यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति — सामाजिक अध्ययन कक्षा 9 — Question
CBSE Boardहिन्दी माध्यमकक्षा 9सामाजिक अध्ययनयूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति5 Marks
Question
रूसी क्रांति और सोवियत संघ के वैश्विक प्रभाव को समझाइये।
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Answer
रूसी क्रांति और सोवियत संघ का वैश्विक प्रभाव-1917 की रूसी क्रान्ति पूरे विश्व के लिए एक नया अनुभव थी। इसने मेहनतकशों के राज्य की स्थापना के स्वप्न को सच कर दिया था। रूसी क्रांति तथा सोवियत संघ के वैश्विक प्रभाव को निम्न बिन्दुओं में देखा जा सकता है-
रूसी क्रान्ति ने मेहनतकशों के राज्य की स्थापना की संभावना द्वारा दुनियाभर के लोगों में एक नई उम्मीद जगा दी थी।
अनेक देशों में कम्युनिस्ट पार्टियों का गठन किया गया-जैसे, इंग्लैंड में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन की स्थापना की गई।
उपनिवेशों की जनता भी उनके रास्ते का अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित हुई।
सोवियत संघ के अलावा भी बहुत सारे देशों के प्रतिनिधियों ने कॉन्फ्रेंस ऑफ द पीपुल ऑफ दि ईस्ट (1920) और बोल्शेविकों द्वारा बनाए गए कॉमिन्टन (बोल्शेविक समर्थक समाजवादी पार्टियों का अंतर्राष्ट्रीय महासंघ) में हिस्सा लिया था।
कछ विदेशियों को सोवियत संघ की कम्यनिस्ट यनिवर्सिटी ऑफ द वर्कर्स ऑफ दि ईस्ट में शिक्षा दी गई।
दूसरे विश्वयुद्ध तक सोवियत संघ की वजह से समाजवाद को एक वैश्विक पहचान और हैसियत मिल चुकी थी। अनेक देशों में समाजवादी सरकारों का गठन हुआ।
लेकिन पचास के दशक तक देश के भीतर के साथ-साथ विश्व समाजवादी आंदोलन में भी इस बात को मान लिया गया था कि सोवियत संघ में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा था। एक पिछड़ा हुआ देश महाशक्ति बन र खेती विकसित हो चके थे और गरीबों को भोजन मिल रहा था। लेकिन वहाँ के नागरिकों को कई तरह की आवश्यक स्वतंत्रता नहीं दी जा रही थी और विकास परियोजनाओं को दमनकारी नीतियों के बल पर लागू किया गया था।
बीसवीं सदी के अंत तक सोवियत संघ का विघटन हो गया तथा एक समाजवादी देश के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोवियत संघ की प्रतिष्ठा काफी कम रह गई थी।
अन्य सभी देशों में भी समाजवाद के बारे में विविध प्रकार से व्यापक पुनर्विचार किया जाने लगा।
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