व्यक्तिगत आत्म एवं सामाजिक आत्म के बीच अन्तर
व्यक्तिगत आत्म - इसमें एक ऐसा आभास होता है जिसमें व्यक्ति मुख्य रूप से अपने बारे में ही सम्बद्ध होने का अनुभव करता है। जैसे कि अभी हम लोगों ने पढ़ा कि जैविक आवश्यकताएँ जैविक आत्म को कैसे विकसित करती। अपितु शीघ्र ही बच्चे की उसके पर्यावरण में मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आवश्यकताएँ उसके व्यक्तिगत आत्म के रूप में उत्पन्न होने लगती हैं। किन्तु इन पंक्तियों में जीवन के उन पक्षों पर बल होता है जो उस व्यक्ति से जुड़ी होती हैं; जैसे- व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, व्यक्तिगत, उपलब्धि, व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ आदि ।
सामाजिक आत्म - इसका स्पष्टीकरण प्रायः दूसरों के सम्बन्ध में होता है जिसके अन्तर्गत सहयोग एकता सम्बन्धन, त्याग, समर्थन अथवा भागीदारी जैसे जीवन के प्रमुख पक्षों की ओर ध्यान आकर्षित किया जाता है। इस प्रकार आत्म परिवार और सामाजिक सम्बन्धों को महत्व देता है अतः इस आत्म को पारिवारिक अथवा सम्बन्धात्मक आत्म के रूप में भी जाना जाता है।