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लेखन - विभाग question types

58 questions across 5 question groups — pick any mix to generate a HINDI - A (वसंत) paper with step-by-step answer keys.

58
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Sample Questions

लेखन - विभाग questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

मनुष्य को चाहिए कि संतुलित रहकर अति के मार्गों का त्यागकर मध्यम मार्ग को अपनाए। अपने सामर्थ्य की पहचान कर उसकी सीमाओं के अंदर जीवन बिताना एक कठिन कला है। सामान्य पुरुष अपने अहं के वशीभूत होकर अपना मूल्यांकन अधिक कर बैठता है और इसी के फलस्वरूप वह उन कार्यों में हाथ लगा देता है जो उसकी शक्ति में नहीं हैं। इसलिए सामर्थ्य से अधिक व्यय करने वालों के लिए कहा जाता है कि ‘तेते पाँव पसारिए, जेती लांबी सौर’। उन्हीं के लिए कहा गया है कि अपने सामर्थ्य , को विचार कर उसके अनुरूप कार्य करना और व्यर्थ के दिखावे में स्वयं को न भुला देना एक कठिन साधना तो अवश्य है, पर सबके लिए यही मार्ग अनुकरणीय है।
प्रश्न
(क) अति का मार्ग क्या होता है?
(i) असंतुलित माग
(ii) संतुलित मार्ग
(iii) अमर्यादित मार्ग
(iv) मध्यम मार्ग

(ख) कठिन कला क्या है?
(i) सामर्थ्य के बिना सीमारहित जीवन बिताना
(ii) सामर्थ्य को बिना पहचाने जीवन बिताना
(iii) सामर्थ्य की सीमा में जीवन बिताना
(iv) सामर्थ्य न होने पर भी जीवन बिताना

(ग) मनुष्य अहं के वशीभूत होकर
(i) अपने को महत्त्वहीन समझ लेता है।
(ii) किसी को महत्त्व देना छोड़ देता है।
(iii) अपना सर्वस्व खो बैठता है।
(iv) अपना अधिक मूल्यांकन कर बैठता है।

(घ) “तेते पाँव पसारिए, जेती लांबी सौर’ का आशय है
(i) सामर्थ्य के अनुसार कार्य न करना
(ii) सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना
(iii) व्यर्थ का दिखावा करना
(iv) आय से अधिक व्यय करना

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का शीर्षक हो सकता है
(i) आय के अनुसार व्यय
(ii) दिखावे में जीवन बिताना
(iii) सामर्थ्य से अधिक व्यय करना
(iv) सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना
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बातचीत करते समय हमें शब्दों के चयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सम्मानजनक शब्द व्यक्ति को उदात्त एवं महान बनाते हैं। बातचीत को सुगम एवं प्रभावशाली बनाने के लिए सदैव प्रचलित भाषा का ही प्रयोग करना चाहिए। अत्यंत साहित्यिक एवं क्लिष्ट भाषा के प्रयोग से कहीं ऐसा न हो कि हमारा व्यक्तित्व चोट खा जाए। बातचीत में केवल विचारों का ही आदानप्रदान नहीं होता, बल्कि व्यक्तित्व का भी आदान-प्रदान होता है। अतः शिक्षक वर्ग को शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। शिक्षक वास्तव में एक अच्छा अभिनेता होता है, जो अपने व्यक्तित्व, शैली, बोलचाल और हावभाव से विद्यार्थियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है और उन पर अपनी छाप छोड़ता है।
प्रश्न
(क) शिक्षक होता है
(i) राजनेता
(ii) साहित्यकार
(iii) अभिनेता
(iv) कवि

(ख) बातचीत में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना चाहिए?
(i) अप्रचलित
(ii) प्रचलित
(iii) क्लिष्ट
(iv) रहस्यमयी

(ग) शिक्षक वर्ग को बोलना चाहिए?
(i) सोच-समझकर
(ii) ज्यादा
(iii) बिना सोचे-समझे
(iv) तुरंत

(घ) बातचीत में आदान-प्रदान होता है–
(i) केवल विचारों का
(ii) केवल भाषा का
(ii) केवल व्यक्तित्व का
(iv) विचारों एवं व्यक्तित्व का

(ङ) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है
(i) बातचीत की कला
(ii) शब्दों का चयन
(iii) साहित्यिक भाषा
(iv) व्यक्तित्व का प्रभाव
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मानव जाति को अन्य जीवधारियों से अलग करके महत्त्व प्रदान करने वाला जो एकमात्र गुरु है, वह है उसकी विचार-शक्ति। मनुष्य के पास बुधि है, विवेक है, तर्कशक्ति है अर्थात उसके पास विचारों की अमूल्य पूँजी है। अपने सविचारों की नींव पर ही आज मानव ने अपनी श्रेष्ठता की स्थापना की है और मानव-सभ्यता का विशाल महल खड़ा किया है। यही कारण है कि विचारशील मनुष्य के पास जब सविचारों का अभाव रहता है तो उसका वह शून्य मानस कुविचारों से ग्रस्त होकर एक प्रकार से शैतान के वशीभूत हो जाता है। मानवी बुधि जब सद्भावों से प्रेरित होकर कल्याणकारी योजनाओं में प्रवृत्त रहती है तो उसकी सदाशयता का कोई अंत नहीं होता, किंतु जब वहाँ कुविचार अपना घर बना लेते हैं तो उसकी पाशविक प्रवृत्तियाँ उस पर हावी हो उठती हैं। हिंसा और पापाचार का दानवी साम्राज्य इस बात का द्योतक है कि मानव की विचार-शक्ति, जो उसे पशु बनने से रोकती है, उसका साथ देती है।
प्रश्न
(क) मानव जाति को महत्त्व देने में किसका योगदान है?
(i) शारीरिक शक्ति का
(ii) परिश्रम और उत्साह का
(iii) विवेक और विचारों का
(iv) मानव सभ्यता का

(ख) विचारों की पूँजी में शामिल नहीं है
(i) उत्साह
(ii) विवेक
(iii) तर्क
(iv) बुधि

(ग) मानव में पाशविक प्रवृत्तियाँ क्यों जागृत होती हैं?
(i) हिंसाबुधि के कारण
(ii) असत्य बोलने के कारण
(iii) कुविचारों के कारण
(iv) स्वार्थ के कारण

(घ) “मनुष्य के पास बुधि है, विवेक है, तर्कशक्ति है’ रचना की दृष्टि से उपर्युक्त वाक्य है
(i) सरल
(ii) संयुक्त
(iii) मिश्र
(iv) जटिल

(ङ) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है
(i) मनुष्य का गुरु
(ii) विवेक शक्ति
(iii) दानवी शक्ति
(iv) पाशविक प्रवृत्ति
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कार्य का महत्त्व और उसकी सुंदरता उसके समय पर संपादित किए जाने पर ही है। अत्यंत सुघड़ता से किया हुआ कार्य भी यदि आवश्यकता के पूर्व न पूरा हो सके तो उसका किया जाना निष्फले ही होगा। चिड़ियों द्वारा खेत चुग लिए जाने पर यदि रखवाला उसकी सुरक्षा की व्यवस्था करे तो सर्वत्र उपहास का पात्र ही बनेगा।

उसके देर से किए गए उद्यम का कोई मूल्य नहीं होगा। श्रम का गौरव तभी है जब उसका लाभ किसी को मिल सके। इसी कारण यदि बादलों द्वारा बरसाया गया जल कृषक की फ़सल को फलने-फूलने में मदद नहीं कर सकता तो उसका बरसना व्यर्थ ही है। अवसर का सदुपयोग न करने वाले व्यक्ति को इसी कारण पश्चाताप करना पड़ता है।
प्रश्न
(क) जीवन में समय का महत्त्व क्यों है?
(i) समय काम के लिए प्रेरणा देता है।
(ii) समय की परवाह लोग नहीं करते।
(iii) समय पर किया गया काम सफल होता है।
(iv) समय बड़ा ही बलवान है।

(ख) खेत का रखवाला उपहास का पात्र क्यों बनता है?
(i) खेत में पौधे नहीं उगते।
(ii) समय पर खेत की रखवाली नहीं करता।
(iii) चिड़ियों का इंतजार करता रहता है।
(iv) खेत पर मौजूद नहीं रहता।।

(ग) चिड़ियों द्वारा खेत चुग लिए जाने पर यदि रखवाला उसकी सुरक्षा की व्यवस्था करे तो सर्वत्र उपहास का पात्र ही बनेगा। इस पदबंध का प्रकार होगा
(i) संज्ञा
(ii) सर्वनाम
(iii) क्रिया
(iv) क्रियाविशेषण

(घ) बादल का बरसना व्यर्थ है, यदि
(i) गरमी शांत न हो।
(ii) फ़सल को लाभ न पहुँचे
(iii) किसान प्रसन्न न हो
(iv) नदी-तालाब न भर जाएँ

(ङ) गद्यांश का मुख्य भाव क्या है?
(i) बादल का बरसना
(ii) चिड़ियों द्वारा खेत का चुगना
(iii) किसान का पछतावा करना
(iv) समय का सदुपयोग
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संघर्ष के मार्ग में अकेला ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छा शक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय है – प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था – तुम्हें जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने को अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों को निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्ष रूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओं रूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।
प्रश्न
(क) मनुष्य को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं
(i) निर्भीकता, साहस, परिश्रम
(ii) परिश्रम, लगन, आत्मविश्वास
(iii) साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम
(iv) परिश्रम, दृढ़ इच्छा शक्ति व लगन

(ख) प्रत्येक समस्या अपने साथ लेकर आती है–
(i) संघर्ष
(ii) कठिनाइयाँ
(iii) चुनौतियाँ
(iv) सुखद परिणाम

(ग) समस्त ग्रंथों और अनुभवों का निष्कर्ष है
(i) संघर्ष से डरना या विमुख होना अहितकर है।
(ii) मानव-धर्म के प्रतिकूल है।
(iii) अपने विकास को बाधित करना है।
(iv) उपर्युक्त सभी

(घ) ‘मानवीय’ शब्द में मूल शब्द और प्रत्यय है
(i) मानवी + य
(ii) मानव + ईय
(iii) मानव + नीय
(iv) मानव + इय

(ङ) संघर्ष रूपी विजय रथ पर चढ़ने के लिए आवश्यक है
(i) दृढ़ संकल्प, निडरता और धैर्य
(ii) दृढ़ संकल्प, उत्साह एवं साहस
(iii) दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और साहस
(iv) दृढ़ संकल्प, उत्तम चरित्र एवं साहस
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ओ महमूदा मेरी दिल जिगरी
तेरे साथ मैं भी छत पर खड़ी हूँ
तुम्हारी रसोई तुम्हारी बैठक और गाय-घर में पानी घुस आया
उसमें तैर रहा है घर का सामान
तेरे बाहर के बाग का सेब का दरख्त
टूट कर पानी के साथ बह रहा है।
अगले साल इसमें पहली बार सेब लगने थे
तेरी बल खाकर जाती कश्मीरी कढ़ाई वाली चप्पल
हुसैन की पेशावरी जूती
बह रहे हैं गंदले पानी के साथ
तेरी ढलवाँ छत पर बैठा है।
घर के पिंजरे का तोता
वह फिर पिंजरे में आना चाहता है।
महमूदा मेरी बहन
इसी पानी में बह रही है तेरी लाडली गऊ
इसका बछड़ा पता नहीं कहाँ है।
तेरी गऊ के दूध भरे थन ।
अकड़ कर लोहा हो गए हैं।
जम गया है दूध
सब तरफ पानी ही पानी
पूरा शहर डल झील हो गया है।
महमूदा, मेरी महमूदा
मैं तेरे साथ खड़ी हूँ।
मुझे यकीन है छत पर जरूर
कोई पानी की बोतल गिरेगी
कोई खाने का सामान या दूध की थैली
मैं कुरबान उन बच्चों की माँओं पर
जो बाढ़ में से निकलकर ।
बच्चों की तरह पीड़ितों को
सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही हैं।
महमूदा हम दोनों फिर खड़े होंगे
मैं तुम्हारी कमलिनी अपनी धरती पर…
उसे चूम लेंगे अपने सूखे होठों से
पानी की इसे तबाही से फिर निकल आएगा
मेरा चाँद जैसा जम्मू
मेरा फूल जैसा कश्मीर।

प्रश्न:
(क) घर में पानी घुसने का कारण है
(i) नल और नाली की खराबी
(ii) बाँध का टूटना
(iii) प्राकृतिक आपदा
(iv) नदी में रुकावट
(ख) महमूदा की बहन को विश्वास नहीं है
(i) छत पर पानी की बोतल गिरेगी
(ii) कुछ खाने-पीने की सहायता पहुँचेगी
(iii) कोई हैलीकॉप्टर उन्हें बचाने छत पर आएगा
(iv) इस मुसीबत से निकल जाएँगे
(ग) “मेरा चाँद जैसा जम्मू
मेरा फूल जैसा कश्मीर’ का भावार्थ है
(i) जम्मू और कश्मीर में फिर से चाँद दिखने लगेगा,
(ii) जम्मू और कश्मीर का सौंदर्य वापिस लौटेगा,
(iii) जम्मू और कश्मीर स्वर्ग है,
(iv) जम्मू और कश्मीर चाँद और फूल जैसा सुंदर है,
(घ) कवयित्री माताओं पर क्यों न्यौछावर होना चाहती है?
(i) दूसरों को बचाने के कार्य में जुटी हैं।।
(ii) बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही हैं।
(iii) स्वयं भूखी रहकर बच्चों की देखभाल करती हैं।
(iv) रसद पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।
(ङ) पूरा शहर डल झील जैसा लग रहा है, क्योंकि
(i) डल झील का फैलाव बढ़ गया है।
(ii) पूरे शहर में पानी भर गया है।
(iii) पूरे शहर में शिकारे चलने लगे हैं।
(iv) झील में नगर का प्रतिबिंब झलक रहा है।
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हम दीवानों की क्या हस्ती,
हैं आज यहाँ कल वहाँ चले।
मस्ती का आलम साथ चला,
हम धूल उड़ाते जहाँ चले।
सब कहते की रह गए, अरे।
तुम कैसे आए, कहाँ चले?
आए बनकर उल्लास अभी,
आँसू बनकर बह चले अभी।

प्रश्न
(क) दीवानों की सबसे बड़ी विशेषता है(i) दीवाने एक बड़ी हस्ती हैं।
(ii) आँसू बहाते रहते हैं।
(iii) एक स्थान पर नहीं रहते।
(iv) किसी के साथ नहीं रहते।

(ख) दीवाने किस रूप में आते हैं?
(i) उल्लास बनकर
(ii) आँसू बनकर
(iii) धूल उड़ाते हुए
(iv) मस्ती के साथ

(ग) वे किस रूप में जाते हैं?
(i) धूल उड़ाते हुए
(ii) आँसू के रूप में बहकर
(iii) खुशियाँ छोड़कर
(iv) अनजान बनकर

(घ) दीवाने किसे कहा गया है?
(i) मनुष्य
(ii) यायावर
(iii) बादल
(iv) लेखक

(ङ) धूल उड़ाते हुए चलने से क्या तात्पर्य है?
(i) मिट्टी उड़ाना
(ii) दुनिया की परवाह न करना
(iii) कच्चे रास्तों पर चलना
(iv) सँभलकर न चलना।
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मैंने देखा
एक बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है।
उसके नीचे कुछ छोटे-छोटे पौधे
असंतुष्ट और “रुष्ट
देखकर मुझको यों बोले हम भी कितने बदकिस्मत हैं ।।
जो खतरों को नहीं सामना करते
वे कैसे ऊपर को उठ सकते हैं।
इसी बड़े की छाया ने ही
हमको बौना बना रखा
हम बड़े दुखी हैं।”
प्रश्न
(क) इस कविता में बरगद प्रतीक है
(i) बूढ़े व्यक्ति का
(ii) बड़े-बुजुर्गों का
(iii) पुरानी परंपराओं
(iv) रूढ़ियों का

(ख) ‘छोटे-छोटे पौधे’ प्रतीक हैं
(i) छोटे बच्चों का
(ii) नवजात शिशु का
(iii) नई पीढ़ी को
(iv) नई परंपराओं का

(ग) दूसरे अंश में छोटे-छोटे पौधे असंतुष्ट और रुष्ट हैं, क्योंकि
(i) वे बरगद को अपना दुश्मन मानते हैं।
(ii) वे बरगद को खतरनाक मानते हैं।
(iii) उन्हें बरगद से कोई लगाव नहीं है।
(iv) वे बरगद की छाया को अपने विकास में बाधा मानते हैं।

(घ) इनमें कौन-सा विशेषण नहीं है?
(i) छोटे-छोटे
(ii) असंतुष्ट
(iii) रुष्ट
(iv) छाया

(ङ) छोटे पौधे कैसी जीवन बिता रहे हैं?
(i) दुखी
(ii) प्रसन्न
(iii) सुखी
(iv) खतरों से पूर्ण
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मैंने देखा
एक बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है।
उसके नीचे
कुछ छोटे-छोटे पौधे ।
बड़े सुशील विनम्र
देखकर मुझको यों बोले
हम भी कितने खुशकिस्मत हैं।
जो खतरों को नहीं सामना करते।
आसमान से पानी बरसे, आगी बरसे
आँधी गरजे
हमको कोई फ़िक्र नहीं है।
एक बड़े की वरद छत्रछाया के नीचे
हम अपने दिन बिता रहे हैं।
बड़े सुखी हैं।
प्रश्न
(क) इस कविता में ‘बरगद’ किसका प्रतीक है?
(i) रक्षक का
(ii) अभिभावक का
(iii) दयालु व्यक्ति का
(iv) हितचिंतक का

(ख) इनमें कौन-सा शब्द विशेषण नहीं है?
(i) छोटे-छोटे
(ii) छत्रछाया
(iii) विनम्र
(iv) सुशील

(ग) ‘आँधी गरजे’ से क्या तात्पर्य है?
(i) प्रसन्नता
(ii) खुशकिस्मत
(iii) मुसीबतें
(iv) वरद छत्रछाया

(घ) छोटे पौधे कैसा जीवन बिता रहे हैं?
(i) सुंदर और सुशील
(ii) कठिन
(iii) सुखी
(iv) खतरों से पूर्ण

(ङ) बरगद के पेड़ की क्या विशेषता होती है?
(i) बहुत छोटा होता है।
(ii) सदा पवित्रहीन होता है।
(iii) बहुत विशाल होता है।
(iv) बहुत कठोर होता है।
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अभी न होगा मेरा अंत
अभी-अभी ही तो आया है।
मेरे वन में मृदुल वसंत, अभी न होगा मेरा अंत।
हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात।
मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूंगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर
पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लँगा मैं,
अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूंगा मैं,
द्वार दिखा दूंगा फिर उनको,
हैं मेरे वे जहाँ अनंत
अभी न होगा मेरा अंत।
प्रश्न
(क) कवि क्यों कहता है, अभी न होगा मेरा अंत’?
(i) अधिक जीना चाहता है।
(ii) जीवन के वसंत को भोगना चाहता है।
(iii) रचनाओं से अमर हो जाना चाहता है।
(iv) मीठे सपनों में खो जाना चाहता है।

(ख) जीने की चाह के पीछे कवि का मंतव्य है कि वह
(i) नए-नए पादपों की कलियाँ निहारेगा
(ii) जीवन रूपी वन में वसंत को सजाएगा
(iii) पौधों को सींचकर फूल खिलाएगा
(iv) जीवन भर वसंत में लीन रहेगा

(ग) फूलों से कवि आलस क्यों खींच लेना चाहता है?
(i) उन्हें सुगंधित करने के लिए।
(ii) उन्हें नया जीवन देने के लिए
(iii) उन्हें सहर्ष भेंट करने के लिए
(iv) उन्हें अमृत देने के लिए

(घ) कवि के अनुसार ‘कोमल गात’ हैं
(i) डालियाँ
(ii) कलियाँ
(iii) पत्तियाँ
(iv) लताएँ

(ङ) सोई कलियों को कवि कैसे जगाना चाहता है?
(i) कोमल हाथों के स्पर्श से
(ii) नवजीवन का संदेश देकर
(iii) वसंती हवा के झोंकों से
(iv) भौंरों के गुनगुनाने से
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अपने क्षेत्र में बढ़ती अपराधवृत्ति तथा चोरियों की घटनाओं के बारे में क्षेत्र के थाना अध्यक्ष को पत्र लिखिए।
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अपने विद्यालय की वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र लिखिए।
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प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए जिसमें पुस्तकालय में कुछ और हिंदी पत्रिकाएँ मँगवाने के लिए निवेदन किया गया हो।
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अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए।
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