Questions

लंबा उत्तर। प्रश्न (5 गुण)

Take a timed test

6 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 15 Marks
भारत में हरित क्रान्ति' पर लेख लिखिए।
Answer
भारत में 1960 के दशक से पूर्व परम्परागत विधि से कृषि की जाती थी जिससे उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों की कमी रहती थी। अतः देश में कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु 1960 के दशक के मध्य में कई क्रान्तिपूर्ण कदम उठाए गए जिन्हें हरित क्रान्ति की संज्ञा दी गई।
हरित क्रान्ति के तहत उच्च उत्पादकता वाले एच.वाई.वी. बीजों, रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का उपयोग किया गया। इस नीति में सिंचाई साधनों को विकसित किया गया तथा कृषि में यन्त्रीकरण पर बल दिया गया। कृषि सम्बन्धी कार्यों को ट्रैक्टर, थ्रेसर आदि से सम्पन्न किया गया। अधिकांश कुओं पर विद्युत चालित मोटरों से सिंचाई की जाने लगी।
हरित क्रान्ति से फसलों का उत्पादन एवं उत्पादकता तेजी से बढ़ी जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ। हरित क्रान्ति का गेहूँ एवं चावल की फसल पर विशेष प्रभाव पड़ा। किन्तु इस नीति का लाभ बड़े किसानों तक ही सीमित रहा क्योंकि नवीन कृषि आगतों के प्रयोग हेतु अधिक पूँजी की आवश्यकता पड़ी।
View full question & answer
Question 25 Marks
पालमपुर गाँव की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer
पालमपुर गाँव की प्रमुख विशेषताएँ पालमपुर गाँव की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) मुख्य आर्थिक क्रिया-पालमपुर गाँव की मुख्य आर्थिक क्रिया कृषि है।
(2) कृषि भूमि का असमान वितरण-पालमपुर गाँव में कृषि भूमि का वितरण असमान है। पालमपुर गाँव में 450 परिवार रहते हैं जिनमें 150 परिवारों के पास कोई कृषि भूमि नहीं है। 240 परिवारों के पास 2 हैक्टेयर से कम कृषि भूमि है, 60 परिवारों के पास 2 हैक्टेयर से अधिक भूमि है तथा इनमें से कुछ परिवारों के पास 10 हैक्टेयर से भी अधिक भूमि है।
(3) कृषि में श्रम की स्थिति-छोटे कृषक अपनी भूमि पर स्वयं कार्य करते हैं, लेकिन बड़े और मझोले किसानों की भूमि पर भूमिहीन श्रमिक किराये पर कार्य करते हैं और मजदूरी प्राप्त करते हैं। यहाँ भूमिहीन श्रमिकों की स्थिति दयनीय है।
(4) कृषि के लिए आवश्यक पूँजी-छोटे किसान कृषि के लिए साहूकारों व व्यापारियों से ऋण लेते हैं, मझोले व बड़े किसान खेतों की बचत से पूँजी की व्यवस्था करते हैं। ये किसान ही कृषि अधिशेष की बिक्री करते हैं।
(5) अन्य आर्थिक क्रियायें-पालमपुर में कुछ गैर-कृषि आर्थिक क्रियायें भी हैं। ये हैं डेयरी व्यवसाय, लघुस्तरीय विनिर्माण कार्य तथा छोटे-छोटे दुकानदार, तांगे, बैलगाड़ी जैसे परिवहन के साधन आदि।
View full question & answer
Question 35 Marks
गमीण अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की स्थिति को अग्र बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) भूमि स्थिर है-ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि महत्त्वपूर्ण व्यवसाय है। किन्तु कृषि भूमि स्थिर है, इसमें आसानी से विस्तार नहीं किया जा सकता है। हाँ, कुछ बंजर भूमि को अवश्य कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
(2) कृषि भूमि से अधिक पैदावार के तरीके-कई विधियों से कृषि भूमि पर अधिक पैदावार की जा सकती है। कृषि में बहुविध फसल प्रणाली एवं आधुनिक कृषि विधि, जिसमें अधिक उपज वाले बीजों, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग शामिल है, द्वारा कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
(3) आधुनिक कृषि विधि के नकारात्मक प्रभाव-कृषि में आधुनिक विधियों को अपनाने से कई नकारात्मक प्रभाव भी पड़े हैं। अधिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि की उर्वरकता कम हो गई तथा नलकूपों से सिंचाई से भू-जल का स्तर काफी कम हो गया।
(4) किसानों में भूमि का वितरण-देश में कृषि जोतों को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-छोटी जोतें जिनका आकार 2 हेक्टेयर से कम है, मध्यम जोतें जिनका आकार 2 हेक्टेयर से ज्यादा किन्तु 10 हेक्टेयर से कम है तथा वृहद् जोतें जिनका आकार 10 हेक्टेयर से अधिक होता है। भारत में अधिकांश कृषकों के पास छोटी जोतें हैं।
(5) श्रम की व्यवस्था-ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी जोतों पर कृषक स्वयं कार्य करते हैं तथा मझोले एवं बड़े किसान अपने खेतों में काम करने के लिए दूसरे श्रमिकों को किराये पर लगाते हैं।
(6) खेतों के लिए आवश्यक पूँजी-वर्तमान में कृषि में आधुनिक विधियों के फलस्वरूप खेती में कार्यशील पूँजी की आवश्यकता बढ़ गई है। छोटे कृषकों की आर्थिक स्थिति सही नहीं होती। अतः उन्हें कृषि हेतु कार कार्यशील पूंजी के लिए साहूकारों एवं व्यापारियों से ऋण लेना पड़ता है। मझोले एवं बड़े कृषकों को खेती से बचत प्राप्त होती है तथा वे इसमें से कार्यशील पूँजी की व्यवस्था कर लेते हैं।
(7) अधिशेष कृषि उत्पादों की बिक्री-प्रायः छोटे कृषकों के पास कृषि अधिशेष बहुत कम बचता है या बचता ही नहीं है जबकि मझोले एवं बड़े कृषकों के पास जो अधिशेष बचता है वे अपने निकट की मण्डियों तथा बाजारों में बेचते हैं।
View full question & answer
Question 45 Marks
भारत में कृषि के प्रमुख तथ्यों पर एक लेख लिखिए।
Answer
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की स्थिति को अग्र बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) भूमि स्थिर है-ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि महत्त्वपूर्ण व्यवसाय है। किन्तु कृषि भूमि स्थिर है, इसमें आसानी से विस्तार नहीं किया जा सकता है। हाँ, कुछ बंजर भूमि को अवश्य कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
(2) कृषि भूमि से अधिक पैदावार के तरीके-कई विधियों से कृषि भूमि पर अधिक पैदावार की जा सकती है। कृषि में बहुविध फसल प्रणाली एवं आधुनिक कृषि विधि, जिसमें अधिक उपज वाले बीजों, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग शामिल है, द्वारा कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
(3) आधुनिक कृषि विधि के नकारात्मक प्रभाव-कृषि में आधुनिक विधियों को अपनाने से कई नकारात्मक प्रभाव भी पड़े हैं। अधिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि की उर्वरकता कम हो गई तथा नलकूपों से सिंचाई से भू-जल का स्तर काफी कम हो गया।
(4) किसानों में भूमि का वितरण-देश में कृषि जोतों को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-छोटी जोतें जिनका आकार 2 हेक्टेयर से कम है, मध्यम जोतें जिनका आकार 2 हेक्टेयर से ज्यादा किन्तु 10 हेक्टेयर से कम है तथा वृहद् जोतें जिनका आकार 10 हेक्टेयर से अधिक होता है। भारत में अधिकांश कृषकों के पास छोटी जोतें हैं।
(5) श्रम की व्यवस्था-ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी जोतों पर कृषक स्वयं कार्य करते हैं तथा मझोले एवं बड़े किसान अपने खेतों में काम करने के लिए दूसरे श्रमिकों को किराये पर लगाते हैं।
(6) खेतों के लिए आवश्यक पूँजी-वर्तमान में कृषि में आधुनिक विधियों के फलस्वरूप खेती में कार्यशील पूँजी की आवश्यकता बढ़ गई है। छोटे कृषकों की आर्थिक स्थिति सही नहीं होती। अतः उन्हें कृषि हेतु कार कार्यशील पूंजी के लिए साहूकारों एवं व्यापारियों से ऋण लेना पड़ता है। मझोले एवं बड़े कृषकों को खेती से बचत प्राप्त होती है तथा वे इसमें से कार्यशील पूँजी की व्यवस्था कर लेते हैं।
(7) अधिशेष कृषि उत्पादों की बिक्री-प्रायः छोटे कृषकों के पास कृषि अधिशेष बहुत कम बचता है या बचता ही नहीं है जबकि मझोले एवं बड़े कृषकों के पास जो अधिशेष बचता है वे अपने निकट की मण्डियों तथा बाजारों में बेचते हैं।
View full question & answer
Question 55 Marks
वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने हेतु आवश्यक साधनों का उल्लेख कीजिए।
Answer
उत्पादन-उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत विभिन्न आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाता है, जिससे लोगों की आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जा सके।
उत्पादन के साधन-किसी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु कई साधनों की आवश्यकता पड़ती है। मुख्य रूप से उत्पादन के साधनों को निम्न चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) भूमि-किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु भूमि सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। बिना भूमि के किसी भी वस्तु का उत्पादन करना संभव नहीं है। इसके अन्तर्गत भूमि व अन्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, वन, खनिज आदि को भी सम्मिलित किया जाता है। भूमि उत्पादन का स्थिर साधन है।
(2) श्रम-श्रम उत्पादन का सक्रिय साधन है। उत्पादन करने हेतु श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। उत्पादन प्रक्रिया में कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
(3) भौतिक पूँजी-पूँजी के बिना किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन संभव नहीं है । भौतिक पूँजी को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-स्थायी पूँजी तथा कार्यशील पूँजी। स्थायी भौतिक पूँजी के अन्तर्गत वे मदें शामिल हैं जो कई वर्षों तक चलती हैं, जैसे-औजार, मशीनें, भवन इत्यादि। कार्यशील पूंजी के अन्तर्गत उत्पादन हेतु आवश्यक कच्चे माल एवं नकद को शामिल किया जाता है।
(4) मानव पूँजी अथवा साहसी-उत्पादन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन साहसी है जो उत्पादन के अन्य साधनों भूमि, श्रम एवं भौतिक पूँजी को एकत्रित कर उत्पादन करते हैं। अतः उत्पादन करने के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिए ज्ञान और उद्यम की आवश्यकता पड़ती है, इसे मानवीय पूँजी कहा जाता है।
View full question & answer
Question 65 Marks
उत्पादन के विभिन्न साधनों पर एक लेख लिखिए।
Answer
उत्पादन-उत्पादन प्रक्रिया के अन्तर्गत विभिन्न आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाता है, जिससे लोगों की आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जा सके।
उत्पादन के साधन-किसी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु कई साधनों की आवश्यकता पड़ती है। मुख्य रूप से उत्पादन के साधनों को निम्न चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) भूमि-किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन करने हेतु भूमि सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। बिना भूमि के किसी भी वस्तु का उत्पादन करना संभव नहीं है। इसके अन्तर्गत भूमि व अन्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, वन, खनिज आदि को भी सम्मिलित किया जाता है। भूमि उत्पादन का स्थिर साधन है।
(2) श्रम-श्रम उत्पादन का सक्रिय साधन है। उत्पादन करने हेतु श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। उत्पादन प्रक्रिया में कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
(3) भौतिक पूँजी-पूँजी के बिना किसी भी वस्तु या सेवा का उत्पादन संभव नहीं है । भौतिक पूँजी को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-स्थायी पूँजी तथा कार्यशील पूँजी। स्थायी भौतिक पूँजी के अन्तर्गत वे मदें शामिल हैं जो कई वर्षों तक चलती हैं, जैसे-औजार, मशीनें, भवन इत्यादि। कार्यशील पूंजी के अन्तर्गत उत्पादन हेतु आवश्यक कच्चे माल एवं नकद को शामिल किया जाता है।
(4) मानव पूँजी अथवा साहसी-उत्पादन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन साहसी है जो उत्पादन के अन्य साधनों भूमि, श्रम एवं भौतिक पूँजी को एकत्रित कर उत्पादन करते हैं। अतः उत्पादन करने के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिए ज्ञान और उद्यम की आवश्यकता पड़ती है, इसे मानवीय पूँजी कहा जाता है।
View full question & answer