भारत तथा विश्व-भारत एशिया महाद्वीप के पूर्व और पश्चिम के मध्य में स्थित है। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर है। हिन्द महासागर पश्चिमी यूरोपीय देशों तथा पूर्वी एशियाई देशों को मिलाता है। इससे भारत यहाँ केन्द्रीय स्थिति में आ जाता है। हिन्द महासागर में किसी भी देश की तटीय सीमा भारत जैसी नहीं है।
भारत की स्थिति के सन्दर्भ में विश्व के देशों के साथ इसके सम्पर्कों का वर्णन निम्न बिन्दुओं में किया जा सकता-
दक्षिण का पठार हिन्द महासागर में शीर्षवत् फैला हुआ है और पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों के साथ-साथ पूर्वी एशिया के देशों से भी पूर्वी तट के माध्यम से निकटतम सम्बन्ध बनाये हुए है।
विश्व के देशों के साथ भारत के सम्पर्क युगों पुराने हैं, किन्तु ये सम्बन्ध समुद्री जलमार्गों की अपेक्षा भूभागों से होकर अधिक पुराने हैं।
उत्तर में पर्वतीय दरों से अनेक यात्री प्राचीन काल में भारत आये। इन मार्गों से प्राचीन समय से विचारों और वस्तुओं का आदान-प्रदान होता रहा है।
भारत का पश्चिम-मध्य और पूर्वी एशिया तथा दक्षिणी एशिया के पड़ोसी देशों के साथ एक अलग तरह का सामाजिक, सांस्कृतिक तथा व्यापारिक सम्पर्क रहा है।
भारत के उपनिषदों के विचार, रामायण तथा पंचतंत्र की कहानियाँ, भारतीय अंक एवं दशमलव प्रणाली, बौद्ध धर्म आदि संसार के विभिन्न भागों तक पहुँचे।
भारत के विभिन्न देशों से व्यापारिक सम्बन्ध भी थे। भारत से मसाले, मलमल आदि कपड़े तथा व्यापार के अन्य सामानों का विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता था।
विभिन्न संस्कृतियों से सम्पर्क के कारण यूनानी स्थापत्य कला तथा पश्चिमी एशिया की वास्तुकला का भारत पर प्रभाव पड़ा। देश के अनेक भागों में मीनारों तथा गुंबदों वाली इमारतों का निर्माण हुआ।
इस प्रकार भारत के विश्व के अनेक देशों के साथ महत्वपूर्ण सम्बन्ध रहे हैं।