साहित्यिक परिचय-भाव-पक्ष-केशवदास की रचनाओं में उनके तीन रूप मिलते हैं - आचार्य, महाकवि और इतिहासकार। आचार्य होने के कारण वह संस्कृत की शास्त्रीय पद्धति को हिन्दी में लाने के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने रीति ग्रन्थों की रचना की। केशव ने रामकथा को लेकर काव्य रचना की है। केशव के काव्य में नाटकीयता है तथा उनकी संवाद-योजना अत्यन्त सशक्त और प्रभावशाली है।
कला-पक्ष - केशव ने ब्रजभाषा में रचनाएँ की हैं। उनकी भाषा में कोमलता और स्थान पर क्लिष्टता पाई जाती है। उनको रीतिकाल का प्रवर्तक माना जाता है। उनके काव्य में शब्दों के चमत्कार पर अधिक बल दिया गया है अतः उनके काव्य में सहृदयता तथा मधुरता का अभाव है। काव्य में क्लिष्टता के कारण उनको कठिन काव्य का प्रेत' कहा जाता है। केशव के काव्य में संवाद-योजना अत्यन्त प्रभावशाली है। केशव ने अपने काव्य में विविध छन्दों का प्रयोग किया है।
कृतियाँ - 1. रामचन्द्र चन्द्रिका. (रामकथा पर आधारित महाकाव्य), रसिक प्रिया, कवि प्रिया, छन्दमाला, विज्ञान गीता, वीरसिंह देव चरित, जहाँगा जसचन्द्रिका, रतनबावनी।