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Poem 1 (क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया का गीत question types

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Poem 1 (क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया का गीत questions

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कार्नेलिया का गीत' का मूल कथ्य अपने शब्दों में लिखिए। ###"कार्नेलिया का गीत' कविता के आधार पर भारत की प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
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मेरी आशा आह! बावली, तूने खो दी सकल कमाई।' पंक्ति के आधार पर देवसेना की मनोव्यथा का चित्रण कीजिए। ###'देवसेना का गीत' के आधार पर देवसेना की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए।
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चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर 
प्रलय चल रहा अपने पथ पर।
मैंने निज दुर्बल पद-बल पर,
उससे हारी-होड़ लगाई।
लौटा लो यह अपनी थाती 
मेरी करुणा हा-हा खाती। 
विश्व! न सँभलेगी यह मुझसे 
इससे मन की लाज गंवाई।
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छलछल थे संध्या के श्रमकण,
आँसू-से गिरते थे प्रतिक्षण।
मेरी यात्रा पर लेती थी -
नीरवता अनंत अंगड़ाई
श्रमित स्वप्न की मधमाया में,
गहन-विपिन की तरु-छाया में,
पथिक उनींदी श्रुति में किसने
यह विहाग की तान उठाई।
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अरुण यह मधुमय देश हमारा! 
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर-नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर-मंगल कुंकुम सारा! 
लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे। 
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा। 
बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल। 
लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा। 
हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती दुलकाती सुख मेरे। 
मदिर ऊंघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।
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