Question
शठ सुधरहिं सत्संगति पाए।

Answer

सत्संग की महिमा अपार है। जैसे औषधि खाने से बीमार व्यक्ति स्वस्थ हो जाते हैं, टॉनिक लेने से दुर्बल व्यक्तियों में शक्ति आ जाती है, उसी प्रकार सत्संग से बुरे व्यक्ति अच्छे बन जाते हैं। सत्संग का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। उससे बुरे व्यक्ति को अपनी बुराई का बोध होता है, उससे घृणा हो जाती है और तब वह उसे छोड़ देता । है। डाकू रत्नाकर को देवर्षि नारद का सत्संग मिला तो वह महाकवि वाल्मीकि बन गया!

हत्यारे अंगुलिमाल को भगवान बुद्ध का सत्संग प्राप्त हुआ तो वह बौद्ध भिक्षु बन गया। सत्संग के प्रभाव से कितने शराबियों ने शराब छोड़ दी, कितने चोरों ने चोरी से तोबा कर ली। सत्संग ने कितनों को धूम्रपान से मुक्ति दिला दी, कितनों ने मांसाहार छोड़कर शाकाहार अपना लिया। इस प्रकार तुलसीदासजी ने ठीक ही कहा है- शठ सुधरहिं सत्संगति पाए। पारस परसि कुधातु सुहाए।

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