक कल-कारखाने लगा लिए हैं। उनके द्वारा उत्पादित रासायनिक कचरा, गंदा जल, और मशीनों से उत्पन्न शोर हमारे पर्यावरण के लिए खतरा बन गए हैं। परमाणु-ऊर्जा के प्रयोग ने आकाश में व्याप्त ओजोन गैस की पस्त में छेद कर दिया है।
प्रदूषण बढ़ने का दूसरा बड़ा कारण है – जनसंख्या-विस्फोट। अत्यधिक जनसंख्या को अन्न-जल-स्थल देने के लिए वनों को काटना आवश्यक हो गया। इससे भी पर्यावरण का संतुलन बिगड़ा।
प्रदूषण के प्रकार-प्रदूषण के अनेक प्रकार हैं। उनमें कुछ मुख्य प्रदूषण इस प्रकार हैं
वायु-प्रदूषण–आज महानगरों की वायु पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। तेल से चलने वाले वाहनों और बड़े-बड़े उद्योगों के कारण वायु में विषैले तत्त्व घुल गए हैं। इनके कारण अनेक असाध्य रोग उत्पन्न होने लगे हैं।
जल-प्रदूषण…-फैक्टरियों के निकले दूषित कचरे के कारण न केवल नदी-नाले प्रदूषित हुए हैं, बल्कि भूमि-जल भी दूषित होने लगा है। जिन क्षेत्रों में फैक्टरियाँ अधिक हैं, वहां प्रायः घरती से लाल-काला जल बाहर निकलता है।
ध्वनि-प्रदूषण आज फैक्टरियों, मशीनों, ध्वनि-विस्तारकों, वाहनों और आनंद-उत्सवों में इतना अधिक शोर होने लगा है कि लोग बहरे होने लगे हैं। शोर तनाव को भी बढ़ाता है।
प्रदूषण का निवारण प्रदूषण की रोकथाम का उपाय लोगों के हाथों में है। इसे जनचेतना से रोका जा सकता है। यद्यपि सरकों भी जनहित में अनेक उपाय कर रही हैं। हरियाली को बढ़ावा देना, वृक्ष उगाना, प्रदूषित जल और मल का उचित संसाधन करना, शोर पर नियंत्रण करना ये उपाय सरकार और जनता दोनों को अपनाने चाहिए। हर व्यक्ति इन प्रदूषणों को रोकने की ठान ले, तभी इसका निवारण संभव है।

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