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दीपावली

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भूमिका- दीपावली हिंदुओं का महत्त्वपूर्ण उत्सव है। यह कार्तिक मास की अमावस्या की रात्रि में मनाया जाता है। इस रात को घर-घर में दीपक जलाए जाते हैं। इसलिए इसे ‘दीपावली’ कहा गया। रात्रि के घनघोर अंधेरे में दीपावली का जगमगाता हुआ प्रकाश अति सुंदर दृश्य की रचना करता है।
ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक प्रसंग- ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री रामचंद्र जी रावण का संहार करने के पश्चात् वापस अयोध्या लौटे थे। उनकी खुशी में लोगों ने घी के दीपक जलाए थे। भगवान महावीर ने तथा स्वामी दयानंद ने इसी तिथि को निर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए जैन संप्रदाय तथा आर्य समाज में भी इस दिन का विशेष महत्त्व है। सिक्खों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी भी इसी दिन कारावास से मुक्त हुए थे। इसलिए गुरुद्वारों की शोभा इस दिन दर्शनीय होती है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र के क्रोध से ब्रज की जनता को बचाया था।
व्यापारियों का प्रिय उत्सव- व्यापारियों के लिए दीपावली उत्सव-शिरोमणि है। व्यापारी-वर्ग विशेष उत्साह से इस उत्सव को मनाता है। इस दिन व्यापारी लोग अपनी-अपनी दुकानों का काया-कल्प तो करते ही हैं, साथ ही ‘शुभ-लाभ’ की आकांक्षा भी करते हैं। बड़े-बड़े व्यापारी प्रसन्नता में अपने ग्राहकों में मिठाई आदि का वितरण करते हैं। घर-घर में लक्ष्मी का पूजन होता है। ऐसी मान्यता है कि उस रात लक्ष्मी घर में प्रवेश करती है। इस कारण लोग रात को अपने घर कदरवाजे खुले रखते हैं। हलवाई और आतिशबाजी की दुकानों पर इस दिन विशेष उत्साह . होता है। बाजार मिठाई से लद जाते हैं। यह एक ऐसा दिन होता है, जब गरीब से अमीर तक, कंगाल से राजा तक सभी मिठाई का स्वाद प्राप्त करते हैं। लोग आतिशबाजी चलाकर भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। गृहणियाँ इस दिन कोई-न-कोई बर्तन खरीदना शगुन समझती हैं।

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