आतंकवाद कैसा भी हो उसका उद्देश्य भय पैदा करना ही होता है। आतंकवाद का अर्थ है-हिंसा की धमकी अथवा हिंसापूर्ण कार्य अथवा लोगों में भय पैदा करके अपनी माँगें मनवाना। लैटिन भाषा के शब्द टेरेरे (Terrere) से बना टेरर (Terror) शब्द का अर्थ, आतंक या भय है।
आतंकवाद के कई रूप हैं; जैसे-धार्मिक आतंकवाद, जिसके अंतर्गत अलकायदा, लश्कर ए तैयबा, आई. एस. आई. एस जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन द्वारा अमेरिका में एक बड़े आतंकी घटना 9/11 को अंजाम दिया गया था, तो वहीं वर्ष 2013 में अलकायदा से अलग होकर अबू बकर अल बगदादी ने ‘आई. एस. आई. एस. का गठन किया। आई. एस. आई. एस. का पूरा नाम ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ है। इस संगठन ने जून, 2014 में मोसुल समेत इराक के कई इलाकों पर कब्ज़ा करने और पहले से सीरियाई कब्जे वाले इलाकों को मिलाकर खिलाफत साम्राज्य की घोषणा की और बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित कर दिया। आई. एस. आई. एस. ने वर्ष 2013 में लगभग 350 आतंकी हमले किए। अभी हाल ही में 15 नवंबर, 2015 को पेरिस में हुए आतंकी हमले में 130 से अधिक लोगों के मारे जाने की सूचना है। इसको इसी आतंकी संगठन द्वारा अंजाम दिया गया है। इस आतंकी संगठन ने पूरे विश्व को आतंकित कर दिया है। अमेरिका, रूस समेत विश्व की कई बड़ी शकि तयाँ इस आतंकी संगठन को समाप्त करने के लिए लगातार सीरिया में बमबारी कर रही हैं और आई. एस. आई. एस. के ठिकानों को निशाना बना रही हैं। आतंकवाद के रूप में नारको आतंकवाद, साइबर आतंकवाद, आत्मघाती आतंकवाद एवं वैचारिक आतंकवाद भी पूरे विश्व में फैल चुका है।
वर्तमान में भारत भी आतंक से पीड़ित है, वह भी अपने पड़ोसी देश द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के कारण। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आतंकवाद की भेंट चढ़ गईं। भारत की संसद पर आतंकी हमले हुए और देश की संप्रभुता को तहस-नहस करने का प्रयास किया गया। देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई बार-बार आतंकियों के निशाने पर रही है तो वहीं पंजाब और जम्मू-कश्मीर भी आतंक का दंश झेल रहे हैं। विशेषकर जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का मुख्य शिकार बना हुआ है।
आतंकवाद पैर पसारते-पसारते विश्व स्तर तक अपनी जड़ जमा चुका है। उसके तार आज विश्व स्तर पर फैले हैं। उसे सबसे ताकतवर, समृद्ध और सुरक्षा की दृष्टि से सशक्त माना जाता है। अमेरिका दूसरे देशों में पनपते हुए आतंक की खिल्ली उड़ाता था, आतंक से बेखबर अमेरिका के गगनचुंबी टावर जब धू-धू करके धरती में समा गए, तब उसके कान खड़े हुए। संपूर्ण अमेरिका काँप उठा। वहाँ के राष्ट्रपति ने हाथ उठाकर प्रतिज्ञा की कि आतंकी संगठन का मुखिया ओसामा बिन लादेन यदि चूहे के बिल में भी छिपा होगा, वहाँ से भी ढूंढ़ निकालेंगे। इस कारण अफगानिस्तान तहस-नहस हुआ, पाक में भी संदिग्ध स्थानों पर बम बरसाए, परंतु लादेन का अता-पता नहीं चला। लादेन ने अफगानिस्तान में रहते अपना अस्तित्व दिखाया। इसी तरह पाक में बैठकर ही मुंबई और दिल्ली में तहलका मचाया। इस तरह आतंकियों की अंतर्राष्ट्रीय शक्ति जोर पकड़ती जा रही है। इस तरह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से विश्व के अनेक देश आतंक से प्रभावित हैं।
लाइलाज होता हुआ आतंकवाद ऐसे ही प्रचार-प्रसार पाता गया तो देशों पर इनका साम्राज्य भी हो सकता है। आतंकी गुटों ने परमाणु केंद्रों पर अधिकार कर लिया तो बंदर के हाथ में गई तलवार सर्व विनाश का कारण बन सकती है। समय रहते राष्ट्रों ने एकजुट होकर आतंक के विरुद्ध इच्छाशक्ति नहीं दिखाई तो आतंकवाद अपना प्रभुत्व बढ़ाता जाएगा। उसके बाद चेतना आई तो बहुत देर हो गई होगी। आज खुद की बनाई गई कुल्हाड़ी अपने ही पैरों में गिरती हुई दिखाई दे रही है। कवि की निम्न पंक्तियाँ भारत में आतंक के बारे में सटीक ही हैं
संसद पर जब चली गोलियाँ, भारत की आँख खुली रह जाय।
हुए जवान शहीद भारत के, अफ़जल सुरक्षा दिया बढ़ाय।
आँसू बहाए शहीद पत्नियाँ, अफ़जल निश्चित रहा हर्षाय।
हुआ धमाका फिर मुंबई में, सोता भारत फिर-फिर जगजाय।।