विज्ञान और मानव का अटूट संबंध- विज्ञान और मानव का अटूट संबंध है। मानव ने सारा विकास ज्ञान और विज्ञान के सहारे किया है। विज्ञान का अर्थ है-प्रामाणिक ज्ञान। तकनीकी ज्ञान भी विज्ञान के अंतर्गत आता है।।
विज्ञान द्वारा सुख-सुविधा में वृद्धि- विज्ञान ने मानव को हर दृष्टि से सुखी और समृद्ध बनाया है। जीवन का कोई भी क्षेत्र ले लें। वहीं आज विज्ञान के चमत्कारों को बोलबाला है। विज्ञान ने अग्नि को माचिस और लाइटर में, पवन को पंखे में, गर्मी को हीटर में, ठंडक को कूलर में . कैद कर लिया है। चरखे की जगह स्वचालित कलें, चूल्हे की जगह गैस के आधुनिक उपकरण, बैलगाड़ी की जगह मोटर-कारें, इनके अतिरिक्त फ्रिज, वाशिंग मशीन, कैमरा, जहाज, क्रेन, रेल, बसें, खेलघर, सिनेमा, चित्रपट, विडियो अनगिनत साधनों की सहायता से आज का जीवन सरल हो गया है।
कंप्यूटर, ऑफसेट प्रिटिंग, रोबोट, मिजाइल, पनडुब्बी, सैन्य उपकरणों आदि ने तो मनुष्य को आश्चर्य में डाल दिया है। इनकी सहायता से मनुष्य का परिश्रम बचा है, समय बढ़ा है और जीवन सुंदरता हुआ है।
चिकित्सा-क्षेत्र में वरदान- विज्ञान की सहायता से आज मौत के मुंह में गए प्राणी को भी बचा लिया जाता है। कृत्रिम हृदय लगाना, प्लास्टिक सर्जेरी, अंग-प्रत्यारोपण, टैस्ट ट्यूब बेबी आदि विज्ञान के ही चमत्कार हैं। विभिन्न असाध्य रोगों के उपचार ढूँढकर विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को विश्वसनीय बना दिया है।
दासता से मुक्ति – प्राचीन युग में अमीरों को अपनी सेवा-टहल के लिए श्रमिकों की स्थायी .. आवश्यकता थी। इसीलिए दास-प्रथा का प्रारंभ हुआ। दुर्भाग्य से कुछ लोगों को आजीवन दास बनकर नारकीय जीवन बिताना पड़ता था। आज सौभाग्य से विज्ञान ने हर श्रम को स्वचालित मशीनों के जरिए कराकर दास-प्रथा को मुक्ति दे दी है।
वसुधैवकुटुंबकम की भावना- विज्ञान की सहायता से ही यह वसुधा कुटुंब की भांति बन पाई है। आज तार, बेतार, टेलीफोन, उपग्रह-संचार आदि के इतने तीव्र माध्यम खोजे जा चुके हैं कि मिनटों में विश्वभर के समाचार एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंच जाते हैं। परिवहन की सुविधा के सहारे सारा विश्व दो दिन में घूमा जा सकता है। आज विश्व के किसी कोने में आपत्ति आए, तो अन्य देश पलक झपकते ही उसकी सहायता के लिए आ पहुंचते हैं।
इस प्रकार विज्ञान की उपलब्धियों से मानव-जीवन सरल ही नहीं, बल्कि विस्तृत, सुखी और विश्वसनीय भी बना है।