Question
आतंकवाद

Answer

भारत में आतंकवाद भारत मूलतः शांतिप्रिय देश है। इसलिए यहाँ की धरती ने बद्ध, महावीर, गाँधी जैसे अहिंसक नेता पैदा किए हैं। आतंकवाद की प्रवृत्ति यहाँ की जमीन से मेल नहीं खाती। परंतु दुर्भाग्य से पिछले दो दशकों से भारतवर्ष आतंकवाद की लपेट में आता जा रहा है। सन् 1967 में बंगाल में नक्सलवाद का उदय हुआ।
सन् 1981 से 1991 तक भारत का पंजाब प्रांत आतंकवाद की काली छाया से घिरा रहा। तत्कालीन भ्रष्ट राजनीति और पाकिस्तान की साजिश के कारण फैला सिख-आतंकवाद हजारों निरपराधों की जान लेकर रहा।
काश्मीर में आतंकवाद पाकिस्तान जब पंजाब में हिंदू-सिख को लड़ाने में सफल न हो पाया तो उसने काश्मीर में अपनी गतिविधियाँ तेज कर दी। पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों की योजनाबद्ध घुसपैठ हुई। नौजवान युवकों को जबरदस्ती आतंक के रास्ते पर डालने के लिए घृणित हथकंडे अपनाए गए। जान-बूझकर काश्मीर में भारत-विरोधी वातावरण का निर्माण किया गया। वहाँ के अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ दिल दहलाने वाले भयंकर अत्याचार किए गए, ताकि वे काश्मीर छोड़कर अन्यत्र जा बसें और काश्मीर पर पाकिस्तान का कब्जा हो सके।
काश्मीर का आतंकवाद आज कैंसर का रूप धारण कर चुका है। पाकिस्तानी आतंकवादी कभी मुंबई में तो कभी कोलकाता में बम विस्फोट करते हैं, कभी गुजरात के अक्षरधाम में तो कभी काश्मीर की मसजिद में खून-खराबा करते हैं। 11 जुलाई, 2006 को एक साथ काश्मीर और मुंबई में हुए 13 धमाकों ने सिद्ध कर दिया कि भारत में आतंकवादी तत्त्व जड़ जमा चुके
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद – आज आतंकवाद राष्ट्र की सीमाओं को पार करके पूरे विश्व में अपना जाल फैला चुका है। ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान की भूमि पर रहकर अमेरिका के ट्विन टावरों को पल भर में भूमिसात कर दिया।
आतंकवाद फैलने के कारण आज विश्व में जो आतंकवाद फैल रहा है, उसका प्रमुख कारण है-धार्मिक कट्टरता। ओसामा बिन लादेन, तालिबान, लश्करे-तोएबा, सीरिया, पाकिस्तान, फिलीस्तीन सबके पीछे सांप्रदायिक शक्तियाँ काम कर रही हैं। आज आतंकवादी आधुनिक तकनीक का भरपूर प्रयोग करते हैं। उनके पास विध्वंस की ढेरों सामग्री है।
भारत में आतंकवाद फैलने का एक अन्य कारण है – क्षेत्रवाद और राजनीतिक स्वार्थी वोट के भूखे राजनेता जानबूझकर आतंकवाद को प्रश्रय देते हैं।
समाधान- आतंकवाद की समस्या मनुष्यों की बनाई हुई है, इसलिए आसानी से सुलझाई जा सकती है। जिस दिन अमेरिका की तरह. पूरा विश्व दृढ़ संकल्प कर लेगा और आतंकवाद को जीने-मरने का प्रश्न बना लेगा, उस दिन यह धरती आतंक से रहित हो जाएगी।

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