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Question 13 Marks
गाय में प्रसव के लक्षण लिखिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 23 Marks
गर्भाधान का परीक्षण क्यों और किस प्रकार करते है?
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 33 Marks
गर्भाधान का उचित समय क्या है?
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 43 Marks
प्रसव के समय ध्यान रखी जाने वाली कोई पाँच बातें बताइए ।
Answer
(1) प्रसव के समय सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
(2) गाय के नीचे पुआल या रेत बिछा देनी चाहिए।
(3) पशु की हर समय निगरानी रखनी चाहिए व प्रसव के लक्षण प्रकट होने पर सहायतार्थ तैयार रहना चाहिए।
(4) प्रसव के समय पशु को अनावश्यक रूप से न छेड़ें अपितु उसे स्वाभाविक रूप से ब्याने देना चाहिए।
(5) जब थैली दिखने के एक घण्टा पश्चात् तक यदि बच्चा बाहर न आवे तो बच्चे को निकालने में पशु की सहायता करें या पशु चिकित्सक की सहायता लेनी चाहिए।
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Question 53 Marks
गर्भ परीक्षण की रेक्टल पाल्पेशन विधि को स्पष्ट कीजिए।
Answer
साधारणतः यदि मादा गर्भाधान के 19-21 दिन पश्चात् वापस मद में नहीं आती है तब गर्भ ठहरने की संभावना बनती है। इसकी पुष्टि के लिए पशु के गर्भाधान के 60 दिन पश्चात् गर्भधारण की जांच की जाती है। इसके लिए रेक्टम पाल्पेशन विधि प्रचलित है। इस विधि द्वारा एक हाथ में रबर का दस्ताना पहनकर तथा साबुन लगाकर पशु के रेक्टम में हाथ डालकर गर्भाशय को छूते हैं। यदि गर्भाशय में एक छोटी सी वस्तु का आभास हो तो समझना चाहिए कि पशु ग्याभिन है।
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Question 63 Marks
ऋतुमयी होने पर गाय के गर्भाधान का उचित समय क्या होता है?
Answer
गाय के ऋतुमयी होने के 4-8 घंटे बाद गर्भित करने से उत्तम परिणाम प्राप्त हुए हैं। वैसे 8 से 20 घंटे बाद एक गर्भित कराने से भी परिणाम मिले हैं। मदकाल के प्रारम्भ होने के 12 घण्टे पश्चात् ही पशु को गर्भित करावें, क्योंकि इस अवधि में पशु के गर्भ ठहरने की संभावनाएँ अधिक रहती हैं। इसलिए जो पशु मदकाल के प्रथम लक्षण यदि सायंकाल दृष्टिगत हो तो मद में आये पशु को प्रातःकाल कराने के बजाय 12 घण्टे के अंदर से दो बार गर्भाधान कराने से गर्भ ठहरने की संभावनाएँ कहीं अधिक बढ़ जाती हैं। गाय में मदकाल के लक्षण प्रकट होते ही उसे तुरन्त निकटवर्ती गर्भाधान केन्द्र पर ले जाकर गर्भित कराना चाहिए। गाय, भैंस को ब्याने के बाद 3 महीने के भीतर गर्भ धारण करा देना चाहिए।
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Question 73 Marks
मादा जननांग गर्भाशय एवं गर्भाशय जीवा को स्पष्ट कीजिए।
Answer
गर्भाशय-गर्भाशय के ऊपर से दो मुड़े सूंग होते हैं। अन्दर वाली परत में से गर्भावस्था के समय गर्भाशय ग्रन्थियाँ निकलती हैं जिनके द्वारा भ्रूण के आरम्भ काल के पोषण के लिए एक प्रकार का द्रव निकलता है जिसे गर्भाशय दुग्ध कहते हैं।
गर्भाशय ग्रीवा-गर्भाशय का सबसे नीचे वाला भाग ग्रीवा कहलाता है और गर्भाशय तथा योनि के मध्य में रहता है। गाय जब गर्मी में हो या बच्चा देने के समय में गर्भाशय ग्रीवा का मुँह खुल जाता है, अन्यथा बंद रहता है। गाय में ग्रीवा की लम्बाई 4 इंच और व्यास 1 इंच होता है और इसके द्वारा शुक्राणु गर्भाशय में पहुँचते हैं।
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Question 83 Marks
गाय, भैंस, बकरी व भेड़ के मदचक्र की अवधि, मदकाल की अवधि, प्रजनन समय एवं गर्भकाल को स्पष्ट कीजिए।
Answer
गाय, भैंस, बकरी व भेड़ में मदचक्र की अवधि, मदकाल की अवधि, प्रजनन समय एवं गर्भकाल को निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है-
पशुप्रथम बार प्रजनन की आयुमदचक्र की अवधिमदकाल की अवधिप्रजनन का उचित समयगर्भकाल दिन
भारतीय नस्लें
गाय36-40 माह संकर 22 माह21 दिन10-24 घण्टेमदकाल के अंतिम 8 घंटे281 दिन
भैंस36-42 माह21 दिन12-36 घण्टेमदकाल के अंतिम 8 घंटे310 दिन
बकरी15-19 माह21 दिन1-2 दिनमदकाल के अंतिम 8 घंटे151 दिन
भेड़12-18 माह16½ दिन1-1½ दिनमदकाल के अंतिम 18 घंटे बाद147 दिन



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Question 93 Marks
पशुओं में मदकाल के प्रमुख लक्षण बताइये।
Answer
पशुओं में मदकाल के प्रमुख लक्षण निम्न प्रकार हैं-
(1) पशु में बेचैनी एवं उत्तेजना
(2) खाना-पीना कम कर देना
(3) बार-बार थोड़ा-थोड़ा पेशाब करना
(4) मादा का नर पशु पर चढ़ना
(5) मादा द्वारा मुड़-मुड़कर पीछे देखना
(6) रम्भाना या आवाज करना
(7) योनि से तरल पदार्थ निकलना
(8) पूंछ ऊपर उठाना
(9) भग का फूल जाना
(10) आंखों में चमक आना
(11) गर्भाशय का द्वार खुलना
(12) दूध का उत्पादन कम होना आदि।
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Question 103 Marks
मादा में वीर्य सेंचन की विधि को स्पष्ट कीजिए।
Answer
गाय एवं भैंस को गर्भित करने के लिए रेक्टोवेजाइनल विधि का अधिक प्रयोग करते हैं। इसमें एक हाथ मलद्वार में डालकर गर्भाशय ग्रीवा के बाहर से पकड़ लेते हैं तथा दूसरे हाथ से जीवाणु रहित प्लास्टिक की पिपेट योनि में धीरे-धीरे डालते हैं। पिपेट का एक सिरा गर्भाशय ग्रीवा तक पहुँचना चाहिए तथा उसके बाहरी सिरे से 0.5-2 मिली. वीर्य को पिचकारी द्वारा अंदर पहुँचा देते हैं। इस प्रकार पशु को कृत्रिम विधि से गर्भित किया जाता है। भेड़, बकरी के लिए वेजाईनल स्पेकुलम विधि प्रयोग में ली जाती है।
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Question 113 Marks
नर जनन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम बताइए।
Answer
नर जनन तंत्र को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) प्राथमिक अंग- (i) वृषण
(2) द्वितीयक अंग- (i) अधिवृषण
(ii) शुक्रवाहिनी
(iii) मूत्राशय
(iv) शिश्न
(3) सहायक लैंगिक अंग-(i) शुक्राशय
(ii) पुरःस्थ ग्रन्थि
(iii) मूलिपथ ग्रन्थि।
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Question 123 Marks
गाय में दूध बनने की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए।
Answer
गाय के चार थन होते हैं। प्रत्येक थन में एक थन नलिका और एक थन सिस्टर्न होता है। थन के भीतर थन सिस्टर्न, ग्रन्थि सिस्टर्न में खुलता है। ग्रन्थि सिस्टर्न गोल या अण्डाकार अथवा अनियमित आकार का रिक्त स्थान होता है। एक ग्रन्थि सिस्टर्न में 500 से 600 ग्राम दूध एकत्रित कने की क्षमता होती है। प्रत्येक ग्रन्थि सिस्टर्न में 12 से 50 तक दूध नलिकाएँ आकार खुलती हैं। प्रत्येक दुग्ध नलिका छोटी-छोटी बहुत सी नलिकाओं में विभाजित होती है। इन छोटी नलिकाओं के सिरे पर एक लोब्यूल होता है। जिस लोब्यूल में बहुत सी एलब्योलाई होती हैं, जिनमें दूध बनता है।
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Question 133 Marks
प्यूबर्टी (Puberty) से आप क्या समझते हैं?
Answer
मादा जनन अंगों में जब अण्डाशय पूर्णतः विकसित हो जाता है और उसमें अण्डाणुओं के बनने की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है तो मादा का यौवन आरम्भ हो जाता है, इस यौवनावस्था को प्यूबर्टी कहा जाता है। इस अवस्था में मादा गर्भधारण योग्य हो जाती है। यह अवस्था भारतीय गायों में लगभग 24 माह, संकर गायों में 18 माह, भैंसों में 30 माह, बकरियों में 12 माह एवं भेड़ों में 10 माह होती है।
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Question 143 Marks
दूध दोहन की अंगूठा दबाकर विधि को स्पष्ट कीजिए।
Answer
अंगूठा दबाकर विधि-इस विधि में चारों अंगुलियों को थन के चारों ओर लगाकर अंगूठा बीच में दबाकर दूध निकाला जा सकता है। इस विधि से दूध निकालते समय पशु को कष्ट होता है। जिससे पशु पूरा दूध नहीं उतारता है। कई बार अंगूठे के दबाव के कारण थन को भी क्षति पहुँचती है। इस विधि द्वारा लगातार दूध निकालने से थन खराब होने की संभावना रहती है। कभी-कभी थन में गाँठ पड़ जाती है। इस विधि द्वारा पशु को नहीं दोहना चाहिए।
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Question 153 Marks
दूध दोहन की चुटकी विधि पर टिप्पणी लिखिए।
Answer
इस विधि में थन को अंगूठा और प्रथम अंगुली के मध्य मजबूती से पकड़ा जाता है। इसके बाद थन को उसी स्थिति में नीचे की ओर खींचते हुए एवं ऊपर से नीचे तक हाथ खिसकाते हुए दूध की धार निकालते हैं। इस क्रिया को शीघ्रता से तब तक दोहराते हैं, जब तक थन का सम्पूर्ण दूध न निकल जावे। इस विधि का उपयोग छोटे थन वाली गाय एवं भेड़ों का दूध निकालते समय या अंत में जब थनों में थोड़ा दूध शेष रह जाये उसे निकालने के लिए करना चाहिए। इस विधि से दूध दोहन में पशु को कष्ट होता है।
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