Question
टी.वी. : वरदान या अभिशाप

Answer

दूरदर्शन के लाभ-भारत जैसे विशाल देश में दरदर्शन अत्यंत महत्त्वपर्ण साधन है। आज हमारे देश के सामने अनेकानेक समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। दूरदर्शन के माध्यम से उन समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट कर उनके समाधान की दिशा में प्रयत्न किया जा सकता है। ज्ञान-विज्ञान, समाज-शिक्षा तथा खेती-बाड़ी संबंधी विषयों के संबंध में जानकारी द्वारा लोगों का ज्ञानवर्द्धन किया जा सकता है। देश में मद्यपान के कुप्रभावों, परिवार नियोजन की आवश्यकता, भारतीय जीवन में विविधता होते हुए भी एकता इत्यादि विषयों पर विभिन्न कार्यक्रम दिखाकर लोगों को अधिक जागरूक बनाया जा सकता है। इस दिशा में हमारा दूरदर्शन अब रूचि लेने. लगा है, यह प्रसन्नता का विषय है।
उपयोगी कार्यक्रम-आजकल दूरदर्शन के अनेक चैनलों पर बहुत ही समाजोपयोगी कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं। डिस्कवरी, ज्याग्राफिक जैसे चैनल पूरी तरह ज्ञानवर्द्धक हैं। कुछ समाचार-चैनल दिन-रात विविध प्रकार के समाचार विचार-विमर्श, वाद-विवाद या साक्षात्कार प्रसारित करते हैं। इनसे हमारा ज्ञानवर्द्धन होता है। इसी तरह कुछ मनोरंजन चैनल विविध समस्याओं पर आधारित हैं। आजकल ‘बालिका वधू’ और ‘उतरन’ जैसे सीरियल नारी के शोषण और अशिक्षा के दंश को दिखाकर समाज को जागरूक बना रहे हैं। इसी प्रकार कुछ चैनल देश की नन्हीं प्रतिभाओं को ऊपर उठाने में लगे हुए हैं।
हानिकारक कार्यक्रम जब से दूरदर्शन के निजी चैनलों को हरी झंडी मिली है, तब से कुछ खतरे भी सामने आने लगे हैं। खुले मनोरंजन के नाम पर नंगेपन को बढ़ावा मिल रहा है। नृत्य के नाम पर कैबरे डांस का प्रचलन बढ़ गया है। इधर कुछ धार्मिक चैनल धर्म के नाम पर अंधविश्वासों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। इन चैनलों पर दिन-रात भूत-प्रेत, नाग-पूजा, पुनर्जन्म, शनि-देवता के कारनामे दिखाए जाते हैं। इनके कारण समाज का लाभ होने की बजाय हानि होती है। कुछ भोले-भाले नए दर्शन इनकी झूठी-सच्ची बातों में आकर अपनी हानि कर लेते हैं।
निष्कर्ष_ प्रश्न है कि क्या अंधविश्वास वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाई जा सकती है? इसका उत्तर आसान नहीं है। भारत धार्मिक देश है। यहाँ धर्म और विश्वास को अपनाने की आजादी है। जो लोग ज्योतिष, धर्म, हस्तरेखा, शनि, जादू, भूत-प्रेत पर विश्वास करते हैं, उन्हें अपने मत के प्रचार से कैसे रोका जाए। कुछ लोग योग, भक्ति और प्रवचनों को ढोंग मानते हैं। दूसरी ओर करोड़ों लोग इन पर जान छिड़कते हैं। अतः यह प्रश्न आसान नहीं है। इसका निर्णय देश की जनता पर छोड़ देना चाहिए।

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