Question
किसी मैच काआँखों देखा वर्णन

Answer

टीमों का मैदान में आना – पिछले दिनों मुझे डी.सी.एम. और मोहन बागान के मध्य हो रहे फुटबाल मैच को देखने का मौका मिला। निश्चित समय से पाँच मिनट पहले दोनों टीमें पूरी सज-धज के साथ पंक्तिबद्ध होकर मैदान में उतरीं। डी.सी.एम. की टीम ने हरी शर्ट और सफेद नेकर पहनी थी और मोहन बागान लाल कमीज तथा पीली नेकरों में थी। दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। औ
मैच का संघर्षपूण अरंभ :
ठीक पाँच बजे निर्णायक ने लंबी सीटी बजाई। निर्णायक ने गेंद को मध्यरेखा के पास ऊपर उछाला और मैच प्रारंभ हो गया। खेल के शुरू में ही गति आ गई। डी.सी.एम. के खिलाड़ियों ने गेंद संभाली। लंबे पास देते हुए वे चार ही पासों में मोहन बागान दल की डी में पहुंच गए। अगले ही क्षण उन्होंने डी.सी.एम. के गोल पर धावा बोल दिया। वहाँ के क्षेत्ररक्षकों ने खूब हाथ-पाँव मारे किंतु बागान के भट्टाचार्य और वासुदेवन ऐसे कुशल खिलाड़ी थे कि उन्होंने फुटबाल को अपने नियंत्रण से छिनने नहीं दिया। वासुदेवन ने गोल के अंदर किक मारी। किक सटीक थी। गोल होने ही वाला था कि गोलची के हाथ के धक्के से गेंद उछलकर गोल के ऊपर से निकल गई। इस प्रकार बागान दल का वह सुंदर आक्रमण गोलची के कुशल रक्षण से निष्फल हो गया।
दसरे दल का आक्रमणगाल : गोलची ने फुटबाल को किक लगाई, जो आकाश को छूती हुई-सी. सीधे आक्रामक खिलाड़ी कुटप्पन के पास जा पहुंची। बागान के गोल में कुटप्पन को तीन खिलाड़ी घेरे हुए थे। जल्दी में कुटप्पन ने निशाना दागा, जो कि बागान के खिलाड़ी द्वारा बाधित होकर व्यर्थ कर दिया गया। अत: बिना किसी गोल के मध्यांतर हो गया।
डी.सी.एम. के दो गोल- मध्यांतर के उपरांत दोनों दलों के गोल परस्पर बदल गए। खेल प्रारंभ होते ही डी.सी.एम. के कुटप्पन, महेंद्र और अशोक की तिकड़ी ने वह धावा बोला कि बागान का गोलची घबरा उठा। महेंद्र की सधी हुई किक से गोल. होने. ही वाला था कि चटर्जी ने उसे गलत ढंग से रोका। परिणामस्वरूप उन्हें पैनल्टी किक मिली, जिसे कुटप्पन ने अपने सधे हुए निशाने से गोल में बदल दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से स्टेडियम गूंज उठा। फुटबाल फिर मध्य में उछाली गई। अब की बार फिर डी.सी.एम. के खिलाड़ी आक्रमण पर थे। क्षेत्र-रक्षकों ने उन्हें रोका किंतु उनकी बिजली-सी गति को वे रोक नहीं पाए और अशोक ने एक और गोल कर दिया। यह फील्ड गोल था।
रोमांचक अंत-दो गोल खाने के बाद बागान के खिलाड़ियों का मानो पौरुष जाग उठा। वे फुटबाल पर बुरी तरह पिल पड़े। उधर डी.सी.एम. ने रक्षक नीति अपनाई। मैच समाप्त होने से पाँच मिनट पहले बागान ने एक गोल उतार दिया। मैच में पुनः रंग आ गया। दर्शकों की धड़कनें .. अति तीव्र हो गईं। बागान के खिलाड़ियों ने जान लगा दी परंतु उन्हें 2-1 से हारकर संतोष करना पड़ा।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free