कंप्यूटर और टेलीविजन का महत्त्व-कंप्यूटर और टेलीविजन आज की जीवनधारा के अनिवार्य अंग बन चुके हैं। इनके बिना सामान्य जीवन की गति नहीं हो सकती। आज अधिकतर काम कंप्यूटर या कंप्यूटर द्वारा चालित मशीनों से होने लगे हैं। रेल, जहाज, मैट्रो आदि की टिकटें, बड़े-बड़े शो-रूमों के बिल, बिजली बिल, बीमा-बैंक, स्कूल-कॉलेज सभी में कंप्यूटरों का उपयोग होने लगा है। पल भर के लिए भी कंप्यूटर रूक जाएँ तो सारी गतिविधियां ठहर जाती हैं। इसी प्रकार टेलीविजन हमारे लिए सूचना और मनोरंजन का अनिवार्य साधन बन गया है। यह हमारे मित्र की भूमिका निभाता है।
दोनों के लाभ- कंप्यूटर और टेलीविजन के लाभ अनगिनत हैं। इनकी सहायता से हमारा जीवन अत्यंत सुगम, सरल और सुविधाजनक बन गया है। अब न तो बिल भरने की लंबी-लंबी लाइनों में लगने की आवश्यकता है, न कोई फार्म खरीदने के लिए देश-विदेश जाने की। आप घर बैठे-बैठे बिल भर सकते हैं, फार्म भर सकते हैं, परीक्षा-फल देख सकते हैं, टिकटें खरीद सकते हैं। यानि सभी झंझटों से मुक्त हो सकते हैं। यदि इंटरनेट का प्रयोग करें तो विश्व-भर की सारी जानकारियाँ अपने घर में प्राप्त कर सकते हैं।
टेलीविजन के द्वारा आप विश्व-भर के सभी पर्यटन स्थलों का आनंद ले सकते हैं। आप संसार की सभी जातियों, परंपराओं, धर्मों, उत्सवों के बारे में जान सकते हैं। आपको घर बैठ-बैठे पल-पल की जानकारी मिल जाती है। न केवल आप क्रिकेट या हॉकी के मैच का आनंद उठा सकते हैं बल्कि आगामी मौसमों की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। मनोरंजन के क्षेत्र में तो इसका कोई सानी नहीं।
हानियां-हर लाभ के पिछले पन्ने पर हानियों का लंबा सिलसिला लिखा होता है। इन दोनों उपकरणों के आने से मनुष्य की गतिविधियाँ ठहर-सी गई हैं। मनुष्य प्रकृति के खुले आँगन में विचरण करने की बजाय अपने टी.वी., कंप्यूटर-रूम में कैद रहने लगा है। उसके संबंध-सरोकार सीमित हो गए हैं। इसका सीधा प्रभाव उसके स्वास्थ्य तथा सामाजिक जीवन पर पड़ा है। आज का मानव अधिक बीमार रहने लगा है। आँखों पर चश्मे, मोटे पेट, शुगर और हार्ट अटैक की बीमारियाँ अधिक फैलने लगी हैं। सामाजिक संबंध कम होने से वह सुख-दुख को बाँट नहीं पाता। . . इस कारण तनाव, अकेलापन और.अजनबीपन की समस्याएँ बढ़ने लगी हैं। व्यक्ति आत्मकेंद्रित होने लगा है। ऐसे लोगों के लिए ही जयशंकर प्रसाद ने कहा था-
अपने में सीमित कर कैसे व्यक्ति विकास करेगा?
यह एकांत स्वार्थ भीषण है, अपना नाश करेगा। ।
हानियों.से बचने के उपाय_हानियों से बचने के उपाय हानियों के भीतर ही छिपे हुए होते हैं। मनुष्य हमेशा यह ध्यान रखे कि ये उपकरण हमारे साधन हैं, साध्य नहीं। ये हमारे लिए हैं, हम इनके लिए नहीं। हमें इनकी सहायता से अपनी खुशी बढ़ानी है। अपने सामाजिक संबंध, उत्सव, उल्लास बढ़ाने हैं। इसके लिए कभी-कभी. इन पर रोक भी लगानी पड़े तो लगाएँ। संयम से ही हम इनके वरदानों को अपने जीवन में खिला सकते हैं।