जीवन-परिचय:संत रैदास भक्ति काल के प्रसिद्ध संत, कवि और समाज-सुधारक थे। उनका जन्म 15वीं शताब्दी में काशी (वाराणसी) में एक चमड़े का काम करने वाले निर्धन परिवार में हुआ था। वे जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के प्रखर विरोधी थे।
रैदास ने अपने भक्ति-गीतों और पदों के माध्यम से समानता, प्रेम, भक्ति और ईश्वर-एकता का संदेश दिया। उनकी भाषा सरल, भावपूर्ण और जनमानस के निकट थी। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे और मीरा बाई उन्हें अपना गुरु मानती थीं।उनकी रचनाओं में मानवता, विनम्रता और ईश्वर-भक्ति की झलक मिलती है।
रचनाएँ:
पद (जो ‘गुरुग्रंथ साहिब’ और ‘संत साहित्य’ में संकलित हैं)
अनंतदास कृत ‘पारसियों के वार्ता’ में संकलित पद