Question
लोकतंत्र और चुनाव

Answer

भारतीय लोकतंत्र को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। वर्ष 1952 में वयस्क मताधिकार के आधार पर देश में संपन्न हुए पहले आम चुनाव के साथ हमारे देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुरुआत हुई और क्रमशः नई सफलताओं के साथ भारतीय लोकतंत्र अब तक छह दशक से भी अधिक समय का सफ़र तय कर चुका है।

लोकतंत्र के शाब्दिक अर्थ के अनुसार यह शासन की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें सत्ता सामूहिक रूप से देश की जनता में निहित होती है। जनमत निर्माण में समाज के कमज़ोर से कमजोर व्यक्ति को आम चुनाव में स्वतंत्र रूप से भाग लेने का अधिकार होता है।

भारतीय लोकतंत्र का मूल आधार यहाँ की जनता है और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि संसद और विधान सभाओं में जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारे देश में संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद मज़बूत है जो कि स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व जैसे आदर्शों पर टिकी है। भारतीय लोकतंत्र का सबसे प्रबल पक्ष इस बात में निहित है कि जब भी सरकार जनता की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरती, तब जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करके सरकार को सत्ता से बाहर कर देती है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण वर्ष 2014 में संपन्न 16वें लोक सभा चुनाव परिणाम के रूप में देखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि 16वें लोकसभा चुनाव में 10 वर्षों से केंद्रीय सत्ता पर काबिज संप्रग सरकार को जनता ने धूल चटा दिया और एन डी ए गठबंधन को सत्ता की कमान सौंपी।

भारतीय लोकतंत्र के अनेक प्रबल पक्ष एवं विशेषताओं के होते हुए भी इसकी कुछ कमियाँ भी दिखाई पड़ती हैं। भूख, गरीबी, कुपोषण, बेरोजगारी, किसानों के आत्महत्या की घटनाएँ, महँगाई एवं भ्रष्टाचार आदि भारतीय लोकतंत्र की कमजोरी के रूप में दिखाई पड़ती है। भारतीय लोकतंत्र को हानि पहुँचाने में सांप्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद एवं भाषावाद जैसी समस्याओं ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संसद में होने वाले हंगामे और सांसदों के अमर्यादित व्यवहार ने संसदीय गरिमा का अवमूल्यन किया है, जिससे संसद की गरिमा का विगत कुछ वर्षों में ह्रास हुआ है।

किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव महापर्व का महत्त्व रखता है परंतु दुखद बात यह है कि भारत में कई चुनाव सुधारों को लागू करने बाद भी हम एक निर्दोष चुनाव प्रणाली विकसित नहीं कर पाए हैं। आज भी चुनावों में धनबल और बाहुबल का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल हो रहा है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण अक्तूबर-नवंबर 2015 में संपन्न बिहार विधान सभा चुनाव हैं।

इन सब बातों के बावजूद भारतीय चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार के लिए समय-समय पर चुनाव आयोग द्वारा महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं; जैसे-पूर्व चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन की पहल पर मतदाता पहचान पत्र जारी किए गए, चुनावों में पारदर्शित लाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ई. वी. एम.) का प्रयोग शुरू किया गया, सितंबर 2013 से ई. वी. एम. के साथ ‘वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपीएटी) प्रणाली को जोड़ दिया गया, तो वहीं None of the above-NOTA का विकल्प उपलब्ध करवाकर ‘राइट टू रिजेक्ट’ का अधिकार मतदाताओं को उपलब्ध करवाया गया।

अतः भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ-साथ एक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली विकसित करने में सफल रहा है, जिसमें उत्तरोत्तर सुधार भी हो रहे हैं, जो एक मजबूत लोकतंत्र का प्रमुख लक्षण है।

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