मुद्रा बाजार की प्रमुख विशेषताएँ-
वित्तीय बाजार का मुख्य अंग- मुद्रा बाजार वित्तीय बाजार का एक मुख्य अंग है। इसके माध्यम से व्यापारी, उद्योगपति तथा सरकार की अल्पकालीन वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है।
अत्यधिक तरलता-मुद्रा बाजार में अत्यधिक तरलता पायी जाती है।
कम व्यवहार लागत-मुद्रा बाजार में किये जाने वाले व्यवहारों के लिए प्रायः दलालों की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिये यहाँ किये जाने वाले क्रय-विक्रय पर कम खर्चे वहन करने पड़ते हैं।
अल्पकालीन वित्तीय सम्पत्तियाँ-इस बाजार में व्यवहार की जाने वाली सम्पत्तियों की अवधि अधिकतम एक वर्ष होती है।
दो स्वरूप-मुद्रा बाजार संगठित तथा असंगठित होते हैं।
संगठित मुद्रा बाजार में रिजर्व बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक तथा सहकारी बैंकों को सम्मिलित किया जाता है, जबकि असंगठित में साहूकार, देशी बैंकर, चिट फण्ड आदि को सम्मिलित किया जाता
सन्तुलन कार्य-मुद्रा बाजार अल्पकालीन वित्तीय पूर्ति तथा अल्पकालीन वित्तीय मांग में संतुलन स्थापित करने का कार्य करता है।
व्यवहारों में तेज गति-मुद्रा बाजार में तेज गति से व्यवहार होते हैं