Question
भारतवर्ष में प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति होती है

Answer

स्वप्रयत्न

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एक नियत लम्बाई के तार से बनाई गयी एक फेरे की कुण्डली में धारा प्रवाहित करने पर इसके केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र $B$ है। यदि उसी तार से दो फेरों की कुंडली बनायी जाये तथा उतनी ही धारा प्रवाहित की जाये, तो कुण्डली के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र होगा:
तीन कण जिसमें प्रत्येक का द्रव्यमान $m$ ग्राम है, $\ell$ सेमी. भुजा वाले एक समबाहु त्रिभुज $ABC$ के तीन शिर्षों पर स्थित हैं (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है)। $ABC$ समतल में $AB$ की लम्बवत रेखा $AX$ के परितः निकाय का जड़त्व आघूर्ण ग्राम-सेमी ${ }^2$ में होगा:-

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था स्थिति में उर्जा $-13.6 eV$ है। $He ^{+}$आयन की प्रथम उत्तेजित अवस्था में उर्जा होगी
दो कारें द्रव्यमान $m$ तथा $4 m$ की है। ये $r$ तथा $2 r$ त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर घूमती है। यदि ये एक ही समय में एक चक्कर पूरा लगा लेती हो तो पहली तथा दूसरी की घूर्णन गति का अनुपात होगा:
धातु का ताप बढ़ाने से उसका प्रतिरोध बढ़ता है, क्योंकि
समविभव पृष्ठ वह है-
$I = I _0 \cos ^2 \theta$ प्रदर्शित करता है-
प्रकाश-वैद्युत सेल निम्नलिखित में से किस सिद्धान्त पर आधारित है?
प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक $\sqrt{3}$ है। न्यूनतम विचलन कोण का मान होगा :
तीन संधारित्रों में से प्रत्येक की धारिता $C$ और विभंग वोल्टता $V$ है। इन्हें श्रृंखला बद्ध जोड़ा गया है। इस संयोजन के लिये धारिता और विभंग वोल्टता के मान होंगे $:-$