प्राकृतिक सुंदरता – मेरा देश भारत संसार के देशों का सिरमौर है। यह प्रकृति की पुण्य – लीलास्थली है। माँ भारती के सिर पर हिमालय मुकुट के समान शोभायमान है। गंगा तथा यमुना . . इसके गले के हार हैं। दक्षिण में हिंदमहासागर भारत माता के चरणों को निरंतर धोता रहता है। संसार में केवल यही एक देश है जहाँ षड्ऋतुओं का आगमन होता है। गंगा, यमुना, सतलुज, व्यास, गोमती, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी अनेक नदियाँ हैं जो अपने अमृत-जल से इस देश की धरती की प्यास शांत करती हैं।
धन-संपन्नता–भारत पर प्रकृति की विशेष कृपा है। यहाँ पर खनिज पदार्थों की भरमार है। अपनी अपार संपदा के कारण ही इसे ‘सोने की चिड़िया’ की संज्ञा दी गई है। धन-संपदा के कारण ही हमारा देश विदेशी आक्रमणकारियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है।
श्रेष्ठ सभ्यता-संस्कृति–भारत की सभ्यता और संस्कृति संसार की प्राचीनतम सभ्यताओं में गिनी जाती है। मानव-संस्कृति के आदिम ग्रंथ ऋग्वेद की रचना का श्रेय इसी देश को प्राप्त है। संसार की प्रायः सभी प्राचीन संस्कृतियाँ नष्ट हो चुकी हैं परंतु भारतीय संस्कृति समय की
आँधियों और तूफानों का सामना करती हुई अब भी अपनी उच्चता और महानता का शंखनाद – कर रही है। संगीतकला, चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य कला आदि के क्षेत्र में भी हमारी उन्नति आश्चर्य में डाल देने वाली है। जिस समय संसार का एक बड़ा भाग घुमंतू जीवन बिता रहा था, हमारा देश भारत उच्चकोटि की नागरिक सभ्यता का विकास कर चुका था। सुप्रसिद्ध इतिहासज्ञ सर जॉन मार्शल लिखता है.–‘सिंधु घाटी का साधारण नागरिक सुविधाओं और विलास का जिस मात्रा में उपयोग करता था, उसकी तुलना उस समय के सभ्य संसार के दूसरे भागों से नहीं की जा सकती।’
ज्ञान में अग्रणी – हमारा प्यारा देश ‘विश्व गुरु’ रहा है। यहाँ की कला, ज्ञान-विज्ञान, ज्योतिष, आयुर्वेद संसार के प्रकाशदाता रहे हैं। यह देश ऋषि-मुनियों, धर्म-प्रवर्तकों तथा महान कवियों का देश है। त्याग हमारे देश का सदा से मूल मंत्र रहा है। जिसने त्याग किया, वही महान कहलाया। बुद्ध, महावीर, दधीचि, रंतिदेव, राजा शिवि, रामकृष्ण परमहंस, गाँधी इत्यादि महान विभूतियाँ इसका जीता-जागता प्रमाण हैं।
विविधता में एकता–भारत विविध रंगबिरंगे फूलों का गुलदस्ता है। यहाँ जाति, रंग, धर्म, मन, परंपरा, खान-पान, ऋतु, पहनावे-सबकी विविधता दिखाई देती है। उन विविधताओं में भी अद्भुत मेल है। हिंदू, मुसलमान, ईसाई बड़े प्रेम से साथ-साथ रहते हैं।
संसार का सबसे बड़ा गणतंत्र-भारत संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहाँ सभी कानून जनता को इच्छा से जनता के प्रतिनिधि बनाते हैं। सैकड़ों कमियों के बावजूद भारत का लोकतंत्र वास्तविक है। यहाँ की जनता में इकट्ठे चलने की, कदम से कदम मिलाकर काम करने की अद्भुत शक्ति है।
देश के लिए हमारा कर्तव्य – हमारे देश का इतिहास गौरवमय है। हमें इसके गौरव की रक्षा के लिए गौरवशाली कर्म करने चाहिए। तभी तो जयशंकर प्रसाद लिखते हैं-
जिएं तो सदा इसी के लिए,
यही अभिमान रहे, यह हर्ष।
निछावर कर दें हम सर्वस्व,
हमारा प्यारा भारतवर्ष।