अधोगामी एवं उच्चगामी सम्प्रेषण में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित बतलाये जा सकते हैं-
स्रोत-अधोगामी सम्प्रेषण का स्रोत उच्च अधिकारी होते हैं जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण का स्रोत अधीनस्थ होते हैं।
प्रवाह की दिशा-अधोगामी सम्प्रेषण का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर होता है, जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है।
प्रकृति-अधोगामी सम्प्रेषण आदेशात्मक प्रकृति का अधिक होता है, जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण सुझावात्मक या प्रतिवेदन की प्रकृति का होता है।
माध्यम-अधोगामी सम्प्रेषण का माध्यम लिखित होता है, जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण का माध्यम मौखिक अधिक होता है।
प्रभाव-अधोगामी सम्प्रेषण का प्रभाव गम्भीर होता है।
अधीनस्थ प्रायः इनको गम्भीर रूप से लेते हैं तथा उनके अनुसार कार्य करते हैं, जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है।
उत्तरदायित्व-अधोगामी सम्प्रेषण में सन्देश देने का दायित्व उच्च अधिकारियों का होता है, जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण में सन्देश देने का दायित्व अधीनस्थ कर्मचारियों का होता है।
मानना-अधोगामी सम्प्रेषण में दिये गये आदेश अथवा निर्देश को मानना अनिवार्य होता है, जबकि उच्चगामी सम्प्रेषण में दी गई सूचना या सुझाव को मानना अनिवार्य नहीं है।