हाइपोथैलेमस के चार कार्य-
(i) यह शरीर के ताप तथा समस्थापन (Homeostatis) का नियन्त्रण करता है।
(ii) इसमें स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के उच्च केन्द्र होते हैं, जो भूख, प्यास, नींद, भावनाओं, संतुष्टि, क्रोध, प्रसन्नता आदि पर मस्तिष्क के नियन्त्रण को दर्शाता है।
(iii) यह तन्त्रिका तन्त्र एवं अन्तःस्त्रावी तन्त्र में सम्बन्ध स्थापित करता है।
(iv) इसकी कुछ तन्त्रिका स्त्रावी कोशिकायें वेसोप्रेसिन तथा ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन का स्रावण करती हैं, जो पीयूष ग्रन्थि द्वारा रुधिर में मुक्त होते हैं।