पूँजी बाजार मध्य अवधि एवं दीर्घ अवधि वित्त का बाजार है। इससे अभिप्राय उन सभी संगठनों, संस्थानों एवं उपकरणों से है जो दीर्घ अवधि वित्त प्रदान करते हैं। इसमें अल्प अवधि (भुगतान अवधि एक वर्ष से कम) वित्त बाजार सम्मिलित नहीं है। बाजार से विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों का निर्गमन कर धन एकत्रित किया जाता है। जैसे समता अंश या स्वामीगत प्रतिभूतियाँ, ऋणपत्र या साख प्रतिभूतियाँ, पूर्वाधिकार अंश तथा अन्य नये प्रकार की प्रतिभूतियाँ।
पूँजी बाजार में सारणियों (प्रणाली) की एक श्रृंखला समाहित होती है जिसके माध्यम से बचतों को औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपक्रमों तथा सामान्यतः राजकीय उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है। यह इन बचतों को उनके सर्वाधिक उत्पादक उपयोग में प्रवर्तित कर देश को विकास एवं वृद्धि की ओर जाता है। पूंजी बाजार के अन्तर्गत विकास बैंक, वाणिज्यिक बैंक तथा शेयर बाजार समाहित होते हैं। एक आदर्श पूँजी बाजार वह जाना जाता है जहाँ उचित लागत (मूल्य) पर वित्त उपलब्ध होता है। पूँजी बाजार को दो भागों में बाँटा जा सकता है-(1) प्राथमिक बाजार तथा (2) द्वितीयक या गौण बाजार। प्राथमिक बाजार को नये निर्गमन बाजार के रूप में जाना जाता है, जबकि द्वितीयक बाजार को स्टॉक एक्सचेंज या शेयर बाजार के नाम से जाना जाता है।