चिंताजनक जनसंख्या-वद्धि-11 मई, 2000 को पटना के पी० एम० सी० एच० में अपर्णा नामक शिशु ने जन्म लिया। अनुमान के अनुसार यह भारत का एक अरबवाँ शिशु था। उसके जन्म के साथ भारत के माथे पर चिंता की रेखा और अधिक गहरी हो गई। यद्यपि जनसंख्या वृद्धि पूरे विश्व में हो रही है, किंतु भारत के लिए तो यह वृद्धि परमाणु-विस्फोट से भी अधिक बढ़कर है। 11 मई, 2006 आते-आते 9 करोड़ आबादी और बढ़ चुकी है।
भारत की आबादी विश्व की कुल आबादी का 16 प्रतिशत है। परंतु उसके पास विश्व की कुल भूमि का केवल 2 प्रतिशत ही है। इस कारण भारत की भूमि पर जनसंख्या का घनत्व बढ़ गया है। यहाँ साधन और सुविधाएँ तो सीमित हैं, लेकिन खाने वाले निरंतर बढ़ रहे हैं। रोज-रोज बढ़ने वाली यह भीड़ भारत के लिए चिंताजनक बनती जा रही है।
कारण भारत में जनसंख्या बढ़ने का प्रमुख कारण है-मृत्यु-दर में कमी। जन्म-दर पर नियंत्रण न रख पाना दूसरा बड़ा कारण है। यद्यपि भारत ने सबसे पहले परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाए, फिर भी जन्म-दर की गति को प्रभावी ढंग से रोका नहीं जा सका। यहाँ की जनता अंधविश्वासी है, गरीब और अनपढ़ है। इस कारण वह जनसंख्या घटाने का महत्त्व नहीं समझती।
हानियाँ जनसंख्या-दबाव के कारण बेरोजगारों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इस कारण अपराध बढ़ रहे हैं। यद्यपि देश में प्रगति हो रही है। नए स्कूल, अस्पताल, कार्यालय खुल रहे हैं, परंतु जनसंख्या की बाढ़ में सब व्यवस्थाएँ धरी-की-धरी रह जाती हैं। परिणामस्वरूप आज भारत एक भीड़ में बदल गया है। आज सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कहीं लोग मेलों में दबकर मर रहे हैं तो कहीं भागदौड़ में।
उपाय जनसंख्या पर नियंत्रण पाना आज भारत की प्रमुखतम चुनौती बन चुकी है। इसके लिए आवश्यक है शिक्षा का प्रसार, सीमित परिवार के महत्त्व का ज्ञान तथा गर्भ-निरोधक उपायों का और अधिक प्रचलन। सरकार इस दिशा में अग्रसर है, किंतु समाज के सहयोग के बिना ये काम संभव नहीं हैं।