नेतृत्व का महत्त्व
यह सर्वविदित सत्य है कि संगठन की सफलता तथा असफलता के बीच अन्तर नेतृत्व का ही होता है। प्रसिद्ध प्रबन्ध परामर्शक ने लिखा है कि प्रबन्धक महत्त्वपूर्ण है, परन्तु नेता संगठन की निरन्तर सफलता के लिए अनिवार्य हैं। एक नेता न केवल अपने अनुयायियों को सांगठनिक लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध करता है बल्कि उसके लिए आवश्यक संसाधन भी एकत्रित करता है, उन्हें मार्गदर्शन देता है तथा अपने अधीनस्थों को उद्देश्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। संक्षेप में, नेतृत्व के महत्त्व को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-
1. अनुयायियों (कर्मचारियों) के व्यवहार को प्रभावित करना-नेतृत्व अपने अनुयायियों या कर्मचारियों के व्यवहार को प्रभावित करता है तथा उन्हें अपनी श्रम/ ऊर्जा को संस्था के लाभ के लिए सकारात्मक रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।
2. अनुकूल कार्य वातावरण का सृजन करनानेतृत्व अपने कर्मचारियों के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध बनाये रखता है तथा उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। वह उनमें आवश्यक आत्मविश्वास पैदा करता है, सहायता/समर्थन देता है और इसके द्वारा एक अनुकूल कार्य वातावरण का सृजन करता है।
3. संस्था में आवश्यक परिवर्तन को लागू करना-नेतृत्व संस्था में आवश्यक परिवर्तन को लागू करने में मुख्य भूमिका निभाता है। वह कर्मचारियों को संस्था में किये जाने वाले परिवर्तनों के लिए तैयार करता है।
4. टकराव को निपटाना/संभालना-एक नेता संस्था में टकराव की स्थिति को प्रभावपूर्ण ढंग से निपटाता या सम्भालता है तथा उसके दुष्परिणामों को फैलने से रोकता है। एक अच्छा नेता सदैव अपने अनुयायियों को अपनी भावनाओं तथा असहमति को प्रकट करने की पूरी अनुमति देता है। उन्हें वह उपयुक्त स्पष्टीकरण द्वारा समाधान बतलाकर आश्वस्त भी करता है।
5. प्रशिक्षण देना-नेतृत्व अपने अधीनस्थों को प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाता है या देता है। एक अच्छा नेता सदैव अपना अगला नेतृत्व प्रतिनिधि तैयार करता है ताकि नेतृत्व की उत्तरदायित्व प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के सम्पन्न हो सके।
6. अभिप्रेरणा प्रदान करना-नेतृत्व कर्मचारियों की अभिप्रेरणा का स्रोत है। कुशल नेतृत्वकर्ता लोगों की इच्छाओं, भावनाओं, आवश्यकताओं को समझकर उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास करता है। फलतः संस्था के कर्मचारियों में कार्य करने की प्रेरणा उत्पन्न होती है।
7. समन्वय में सहायक-प्रभावी नेतृत्व संस्था में व्यक्तिगत प्रयासों के समन्वय में महत्त्वपूर्ण रूप से योगदान देता है। वास्तव में नेतृत्व एक समन्वयकारी शक्ति है जो व्यक्तियों को समूह में बनाये रखती है।
8. समूह भावना का विकास करना-नेतृत्व संस्था के कर्मचारियों में समूह भावना का विकास भी करता है। यह ऐसे कार्य वातावरण का निर्माण करता है जिसमें सम्मिलित सभी लोग अपने आपको उस समूह का अभिन्न अंग समझने लगते हैं।
9. समूह में निष्ठा उत्पन्न करना-कुशल नेतृत्व अपने कर्मचारियों व अनुयायियों में समूह के प्रति निष्ठा उत्पन्न करता है। इसके लिए वह उन्हें व्यक्तिगत हितों की तुलना में सामूहिक हितों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है।
10. प्रतिनिधित्व करना-नेतृत्व अपने अधीनस्थों या अनुयायियों का प्रतिनिधित्व भी करता है। वह अपने अधीनस्थों की बातों को सही रूप में उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करता है तथा उनके दृष्टिकोण से उन्हें अवगत करवाता है।
11. समय का सदुपयोग करना एक अच्छा तेm समय के सदुपयोग में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह अपने अधीनस्थों के कार्यक्रम को इस प्रकार निर्धारित करता है कि जिससे वह सभी अधीनस्थों का ही नहीं स्वयं के समय का भी सदुपयोग करता है।
12. प्रबन्धकीय प्रभावशीलता में वृद्धि-सम्पूर्ण संस्था के प्रभावकारी प्रबन्ध के लिए नेतृत्व एक प्राथमिक आवश्यकता है। प्रभावी नेतृत्व के अभाव में संस्था के संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग नहीं हो सकता।।
13. कर्मचारियों के मनोबल का निर्माण करनाकुशल नेतृत्व कर्मचारियों के मनोबल का निर्माण करता है।