कार्बन चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड के महत्त्व की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है-
(i) पादप अवशेषों के यौगिकों के विच्छेदन से कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।
(ii) इस गैस के उत्सर्जन का एक मुख्य स्रोत मृदा है, हालांकि कार्बन डाइऑक्साइड की अल्प मात्रा जड़ों द्वारा भी निकलती है तथा वर्षा जल द्वारा भी मृदा में लायी जाती है।
(iii) कार्बन डाइऑक्साइड प्रचुर मात्रा में मृदा से निकलकर वायुमण्डल में मिल जाती है, जहाँ पुनः पौधों द्वारा प्रयोग में ले ली जाती है। इस प्रकार यह चक्र पूर्ण होता है।
(iv) कार्बन डाइऑक्साइड की थोड़ी-सी मात्रा मृदा में जल से क्रिया करके कार्बोनिक अम्ल तथा कैल्शियम, पोटैशियम व अन्य भस्मों के कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट बनाती है।
(v) ये लवण जल में आसानी से विलेय होते हैं तथा जल निकास द्वारा नष्ट हो जाते हैं या उच्च पौधों द्वारा प्रयोग कर लिए जाते हैं।
(vi) इस प्रकार कार्बन की अल्प मात्रा पौधों के अन्दर प्रवेश कर जाती है।