(1) तेजाब की बढ़ती हुई सान्द्रता वर्षा, ताल जल, बर्फ, झीलों, नदियों, भूजल तथा मृदा में आसानी से पायी जाती है।
(2) मृदा एवं चट्टानों में तीव्र गति से तेजाबीकरण करने वाली प्राकृतिक, भौतिक, रसायनिक तथा जैविक क्रियाएं होती रहती हैं।
(3) ज्वालामुखी विस्फोट व बिजली गिरने जैसी भौतिक तथा रसायनिक घटनाएं भी अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी है।
(4) इसके अतिरिक्त दलदल, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से तेजाबी गैस उत्पन्न करने वाले औद्योगिक बहिःस्राव, जंगलों का कटना, खाद व उर्वरकों का अनियंत्रित उपयोग तथा उनकी जैव मात्रा क्षेत्र विशेष में तेजाबीकरण के लिए उत्तरदायी हैं।
(5) वातावरण में वायु प्रदूषण से बनने वाले रासायनिक यौगिक जैसे नाइट्रोजन, ऑक्साइड, नाइट्रिक अम्ल तथा अमोनिया लवण भी तेजाबकारी प्रभाव रखते हैं तथा दो ये प्रदूषक यौगिक जल की किसी भी विशिष्ट अवस्था जैसे ताल जल एवं ओस कणों के रूप में गिरकर तेजाब के रूप में एकत्रित होते रहते हैं।
(6) वर्षा से तेजाब के कण, पादपों, पशुओं या मनुष्य निर्मित ढांचों के तुरन्त सम्पर्क में आते हैं तो प्रत्यक्ष प्रभाव उत्पन्न होते हैं तथा जब यह तेजाब मृदा एवं जलीय पर्यावरण में रसायनिक परिवर्तन उत्पन्न करते हैं तो अप्रत्यक्ष प्रभाव उत्पन्न होते हैं।