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विधुतचुम्बकीय तरंग का संचरण

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स्वप्रयत्न

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किसी कण का द्रव्यमान $2 kg$ है। इस कण पर $(3 \hat{i}+\hat{j})$ न्यूटन का एकसमान बल लगता है जो उसे उसकी स्थिति $(2 \hat{i}+\hat{k})$ मीटर से मीटर $(4 \hat{i}+3 \hat{j}-\hat{k})$ स्थिति में विस्थापित कर देता हैं इस बल द्वारा किया गया कार्य है:
एक चालक वृत्तीय फंद को $0.04 T$ के अचर चुम्बकीय क्षेत्र में इस तरह रखा है कि फंद का तल चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से लम्ब दिशा में है। फन्द् की त्रिज्या $2 mm / s$. की दर से घटने लगती है। जब फन्द की त्रिज्या $2 cm$ होगी तो इसमें प्रेरित वि.वा.ब. $( emf )$ का मान होगा:-
चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण है
ट्रांजिस्टर क्रिया के लिये
(1) आधार, उत्सर्जन और संग्राहक क्षेत्रों का समान आकार और समान मादन सान्द्रता होनी चाहिए।
(2) आधार क्षेत्र बहुत पतला होना और कम मादित होना चाहिये
(3) उत्सर्जक-आधार संधि अग्र बायसित और आधार संग्राहक संधि-पश्च बायसित होनी चाहिये।
(4) उत्सर्जक-आधार संधि और आधा-संग्राहक संधि दोनों ही अग्र बायसित होनी चाहिये।
1 मीटर लम्बी रस्सी के एक सिरे पर पत्थर बाँधकर उसे एक क्षैतिज वृत्त में स्थिर चाल से घुमाया जाता है। यदि पत्थर 44 सेकंड में 22 चक्कर लगाता है तो पत्थर के त्वरण का मान व इसकी दिशा क्या होगी?
प्रकाश की एक किरण समतल दप्रण पर $30^{\circ}$ आपतित होती है। इस किरण में विचलन होगा
एक इलेक्ट्रॉन सरल रेखीय पथ, $XY$ पर गतिमान है। एक कुंडली abcd इस इलेक्ट्रॉन के मार्ग के निकटवर्ती है (आरेख देखिये) तो, इस कुंडली में प्रेरित धारा (यदि कोई हो तो) की दिशा क्या होगी?

ताँबे के तार की कुण्डली व एक तार AB चित्रानुसार कागज के तल में स्थित है। तार में प्रवाहित धारा I का मान यदि बढ़ रहा हो तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा होगी-
Image
प्रकाश के तरंग गति-सिद्धान्त के अनुसार, प्रकाश के वर्ण के निर्यायक
n-प्रकार के अर्द्धचालकों में पाये जाते हैं-