बिहार शुद्ध रूप से एक कृषिप्रधान राज्य है। कृषि यहाँ के लोगों की जीविका का मुख्य आधार है। यहाँ की 80% आबादी कृषि पर निर्भर करती है। परन्तु, इसके बावजूद बिहार की कृषि अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ी हुई है। यहाँ की कृषि की कई समस्याएँ उजागर हुई हैं, जो निम्नांकित हैं-
(i) खेतों का छोटा आकार खेतों का छोटा आकार होने के कारण यहाँ वैज्ञानिक तरीकों से खेती नहीं हो पाती है।
(ii) किसानों में रूढ़िवादिता यहाँ किसान परिश्रम पर कम लेकिन भाग्य और रूढ़िवादिता पर अधिक भरोसा करते हैं।
(iii) घटिया बीजों का उपयोग यहाँ के किसान खेतों में घटिया बीज का उपयोग करते हैं जिसके कारण प्रति हेक्टेयर उपज कम होती है।
(iv) मिट्टी का कटाव एवं गुणवत्ता का ह्रास भारी वर्षों और बाढ़ के कारण मिट्टी का कटाव होता है, साथ ही लगातार कई वर्षों से रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी का ह्रास हो रहा है।
(v) सिंचाई की समस्या-यहाँ की कृषि मानसून पर निर्भर है। बाढ़ और सूखाड़ यहाँ की नियति है, फिर भी सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। मानसून अनियमितता से भरा पड़ा है। कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि की समस्या है। भारत की तरह बिहार की कृषि भी मानसून के साथ जुआ है।