Question 15 Marks
मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer
View full question & answer→मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-
अक्टूबर तथा नवम्बर के महीनों में परिवर्तनीय मौसम रहता है अर्थात् इन महीनों में मानसून की वापसी होती है। अक्टूबर के प्रारम्भ में मानसूनी पवनें उत्तर के मैदान से हट जाती हैं।
अक्टूबर एवं नवम्बर का महीना, गर्म वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल होता है।
मानसून की वापसी होने से आसमान साफ एवं तापमान में वृद्धि हो जाती है। दिन का तापमान उच्च होता है, जबकि रातें ठण्डी एवं सुहावनी होती हैं।
इस समय आर्द्रता बनी रहती है। अतः उच्च तापमान एवं आर्द्रता वाली अवस्था के कारण तीव्र उमस होती है। इसे सामान्यतः 'क्वार की उमस' कहते हैं।
अक्टूबर के उत्तरार्द्ध में उत्तरी भारत में तापमान तेजी से गिरने लगता है।
इस समय उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात आते हैं, जो भारत के पूर्वी तट पर व्यापक एवं भारी वर्षा करते हैं। ये प्रायः विनाशकारी होते हैं। गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले डेल्टा प्रदेशों में इनके द्वारा जान एवं माल की भारी क्षति होती है।
कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल एवं बंगलादेश के तटीय क्षेत्रों में भी पहुँच जाते हैं।
कोरोमण्डल तट पर अधिकतर वर्षा इन्हीं चक्रवातों तथा अवदाबों से होती है।
अक्टूबर तथा नवम्बर के महीनों में परिवर्तनीय मौसम रहता है अर्थात् इन महीनों में मानसून की वापसी होती है। अक्टूबर के प्रारम्भ में मानसूनी पवनें उत्तर के मैदान से हट जाती हैं।
अक्टूबर एवं नवम्बर का महीना, गर्म वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल होता है।
मानसून की वापसी होने से आसमान साफ एवं तापमान में वृद्धि हो जाती है। दिन का तापमान उच्च होता है, जबकि रातें ठण्डी एवं सुहावनी होती हैं।
इस समय आर्द्रता बनी रहती है। अतः उच्च तापमान एवं आर्द्रता वाली अवस्था के कारण तीव्र उमस होती है। इसे सामान्यतः 'क्वार की उमस' कहते हैं।
अक्टूबर के उत्तरार्द्ध में उत्तरी भारत में तापमान तेजी से गिरने लगता है।
इस समय उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात आते हैं, जो भारत के पूर्वी तट पर व्यापक एवं भारी वर्षा करते हैं। ये प्रायः विनाशकारी होते हैं। गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले डेल्टा प्रदेशों में इनके द्वारा जान एवं माल की भारी क्षति होती है।
कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल एवं बंगलादेश के तटीय क्षेत्रों में भी पहुँच जाते हैं।
कोरोमण्डल तट पर अधिकतर वर्षा इन्हीं चक्रवातों तथा अवदाबों से होती है।