नियोजन की प्रमुख सीमाएँ
1. नियोजन दृढ़ता उत्पन्न करता है-एक स्थान में एक लक्ष्य को निश्चित समय में पाने के लिए सुनियोजित योजना तैयार की जाती है। यही योजनाएँ भविष्य में कार्य करने की विधि निर्धारित करती हैं।
2. नियोजन दृढ़ता उत्पन्न करता है-संस्था में लक्ष्य को निश्चित समय में प्राप्त करने के लिए सुनियोजित योजना तैयार की जाती है। यही योजनाएँ भविष्य में कार्य करने की विधि निर्धारित करती हैं। प्रबन्धक इनमें परिवर्तन करने की स्थिति में नहीं रहते हैं। नियोजन में इस तरह की दृढ़ता परेशानी ही पैदा करती है।
3. नियोजन में भारी लागत आती है-नियोजन एक खचीली व्यवस्था है। क्योंकि नियोजन के लिए विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का संकलन एवं विश्लेषण करना पड़ता है। इसमें पर्याप्त शक्ति, समय एवं धन खर्च किया जाता है। यही कारण है कि छोटी संस्थाएँ तो धनाभाव के कारण नियोजन को अपना ही नहीं पाती हैं।
4. परिवर्तनशील वातावरण में नियोजन प्रभावी नहीं रहता-व्यावसायिक वातावरण परिवर्तनशील है। कुछ भी स्थाई नहीं है। इसमें बहुत से आयाम सम्मिलित हैं जैसे-आर्थिक, राजनैतिक, भौतिक कानूनी तथा सामाजिक आयाम।