पर्यटन का अर्थ- पर्यटन का अर्थ है-चारों ओर घूमना। निरुद्देश्य घूमना। आनंद के लिए घूमना। इसलिए पर्यटन स्वयं में पूर्ण आनंद है। घूमने वाला प्राणी संसार की अनेक चिंताओं से दूर रहता है। वह संग्रह करने के अवगुण से दूर रहता है। पर्यटन और संग्रह शत्रु हैं। जब तक मनुष्य घुमंतू था, तब तक वह संग्रह से दूर रहता था। इसलिए उसके जीवन में आनंद था, मस्ती थी, निश्चितता थी। उसे खोने का भय नहीं था।
विकास का सूत्रधार- परम घुमक्कड़ राहुल सांकृत्यायन कहते हैं – आज तक संसार का जितना भी विकास हुआ है, वह घुमक्कड़ों की कृपा से हुआ है। जितने भी धर्म विकसित हुए हैं, घुमक्कड़ों की कृपा से विकसित हुए हैं। कोलंबस और वास्को-डि-गामा ने पर्यटन से ही भारत और अमेरिका की खोज की। आज भी सबसे अधिक धनी व्यक्तियों का कारोबार पूरे विश्व में फैला हुआ है।
पर्यटन-एक उद्योग- आज पर्यटन एक उद्योग बन चुका है। भारत में अनेक पर्यटन-स्थल हैं। काश्मीर, कुल्लू-मनाली, मसूरी, नैनीताल, ऊटी जैसी मनोरम पहाड़ियाँ हर वर्ष लाखों पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। हरिद्वार, मथुरा, द्वारिका, वैष्णो देवी, अजमेर शरीफ, कन्याकुमारी, कांचीपुरम, इलाहाबाद जैसे धार्मिक स्थलों पर भी लाखों-करोड़ों पर्यटक हर वर्ष घूमने जाते हैं। काश्मीर, हिमाचल और आसाम में पर्यटन उद्योग ही वहाँ की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। ।
पर्यटन के लाभ- पर्यटन से मनुष्य को अनेक लाभ होते हैं। पर्यटक विश्व की अनेक संस्कृतियों के संपर्क में आता है। इससे वह सबकी खूबियों से परिचित होता है। उसकी दृष्टि विशाल बनती है। पर्यटन से विश्व में आपसी भाईचारा बनता है। ‘वसुधैवकुटुंबकम्’ का नारा तभी सार्थक होता है, जब विश्व-भर के लोग एक-दूसरे को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। यह केवल पर्यटन से ही संभव है।
पर्यटन-एक शौक- आज पर्यटन मनोरंजन का साधन बनता जा रहा है। आम लोग भी पर्यटन पर अपनी आय का कुछ भाग व्यय करने लगे हैं। पर्यटन सच में मानव को दैनंदिन की चिंताओं से दूर करके मुक्त करता हैं यह मानव-मुक्ति का अच्छा साधन है।