Question
स्वच्छता का महत्त्व

Answer

1. स्वच्छता क्या है? - 'स्वच्छ' शब्द का अर्थ है - अत्यन्त साफ, विशुद्ध, उज्ज्वल एवं स्वस्थ। 'ता' प्रत्यय जोड़ने पर भाववाचक 'स्वच्छता' का आशय सब प्रकार से साफ - सफाई, निर्मलता एवं पवित्रता है। मन - हृदय की, शरीर एवं वस्त्रों की, घर - बाहर, पानी - वायु - भूमि आदि की निर्मलता या सफाई रखना ही स्वच्छता है। स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य, अच्छे संस्कार एवं सुसभ्यता की निशानी है। इससे मानव के उत्तम आचार - विचार का पता चलता है। गन्दगी न रखना या गन्दगी से घृणा रखकर उसे दूर करना ही स्वच्छता है। स्वच्छता से मनुष्य में ताजगी और स्फूर्ति रहती है। 

2. स्वच्छता के प्रकार - स्वच्छता के अनेक प्रकार हैं, जैसे मन और शरीर की स्वच्छता, घर - आँगन की स्वच्छता, पेयजल एवं भूमि की स्वच्छता, वायुमण्डल एवं पर्यावरण की स्वच्छता, ये सब स्वच्छता के भेद हैं। महात्मा गाँधी ने अपने पत्रों के माध्यम से स्वच्छता के महत्त्व पर सुन्दर विचार व्यक्त किये थे। हमारे देश में स्वच्छता के प्रति उतनी जागरूकता नहीं है, इस कारण देश के अनेक क्षेत्रों में गन्दगी का फैलाव दिखाई देता है और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इसी आशय से हमारे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान का शुभारम्भ किया है। 

3. स्वच्छता के लाभ - स्वच्छता का सीधा सम्बन्ध हमारी सभ्यता एवं स्वास्थ्य से है। खान - पान में स्वच्छता रहने से शरीर स्वस्थ रहता है। घरों के आसपास, सड़कों, नालियों, पोखरों, नदियों आदि में गन्दगी न फैलने से सारा वातावरण स्वच्छ रहता है। इससे रोगाणु नहीं पनपते हैं, अनेक तरह के रोग नहीं फैलते हैं, जल एवं वायु में शुद्धता रहती है। फलस्वरूप मानव तथा अन्य प्राणियों की आयु एवं स्वास्थ्य का स्तर बढ़ जाता है। हमारे देश में गन्दगी न रहे तो विदेशी पर्यटक अधिक आ सकते हैं। इससे अनेक तरह के लाभ हो सकते हैं। 

4. स्वच्छता : हमारा योगदान - हमें अपने देश को स्वच्छ बनाये रखने के लिए घर से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक सर्वत्र स्वच्छ रखना चाहिए। खुले में शौच नहीं करना चाहिए, गन्दगी नहीं फैलानी चाहिए; नदियों, पोखरों, कुओं तथा पेयजल के स्रोतों को स्वच्छ रखना चाहिए। प्रायः लोग कूड़ा - कचरा इधर - उधर बिखेर देते हैं, खुले में मल - मूत्र का त्याग करते हैं तथा पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं, परन्तु हमें स्वयं ऐसा नहीं करना चाहिए और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकना चाहिए। इसमें परस्पर सहयोग एवं सहभागिता का प्रयास जरूरी है।। 

5. उपसंहार - स्वच्छता मानव - सभ्यता का एक श्रेष्ठ संस्कार है। स्वच्छता से समस्त पर्यावरण को स्वच्छ रखने की चेतना बढ़ती है। भारत में स्वच्छता अभियान एक अच्छी योजना है। सुनागरिक होने के नाते हमें स्वच्छता के प्रचार प्रसार में योगदान करना चाहिए।

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