MCQ
नाभिक की द्रव्यमान संख्या
  • A
    सदैव परमाणु संख्या से कम होती है
  • B
    सदैव परमाणु संख्या से अधिक रहती है
  • C
    सदैव परमाणु संख्या के समान होती है
  • D
    कभी परमाणु संख्या से अधिक, कभी समान होती है

Answer

स्वप्रयत्न

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दो सर्वसम $($एक से$)$ लम्बे चालक तार $AOB$ तथा $\operatorname{COD}$ एक-दूसरे के ऊपर, आपस में लम्बवत् रखे गये हैं, और $O$ बिन्दु पर एक दूसरे को काटते हैं तथा इनसे $Øe' Ю$न तथा $I _2$ धारा प्रवाहित हो रही है। बिन्दु $O$ से $d$ दूरी पर, दोनों तारों के तल के लम्बवत् दिशा के अनुदिश किसी बिन्दु $P$ पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा
$M$ द्रव्यमान का एक कण समान द्रव्यमान तथा $a$ त्रिज्या के गोलीय कोश के केन्द्र पर स्थित है। केन्द्र से $\frac{a}{2}$ डूी वा स्थित किसी बिन्दु पर गुरुत्वीय विभव होगा
प्रिज्म के किसी अपवर्तक पृप्ठ पर किसी प्रकाश किरण के लिए आपतन कोण का मान $45^{\circ}$ है। प्रिज्म कोण का मान $60^{\circ}$ है। यदि यड किरण प्रिज्म से न्यूनतम विचतित होती है, तो न्यूनतम विचलन कोण तथा प्रिज्म के प्रदार्थ का अपवर्त्तनांक क्रमश: हैः
ट्रान्सफॉर्मर के प्राथमिक तथा द्वितीय कुण्डली में लपेटों की संख्या क्रमशः 1000 तथा 3000 है। यदि 80 वोल्ट के a-c-प्राथमिक कुण्डली में आरोपित किया जाता है तो द्वितीयक कुण्डली के प्रति फेरों में विभवांतर होगा -
वे परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक समान लाकन द्रव्यमान संख्या भिन्न होते हैं, कहलाते हैं-
जब p-n संधि पर अग्रदिशिक बायस अनुप्रयुक्त किया जाता है, तब यह
समान त्रिज्याओं के दो गोलाकार चालकों B एवं C पर आवेश की मात्रा समान है तथा उन्हें एक- दूसरे से कुछ दूर रखने पर उनके बीच लगने वाला प्रतिकर्षण बल F है। उतनी ही त्रिज्या वाले एक अन्य अनावेशित चालक का संपर्क पहले B से कराते हैं और फिर C से संपर्क कराकर उसे हटा दिया जाता है। B तथा C के बीच लगने वाला बल अब कितना होगा
दो सरल आवृत्तगति एक दूसरे के लम्बवत् है अर्थात् एक $x - $ अक्ष में तथा दूसरा $y-$ अक्ष में है। यदि दोनों का आयाम समान तथा कलान्तर $\pi / 2$ हो तो पथ होगा $-$
बिन्दु $( x , y , z )$ पर वैद्युत विभव : $V =- x ^2 y - xz ^3+4$ है। इस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{ E }$ होगा:-
$R$ त्रिज्या और $M$ द्रव्यमान वाला एक ड्रम बिना फिसले $\theta$ कोण वाले नत समतल पर लुढ़कता है। घर्षण बल