Questions

2 अंक वाले प्रश्न

Take a timed test

63 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 12 Marks
$CO_2$ अणु की संरचना की व्याख्या करें।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 22 Marks
$\mathrm{CO}_{3}^{2-}$आयन की संरचना की व्याख्या अनुनाद द्वारा कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 32 Marks
नाइट्राइट आयन, $\mathrm{NO}_{2}^{-}$के लिए लूइस संरचना लिखें।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 42 Marks
CO के अणु की लूइस बिंदु संरचना लिखें।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 52 Marks
आबंध प्रबलता को आबंध-कोटि के रूप में आप किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 62 Marks
यद्यपि $NH_3$ तथा $H_2O$ दोनों अणुओं की ज्यामिती विकृत चतुष्फलकीय होती है, तथापि जल में आबंध कोण अमोनिया की अपेक्षा कम होता है। विवेचना कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 72 Marks
आयनिक आबंध बनाने के लिए अनुकूल कारकों को लिखिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 82 Marks
अष्टक नियम को परिभाषित कीजिए तथा इस नियम के महत्व और सीमाओं को लिखिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 92 Marks
आबंध कोटि से आप क्या समझते हैं? निम्नलिखित में आबंध कोटि का परिकलन कीजिए-
$N _2, O _2, O _2^{+}$तथा $O _2^{-}$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 102 Marks
निम्नलिखित अणुओं तथा आयनों की लुईस संरचनाएँ लिखिए।
$\mathrm{H}_{2} \mathrm{~S}, \mathrm{SiCl}_{4}, \mathrm{BeF}_{2}, \mathrm{CO}_{3}^{2-}, \mathrm{HCOOH}$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 112 Marks
हाइड्रोजन आबंध की परिभाषा दीजिए। यह वाण्डरवाल्स बलों की अपेक्षा प्रबल होता हैं या दुर्बल?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 122 Marks
$PCl_5$ अणु में संकरण का वर्णन कीजिए। इसमें अक्षीय आबंध विषुवतीय आबंधों की अपेक्षा अधिक लंबे क्यों होते हैं?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 132 Marks
कक्षकों के निरूपण में उपयुक्त धन (+) तथा ऋण (-) चिह्नों का क्या महत्व होता है?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 142 Marks
आण्विक कक्षक सिद्धांत के आधार पर समझाइए कि $Be_2$ अणु का अस्तित्व क्यों नहीं होता?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 152 Marks
परमाणु कक्षकों के रैखिक संयोग से आण्विक कक्षक बनने के लिए आवश्यक शर्तों को लिखें।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 162 Marks
संयोजकता आबंध सिद्धांत के आधार पर $H_2$ अणु के विरचन की व्याख्या कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 172 Marks
सिग्मा तथा पाई आबंध में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 182 Marks
इलेक्ट्रॉनों के आबंधी युग्म तथा एकांकी युग्म से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक को एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 192 Marks
निम्नलिखित अणुओं में कार्बन परमाणु कौन-से संकर कक्षक प्रयुक्त करते हैं?
i. $CH _3- CH _3$
ii. $CH _3 CH = CH _2$
iii. $CH _3 CH _2 OH$
iv. $CH _3 CHO$
v. $CH _3 COOH$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 202 Marks
निम्नलिखित परमाणुओं तथा आयनों के लुईस बिंदु प्रतीक लिखिए।
S और $S ^{2-}, Al$ तथा $Al ^{3+}, H$ और $H ^{-}$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 212 Marks
x-अक्ष को अंतर्नाभिकीय अक्ष मानते हुए बताइए कि निम्नलिखित में कौन-से कक्षक सिग्मा $(\sigma)$ आबंध नहीं बनाएँगे और क्यों?
i. 1 s तथा 1 s
ii. $1 s$ तथा $2 p_x$
iii. $2 p_y$ तथा $2 p_y$
iv. 1 s तथा 2 s
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 222 Marks
निम्नलिखित अणुओं में सिग्मा $(\sigma)$ तथा पाई $(\pi)$ आबंधों की कुल संख्या कितनी है?
i. $C _2 H _2$
ii. $C _2 H _4$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 232 Marks
$C _2 H _4$ तथा $C _2 H _2$ अणुओं में कार्बन परमाणुओं के बीच क्रमशः द्वि-आबंध तथा त्रि-आबंध के निर्माण को चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 242 Marks
क्या निम्नलिखित अभिक्रिया के फलस्वरूप B तथा N परमाणुओं की संकरण-अवस्था में परिवर्तन होता है?
$\mathrm{BF}_{3}+\mathrm{NH}_{3} \longrightarrow \mathrm{F}_{3} \mathrm{~B} \cdot \mathrm{NH}_{3}$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 252 Marks
निम्नलिखित अभिक्रिया में Al परमाणु की संकरण अवस्था में परिवर्तन (यदि होता है, तो) को समझाइए-
$\mathrm{AlCl}_{3}+\mathrm{Cl}^{-} \longrightarrow \mathrm{AlCl}_{4}^{-}$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 262 Marks
परमाणु-कक्षकों के संकरण से आप क्या समझते हैं? $sp, sp^2$ तथा $sp^3$ संकर कक्षकों की आकृति का वर्णन कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 272 Marks
$NH_3$ तथा $NF_3$ में किस अणु का द्विध्रुव-आघूर्ण अधिक है और क्यों?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 282 Marks
यद्यपि Be-H आबंध ध्रुर्वाय है, तथापि $BeH_2$ अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है। स्पष्ट कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 292 Marks
चतुष्फलकीय ज्यामिति के अलावा $CH_4$ अणु की एक और संभव ज्यामिति वर्ग-समतली है, जिसमें हाइड्रोजन के चार परमाणु एक वर्ग के चार कोनों पर होते हैं। व्याख्या कीजिए कि $CH_4$ का अणु वर्ग-समतली नहीं होता है।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 302 Marks
$CH_3COOH$ की नीचे दी गई ढाँचा-संरचना सही है, परंतु कुछ आबंध त्रुटिपूर्ण दर्शाए गए हैं। ऐसीटिक अम्ल की सही लुईस-संरचना लिखिए-
$H=\overset H{\underset H{\overset\vert{\underset\vert C}}}-\underset{..}{\overset{:O:}{\overset\vert C}}-\underset{..}O-H$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 312 Marks
निम्नलिखित तत्वों के परमाणुओं के लुईस बिंदु प्रतीक लिखिए।
Mg, Na, B, O, N, Br
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 322 Marks
निम्नलिखित अणुओं को आबंधों की बढ़ती आयनिक प्रकृति के क्रम में लिखिए-
LiF, $K _2 O , N _2, SO _2$ तथा $ClF _3$
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 332 Marks
ध्रुवीय सहसंयोजी आबंध से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 342 Marks
विद्युत-ऋतात्मकता को परिभाषित कीजिए। यह इलेक्ट्रॉन बंधुता से किस प्रकार भिन्न है?
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 352 Marks
द्विध्रुव आघूर्ण के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग बताएँ।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 362 Marks
हालाँकि $CO_2$ तथा $H_2O$ दोनों त्रिपरमाणुक अणु हैं, परंतु $H_2O$ अणु की आकृति बंकित होती है, जबकि $CO_2$ की रैखिक आकृति होती है। द्विध्रुव आघूर्ण के आधार पर इसकी व्याख्या कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 372 Marks
निम्नलिखित परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा धनायनों तथा ऋणायनों में विरचन को लुईस बिन्दु-प्रतीकों की सहायता से दर्शाइए-
  1. K तथा S
  2. Ca तथा O
  3. Al तथा N
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 382 Marks
$SO_3, NO_2$ तथा $\mathrm{NO}_{3}^{-}$ की अनुनाद संरचनाएँ लिखिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 392 Marks
नीचे दी गई संरचनाओं (1 तथा 2) द्वारा $H_3PO_3$ को प्रदर्शित किया जा सकता है। क्या ये दो संरचनाएँ $H_3PO_3$ के अनुनाद संकर के विहित (केनॉनीकल) रूप में माने जा सकते हैं? यदि नहीं, तो उसका कारण बताइए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 402 Marks
$\mathrm{CO}_{3}^{2-}$ आयन के संदर्भ में अनुनाद के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 422 Marks
रासायनिक आबंध के बनने की व्याख्या कीजिए।
Answer
SELF STUDY
View full question & answer
Question 432 Marks
$N _2$ में आबन्ध कोटि 3 होती है तथा यह प्रति चुम्बकीय होता है इसकी व्याख्या आण्विक कक्षक सिद्धान्त के आधार पर कीजिए।
Answer
$N$ का तलस्थ अवस्था विन्यास निम्न प्रकार होता है:
$ 7 N =1 s ^2 2 s ^2 2 p ^3 $
अतः अणु कक्षक आरेख के अनुसार
$N _2$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
$=(\sigma \mid s )^2\left(\sigma^* 1 s \right)^2(\sigma 2 s )^2\left(\sigma^* 2 s \right)^2$
$(\pi 2 p x)^*=(\pi 2 p y)^2(\sigma 2 p z)^2$ आबन्ध कोटिं $=1 / 2( Nb - Na )$
$ =(10-4)=3 $
अत: $N _2$ की आबन्ध कोटि = 3 तथा इससे सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय होता है।
View full question & answer
Question 442 Marks
आण्विक कक्षक सिद्धान्त के मुख्य बिन्दु क्या हैं? समझाइए।
Answer
जिस प्रकार परमाणु में इलेक्ट्रॉन विभिन्न परमाणु कक्षकों में उपस्थित रहते हैं, उसी प्रकार अणु में इलेक्ट्रॉन विभिन्न आण्विक कक्षकों में उपस्थित रहते हैं।
आण्विक कक्षक समान ऊर्जाओं एवं उपयुक्त सममिति वाले परमाणु कक्षकों के संयोग से बनते हैं।
परमाणु कक्षक के इलेक्ट्रॉन एक ही नाभिक के प्रभाव में रहते हैं, जबकि आण्विक कक्षक के इलेक्ट्रॉन दो या दो से अधिक नाभिकों द्वारा प्रभावित होते हैं। अतः परमाणु कक्षक एककेंद्रीय होते हैं, जबकि आण्विक कक्षक बहुकेंद्रीय होते हैं।
बनने वाले आण्विक कक्षकों की संख्या संयोग करने वाले परमाणु कक्षकों की संख्या के बराबर होती है। आण्विक कक्षक दो प्रकार के होते हैं- 'आबंधन आण्विक कक्षक' या 'बन्धी आण्विक कक्षक' तथा 'प्रतिआबंधन आण्विक कक्षक' या 'विपरीत बन्धी आण्विक कक्षक'।
बन्धी आण्विक कक्षकों की ऊर्जा परमाणु कक्षकों की ऊर्जा से कम होती है। अतः उनका स्थायित्व संगत विपरीत बन्धी आण्विक कक्षक से अधिक होता है।
जिस प्रकार किसी परमाणु के नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन प्रायिकता वितरण परमाणु कक्षक द्वारा दिया जाता है, उसी प्रकार किसी अणु में नाभिकों के समूह के चारों ओर इलेक्ट्रॉन प्रायिकता वितरण आण्विक कक्षक द्वारा दिया जाता है।
परमाणु कक्षकों की भाँति आण्विक कक्षकों में भी पाउली के नियम तथा हुंड के नियम के अनुसार ऑफबाऊ सिद्धान्त का पालन करते हुए इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं।
View full question & answer
Question 452 Marks
$NH _3$ में संकरण की व्याख्या कीजिए।
Answer
$NH _3$ में $N$ पर $sp ^3$ संकरण होता है:
तलस्थ अवस्था में $N$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार होता

Image

चार $sp ^3$ संकर कक्षकों में से तीन $sp ^3$ संकर कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जबकि चौथे $sp ^3$ संकर में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। नाइट्रोजन के तीन $sp$ संकर कक्षक तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के $1 s$ कक्षकों के साथ अतिव्यापन करके तीन N-H आबंध बनाते हैं। एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म तथा आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म (1.p-b.p) के बीच प्रतिकर्षण, आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म-आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म (b. p bp) की अपेक्षा अधिक होता है। इससे $NH _3$ के अणु आबंध कोण 109.50 से घटकर $107^{\circ}$ हो जाता है तथा अणु की ज्यामिति विकृत होकर पिरामिडी हो जाती है।

Image

View full question & answer
Question 462 Marks
निम्न का कारण बताइए:
(a) HF द्रव है जबकि HCl गैस।
(b) $CH _3 OH$ तथा $CH _3 COOH$ में सहसंयोजी बन्ध होते हुए, भी ये जल में विलेय हैं।
Answer
(a) HF के अणु प्रबल अन्तरअणुक H-बन्ध द्वारा आकर्षित होकर पासपास आ जाते हैं अतः यह द्रव है, जबकि $HCl$ में अणुओं के मध्य दुर्बल वांडरवाल बल पाया जाता है अतः यह गैस है। (b) $C _2 H _5 OH$ तथा $CH _3 COOH$ ध्रुवीय हैं अतः ये जल के साथ $H$-बन्ध बना लेते हैं, इसलिए ये जल में विलेय हैं।
View full question & answer
Question 472 Marks
σ अणु कक्षक तथा अणु कक्षक में विभेद कीजिए।
Answer
द्विपरमाणुक अणुओं में आण्विक कक्षकों को σ (सिग्मा), (पाई) तथा 8 ( डेल्टा ) इत्यादि नाम दिया गया है। σ आण्विक कक्षक बन्ध की अक्ष के परित: (around ) सममित होते हैं जबकि ग आण्विक कक्षक सममित नहीं होते। उदाहरण दो नाभिकों पर केन्द्रित 1s कक्षकों के रैखिक संयोग से दो आण्विक कक्षक σ1s तथा σ*1s कक्षक बनते हैं। z-अक्ष को अन्तरनाभिकीय अक्ष मानकर दो परमाणुओं 2p2 कक्षकों के रैखिक संयोग से भी दो ० आण्विक कक्षक बनते हैं जिन्हें σ2p, तथा σ*(2p.) आण्विक कक्षक कहते हैं। 2px तथा 2py कक्षकों के अतिव्यापन से बने आण्विक कक्षकों में आण्विक तल के ऊपर धनात्मक लोब तथा नीचे ऋणात्मक लोब होने के कारण ये आबन्ध अक्ष के परित: (around ) सममित नहीं होते। इन्हें तथा ग आण्विक कक्षक कहते हैं। बन्धी आण्विक कक्षकों में अन्तरानाभिकीय अक्ष के ऊपर तथा नीचे इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिकतम होता है जबकि विपरीत बन्धी आण्विक कक्षक में नाभिकों के मध्य एक नोड होता है जहाँ पर इलेक्ट्रॉन घनत्व शून्य होता है। 1s, 2p, तथा 2px परमाणु कक्षकों के संयोग से बन्धी तथा विपरीत बन्धी आण्विक कक्षकों के बनने को निम्न प्रकार दर्शाया जाता है

Image

Image

View full question & answer
Question 482 Marks
बन्धी आण्विक कक्षक तथा विपरीत बन्धी आण्विक कक्षकों में अन्तर बताइए।
Answer
तरंग यान्त्रिकी के अनुसार परमाणु कक्षक को एक तरंग फलन φ के रूप में दर्शाया जाता है। यह इलेक्ट्रॉन तरंग के आयाम (amplitude) को बताता है। इसे श्रोडिंगर-तरंग समीकरण के हल से प्राप्त करते हैं लेकिन बहु-इलेक्ट्रॉन निकाय के लिए श्रोडिंगर समीकरण का हल नहीं किया जा सकता अतः आण्विक कक्षक जो कि अणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन तरंग फलन है, को सन्निकट विधि से प्राप्त किया जाता है। इस विधि को परमाणु कक्षकों का रैखिक संयोग (LCAO) कहते हैं। इस विधि का प्रयोग H2 (समनाभिकीय द्विपरमाणुक अणु) पर करते हैं। माना कि हाइड्रोजन अणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं φA तथा φB से बना है। प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था में 1 s कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन होता है। इन हाइड्रोजन परमाणुओं के परमाणु कक्षकों को हम तरंग फलन φA तथा φB द्वारा प्रदर्शित करते हैं। गणितीय रूप से परमाणु कक्षकों के रैखिक संयोग को व्यक्तिगत परमाणु कक्षकों के तरंग फलनों φA तथा φB के योग या अंतर द्वारा व्यक्त किया जाता है जिससे अणु कक्षक बनते हैं।
φM = φA + φB
इस प्रकार दो प्रकार के आण्विक कक्षक, बन्धी आण्विक कक्षक σ तथा विपरीत बन्धी आण्विक कक्षक σ* प्राप्त होते हैं।
σ = φA + φB φ = φA + φB
σ* = φA - φB φ* = φA - φB
परमाणु कक्षकों के योग से बन्धी आण्विक कक्षक तथा विपरीत बन्धी आण्विक कक्षक परमाणु कक्षकों के अंतर से बनते हैं।

Image

View full question & answer
Question 492 Marks
बर्फ का घनत्व जल से कम क्यों होता है?
Answer
जल के ठण्डे होने पर $4^{\circ} C$ तक तो घनत्व बढ़ता है, उसके पश्चात् और अधिक ठण्डा होने पर हाइड्रोजन बन्ध के कारण $H _2 O$ के अणु एक निश्चित खुली पिंजरे जैसी रंभ्रमय संरचना में व्यवस्थित होते हैं जिसमें द्रव्यमान की तुलना में आयतन अधिक होता है। अतः बर्फ का घनत्व जल से कम होता है तथा बर्फ के पिघलने से बने जल का आयतन कम हो जाता है।
View full question & answer
Question 502 Marks
बर्फ के पिघलने से बने जल का आयतन कम हो जाता है। क्यों?
Answer
जल के ठण्डे होने पर $4^{\circ} C$ तक तो घनत्व बढ़ता है, उसके पश्चात् और अधिक ठण्डा होने पर हाइड्रोजन बन्ध के कारण $H _2 O$ के अणु एक निश्चित खुली पिंजरे जैसी रंभ्रमय संरचना में व्यवस्थित होते हैं जिसमें द्रव्यमान की तुलना में आयतन अधिक होता है। अतः बर्फ का घनत्व जल से कम होता है तथा बर्फ के पिघलने से बने जल का आयतन कम हो जाता है।
View full question & answer
Question 512 Marks
$BF _3$ की ज्यामिति त्रिकोणीय होती है जबकि $NH _3$ की पिरामिडी क्यों? कारण बताइए।
Answer
$BF _3$ में $B$ पर $sp ^2$ संकरण ( $3 \sigma$ बन्ध) है अतः इसकी ज्यामिति त्रिकोणीय होती है जबकि $NH _3$ में $N$ पर $3 \sigma$ बन्ध तथा एक संकरण होता है अतः इसकी एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण $sp ^3$ ज्यामिति पिरामिडी होती है।
View full question & answer
Question 522 Marks
निम्नलिखित यौगिकों में प्रत्येक कार्बन की संकरण अवस्था कौनसी है?
(i) $CH _3 Cl$
(ii) $HCONH _2$
(iii) $CH _3 CN$
View full question & answer
Question 532 Marks
$PCl _5$ का अस्तित्व होता है जबकि $NCl _5$ नहीं बनता है, क्यों?
Answer
नाइट्रोजन दूसरे आवर्त का तत्त्व है जिसके बाह्यतम कोश में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं लेकिन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या केवल 3 है।

Image

नाइट्रोजन में रिक्त $d$ कक्षक नहीं होता है अतः इसमें इलेक्ट्रॉन का उत्तेजन संभव नहीं है इस कारण इसमें अष्टक का प्रसार नहीं होता अतः इसकी संयोजकता 5 नहीं हो सकती। इसी कारण $NCl _5$ नहीं बनता है। जबकि $PCl _5$ में स्थित फॉस्फोरस तीसरे आवर्त का तत्त्व है अतः इसमें इलेक्ट्रॉन का उत्तेजन होकर इसकी संयोजकता 5 हो जाती है। इस कारण $PCl _5$ आसानी से बन जाता है।

Image

View full question & answer
Question 542 Marks
$CCl _2$ की जल से क्रिया नहीं होती जबकि $SiCl _4$ जल के साथ आसानी से क्रिया कर लेता है, क्यों?
Answer
$CCl _2$ में कार्बन का अष्टक पूर्ण है तथा कार्बन (द्वितीय आवर्त) के पास रिक्त $d$ कक्षक भी नहीं है अतः यह जल से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने में सक्षम नहीं है अतः इसकी जल से क्रिया नहीं होती लेकिन $SiCl _4 Si$ (तृतीय आवर्त) के पास रिक्त $d$ कक्षक होने के कारण यह जल से इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से ग्रहण कर लेता है। अतः $SiCl _4$ जल से आसानी क्रिया कर लेता है।
$ SiCl _4+2 H _2 O \rightarrow SiO _2+2 HCl $
View full question & answer
Question 552 Marks
$Sn$ भित्र-भित्र ऑक्सीकरण अवस्थाओं में दो यौगिक बनाता है $SnCl _2$ तथा $SnCl _2$ लेकिन इनमें से $SnCl _4$ ठोस होता है जबकि $SnCl _2$ वाष्पशील द्रव, क्यों?
Answer
$SnCl _2$ तथा $SnCl _4$ में $Sn$ की ऑक्सीकरण अवस्था क्रमश: +2 तथा +4 है $Sn ^{+4}$ के छोटे आकार के कारण इसकी ध्रुवण क्षमता अधिक होती है, अतः यह ऋणायन का ध्रुवण आसानी से कर देता है जिसके कारण $SnCl _4$ सहसंयोजी होता है जबकि $SnCl _2$ में $Sn ^{2+}$ के छोटे आकार के कारण इसमें आयनिक गुण अधिक होते हैं। इसी कारण $SnCl _2$ ठोस होता है जबकि $SnCl _4$ वाष्पशील द्रव।
View full question & answer
Question 562 Marks
आयनिक विभव क्या होता है? इसके आधार पर ऑक्साइडों की अम्लीय प्रवृत्ति तथा कार्बोनेटों के स्थायित्व की व्याख्या कीजिए।
Answer
जब दो समान परमाणुओं के बीच $($जैसे $\ce{H_2, O_2, Cl_2, N_2}$ तथा $F_2 )$ सहसंयोजी आबंध बनता है, तब साझित इलेक्ट्रॉन युग्म दोनों परमाणुओं द्वारा समान रूप से आकर्षित होता है। इससे यह इलेक्ट्रॉन युग्म दोनों नाभिकों के बीच में रहता है। इस प्रकार के आबंध को 'अध्रुवीय सहसंयोजी आबंध' कहते हैं। लेकिन $HF$ जैसे विषम परमाणुक अणु में दो परमाणुओं के बीच साझित इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक विद्युत ऋणी परमाणु फ्लुओरीन की ओर विस्थापित हो जाता है। इस प्रकार के आबंध को ध्रुवीय सहसंयोजक आबंध कहते हैं। दो परमाणुओं के मध्य विद्युत ऋणता में अन्तर बढ़ने पर अणु की ध्रवुता भी बढ़ती है तथा ध्रुवता के कारण ऐसे अणु में द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न हो जाता है।
द्विध्रुव आघूर्ण $($Dipole moment$):$ किसी ध्रुवीय अणु में आवेश के मान तथा आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।
द्विध्रुव आघूर्ण $\mu =$ आवेश $(Q) \times (r)$ आवेशों के बीच की दूरी या $\mu = (Q) \times (r)$ या $µ = (Q) \times d$
द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक डिबाए $D ($ Debye$)$ है।
$1 D =3.33 \times 10^{-30} Cm$ जहाँ $C =$ कूलाम, $ m =$  मीटर
अध्रुवीय अणुओं के द्विध्रुव आघूर्ण का मान शून्य होता है $(\mu=0)$ लेकिन वे अणु जिनका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य नहीं होता है वे ध्रुवीय होते हैं। $(\mu \neq 0)$ जैसे $\ce{H_2Cl_2}$ इत्यादि अध्रुवीय जबकि $\ce{HCl , HF}$ इत्यादि ध्रुवीय अणु हैं। द्विध्रुव आघूर्ण एक सदिश राशि है जिसे एक छोटे तीर द्वारा दर्शाया जाता है जिसकी पूँछ धनात्मक केन्द्र पर तथा सिर ऋणात्मक केन्द्र पर होता है। उदाहरण
Image
अणु में इलेक्ट्रॉन घनत्व के विस्थापन की दिशा को लूइस संरचना पर क्रॉस तीर लगाकर दर्शाया जाता है जिसका क्रॉस अणु के धनात्मक सिरे पर तथा शीर्ष ऋणात्मक सिरे पर होता है।
दो परमाणुओं के मध्य विद्युत ऋणता में अन्तर बढ़ने पर द्विध्रुव आघूर्ण का मान बढ़ता है। जैसे
$\ce{HF < HCl > HBr > HI}$
View full question & answer
Question 572 Marks
(i) आबन्ध लम्बाई, संकरण पर निर्भर करती है। समझाइए।
(ii) F F आबन्ध एन्थैल्पी CI-CI आबन्ध एन्थैलपी से कम होती है, क्यों ?
Answer
(i) संकरण में गुण बढ़ने पर बन्ध लम्बाई कम होती है। उदाहरण C-C बन्ध लम्बाई निम्न क्रम में कम होती है:

Image

(ii) F F आबन्ध एन्थैल्पी का मान Cl-Cl आबन्ध एन्बैल्पी से कम होता है क्योंकि फ्लुओरीन के छोटे आकार के कारण इसमें दोनों फ्लुओरीन परमाणुओं पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण अधिक होता है जिससे बन्ध आसानी से टूट जाता है।
View full question & answer
Question 582 Marks
आयनिक यौगिकों की विलेयता के बारे में समझाइए।
Answer
आयनिक बन्ध के निर्माण के लिए निम्न शर्तें आवश्यक हैं:
(i) धातु की निम्न आयनन एन्थैल्पी-आयनन एन्थैल्पी का मान कम होने पर धनायन आसानी से बन जाते हैं, इसी कारण क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु आसानी से धनायन बनाती हैं।
(ii) अधातु की उच्च ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पीअधातु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी उच्च (ऋणात्मक) होने पर उसकी इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है अतः वह आसानी से ॠणायन बनाता है। इसी कारण हैलोजन की ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति अधिक होती है।
(iii) उच्च जालक एन्थैल्पी: गैसीय धनायनों तथा ऋणायनों के आकर्षण से एक मोल आयनिक क्रिस्टल के बनने पर मुक्त ऊर्जा को जालक ऊर्जा कहते हैं। जालक ऊर्जा का मान जितना अधिक होगा आयनिक यौगिक का निर्माण उतना ही आसान होगा तथा क्रिस्टल संरचना अधिक स्थायी होगी।
आयनिक यौगिक का बनना (MX):

Image

View full question & answer
Question 592 Marks
$CO _2$ अध्रुवीय होती है, जबकि $SO _2$ ध्रुवीय, क्यों?
Answer
$CO _2$ तथा $SO _2$ दोनों ही यौगिकों में ध्रुवीय बन्ध होते हैं लेकिन $CO _2$ की ज्यामिति रेखीय होती है, अतः इसके दोनों C-O बन्धों के बन्ध आघूर्ण एक-दूसरे के विपरीत दिशा में होने के कारण इनका प्रभाव निरस्त हो जाता है जिसके कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है अतः $CO _2$ अध्रुवीय है जबकि $SO _2$ में ऐसा नहीं होता क्योंकि इसकी ज्यामिति कोणीय होती है अतः इसका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य नहीं होता अतः यह ध्रुवीय है।

Image

View full question & answer
Question 602 Marks
आयनिक बन्ध में आंशिक सहसंयोजी बन्ध के गुण किस प्रकार आते हैं? समझाइए।
Answer
यौगिक में जब धनायन, ऋणायन के इलेक्ट्रॉन अभ्र को अपनी ओर आकर्षित करता है तो उनके मध्य आवेश की मात्रा बढ़ती है। जिससे दोनों नाभिकों के मध्य इलेक्ट्रॉनीय आवेश घनत्व में वृद्धि होती है। इसे ऋणायन का ध्रुवण कहते हैं तथा इससे आयनिक बन्ध में आंशिक सहसंयोजी लक्षण आता है।
धनायन की ध्रुवण क्षमता तथा ऋणायन के ध्रुवण की मात्रा बढ़ने से आबन्ध में सहसंयोजी गुण अधिक आता है।
इसके लिए आवश्यक शर्तें निम्न प्रकार हैं:
धनायन के आकार के घटने तथा ऋणायन का आकार बढ़ने पर आयनिक आबंध में सहसंयोजी लक्षण में वृद्धि होती है।
धनायन तथा ऋणायन पर आवेश की मात्रा बढ़ने से भी आयनिक आबंध में सहसंयोजी लक्षण बढ़ते हैं।
समान आकार तथा समान आवेश के धनायनों में से उस धनायन की ध्रुवण क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास उत्कृष्ट गैस विन्यास $n s^1 np ^1$ की अपेक्षा संक्रमण धातुओं के अनुरूप $(n-1) n s^2 n p^6$ होता है।
View full question & answer
Question 612 Marks
द्विध्रुव आघूर्ण किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। 
Answer
द्विध्रुव आघूर्ण (u) - किसी ध्रुवीय अणु में आवेश के मान तथा आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।
द्विध्रुव आघूर्ण (u) = आवेश (Q) x (r) आवेशों के बीच की दूरी या = Q x r या u = Q x d द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक (D) Debye है।
$1 D =3.3 \times 10^{-30} Cm C =$ कूलाम, $m =$ मीटर द्विध्रुव आघूर्ण एक सदिश राशि है।

Image

बहुपरमाणुक अणुओं का द्विध्रुव आघूर्ण, उसके विभिन्न ध्रुवीय बन्धों के आबन्ध आपूणों का सदिश योग होता है।
वे अणु जिनमें सभी बन्ध समान होते हैं तथा जिनकी ज्यामिति सममित व नियमित होती है, जैसे - रेखीय, त्रिकोणीय समतल तथा चतुष्फलकीय (इत्यादि) तो अणु का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है BF3 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है, क्योंकि इसकी ज्यामिति त्रिकोणीय समतल होती है तथा इसमें सभी बन्ध समान हैं जो एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं।

Image

$H _2 O$ की अंकित (bent) आकृति के कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण उच्च होता है।

Image

View full question & answer
Question 622 Marks
आबन्ध एन्थैल्पी किसे कहते हैं? बहुपरमाणुक अणुओं में यह किस प्रकार ज्ञात की जाती है?
Answer
आबन्ध एन्थैल्पी गैसीय अवस्था में दो परमाणुओं के मध्य विशिष्ट आबन्धों के एक मोल को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आबन्ध एन्थैल्पी कहते हैं। इसका मात्रक $kJ mol ^{-1}$ होता है।
$H _2( g ) \rightarrow H ( g )+ H ( g ) \Delta H ^{\circ}=435.8 kJ mol ^{-1}$ बहुपरमाणुक अणु जैसे - $H _2 O$ में दो $O - H$ बन्ध हैं लेकिन इनकी आबन्ध एन्थैल्पी का मान भित्न-भित्र है अतः इनमें औसत आबन्ध एन्थैल्पी प्रयुक्त की जाती है।
औसत आबन्ध एन्थैल्पी =

Image

View full question & answer
Question 632 Marks
फार्मल आवेश किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। 
Answer
बहुपरमाणुक अणु या आयन के किसी परमाणु का फार्मल आवेश उसकी विगलित स्थिति (अर्थात् मुक्त परमाणु अवस्था) में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या तथा लूइस संरचना में उस परमाणु को प्रदत्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या के अंतर के बराबर होता है। फार्मल आवश को निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है

Image

परमाणु (1) पर फार्मल आवेश (F.C.) = 6 - 4 - 1/2(4) = 0
परमाणु (2) पर F.C. = 6 - 2 - 1/2(6) = 1
परमाणु (3) पर F.C. = 6 - 6 - 1/2(2) = -1

Image

View full question & answer