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Question 15 Marks
भारत के द्वीप समूहों पर लेख लिखिए।
Answer
भारत का मुख्य स्थल भाग अत्यधिक विशाल है तथा भारत की काफी लम्बी तटीय सीमा भी है। इसके अलावा भारत के दो प्रमुख द्वीप-समूह भी हैं-लक्षद्वीप समूह तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह। इनका विस्तृत विवेचन निम्न प्रकार है- (1) लक्षद्वीप द्वीप-समूह-यह द्वीप समूह अरब सागर में स्थित है। यह द्वीप समूह केरल के मालाबार तट के पास स्थित है। यह द्वीपों का समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना हुआ है। लक्षद्वीप को पहले लकादीव, मीनीकाय तथा एमीनदीव के नाम से जाना जाता था परन्तु वर्ष 1973 में इसका नाम लक्षद्वीप रखा गया। यह द्वीप समूह 32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस द्वीप पर विभिन्न प्रकार की पादप व जन्तुओं की प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कावारत्ती द्वीप लक्षद्वीप का प्रशासनिक मुख्यालय है तथा पिटली द्वीप एक पक्षी अभयारण्य है।
(2) अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह-अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यह द्वीप समूह आकार में बड़े, संख्या में बहुल एवं बिखरे हुए हैं। यह द्वीप समूह मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है-उत्तर में अण्डमान तथा दक्षिण में निकोबार। यह माना जाता है कि यह द्वीप समूह निमज्जित पर्वत श्रेणियों के शिखर है। यह द्वीप समूह विषुवत वृत्त के समीप स्थित है अतः यहाँ की जलवायु विषुवतीय है। यह द्वीप घने जंगलों से आच्छादित है तथा यहाँ पर विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के पादप एवं जन्तु पाए जाते हैं।
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Question 25 Marks
भारत के समुद्रतटीय मैदान का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer
भारत के समुद्रतटीय मैदान भारत के दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार के दोनों तरफ विभिन्न चौड़ाइयों के तटीय मैदान स्थित हैं। इन मैदानों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है- (1) पश्चिमी तटीय मैदान-पश्चिमी तटीय मैदान, पश्चिमी घाट तथा अरब सागर के बीच स्थित एक संकीर्ण मैदान है। यह मैदान कच्छ की खाड़ी से लेकर कुमारी अन्तरीप तक फैला हुआ है। इस मैदान के तीन मुख्य भाग हैं-
(i) कोंकण तट-पश्चिमी तट के उत्तरी भाग को कोंकण (मुम्बई तथा गोवा) तट कहते हैं।
(ii) कन्नड़ मैदान-मध्य भाग को कन्नड़ मैदान कहते हैं। (iii) मालाबार तट-दक्षिणी भाग को मालाबार तट कहते हैं। प्रमुख नदियाँ-पश्चिमी तटीय मैदान में नर्मदा, ताप्ती तथा मांडवी आदि नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
प्रमुख बन्दरगाह-कान्डला, मुम्बई, मारमागोआ, कोचीन व मंगलौर आदि इस भाग के प्रमुख बन्दरगाह हैं।
(2) पूर्वी तटीय मैदान-यह बंगाल की खाड़ी के साथ गंगा नदी के मुहाने से कुमारी अन्तरीप तक फैला हुआ है। यह मैदान अपेक्षाकृत चौड़ा तथा समतल है। इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है-
(i) उत्तरी सरकार-इस तट के उत्तरी भाग को 'उत्तरी सरकार' के नाम से जाना जाता है।
(ii) कोरोमण्डल तट-पूर्वी तटीय मैदान के दक्षिणी भाग को 'कोरोमण्डल तट' कहा जाता है।
प्रमुख नदियाँ-पूर्वी तटीय मैदान में प्रवाहित होने वाली प्रमुख नदियाँ महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी हैं। ये इस तट पर विशाल डेल्टा का निर्माण करती हैं। उड़ीसा में महानदी के डेल्टा के दक्षिण में स्थित चिल्का झील भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है।
प्रमुख बन्दरगाह-विशाखापट्टनम, चेन्नई, पारादीप व तूतीकोरिन इस तटीय मैदान के प्रमुख बन्दरगाह हैं।
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Question 35 Marks
प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताएँ बतलाइए।
Answer
प्रायद्वीपीय पठार प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन अग्र प्रकार है-
(1) स्थिति, आकृति एवं निर्माण-प्रायद्वीपीय पठार उत्तर के मैदान के दक्षिण में स्थित है। यह एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपान्तरित शैलों से बना है। यह बहुत प्राचीनतम भूभाग है। यह गोंडवानालैण्ड के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं।
(2) मुख्य भाग-प्रायद्वीपीय पठार को निम्न दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
(i) मध्य उच्च भूमि-नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित प्रायद्वीपीय पठार का भू-भाग मध्य उच्च भूमि कहलाता है। इसके अन्तर्गत मालवा का पठार, बुन्देलखण्ड का पठार तथा छोटा नागपुर पठार शामिल हैं। अरावली श्रेणी तथा विन्ध्य श्रेणी इस भाग की मुख्य पर्वत श्रेणियाँ हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ चम्बल, सिंध, बेतवा तथा केन हैं जो दक्षिण पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ बहती हैं।
(ii) दक्षिण का पठार-दक्षिण का पठार की आकृति त्रिभुजाकार है। यह नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। प्रायद्वीपीय पठार का यह भाग ज्यादा बड़ा है।
मुख्य पहाड़ियाँ एवं श्रृंखलाएँ-उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है। अन्य शृंखलाओं में महादेव, कैमूर की पहाड़ी तथा मैकाल श्रृंखला मुख्य हैं। इस पठार का एक भाग उत्तर-पूर्व में भी देखा जा सकता है, जिसे स्थानीय रूप से मेघालय, कार्बी एंगलौंग पठार तथा उत्तर कचार पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। इस हिस्से में पश्चिम से पूर्व की ओर तीन महत्त्वपूर्ण श्रृंखलाएँ गारो, खासी तथा जयन्तिया हैं।
प्रमुख नदियाँ एवं ढाल-महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती आदि इस प्रदेश की प्रमुख नदियाँ हैं। दक्षिण के पठार का ढाल पूर्व की तरफ है, इसी कारण इस क्षेत्र की अधिकतर नदियाँ यथा-महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि पूर्व दिशा में प्रवाहित होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, केवल नर्मदा व ताप्ती नदियाँ ही पश्चिम में अरब सागर में गिरती हैं।
(3) घाट-दक्षिण के पठार के पश्चिमी तथा पूर्वी सिरे पर क्रमशः पश्चिमी तथा पूर्वी घाट हैं।
(i) पश्चिमी घाट-दक्षिण के पठार का पश्चिम की तरफ उठा हुआ किनारा पश्चिमी घाट के नाम से जाना जाता है। यह पश्चिमी तट के समानान्तर स्थित है। ये लगातार हैं तथा केवल दरों के द्वारा ही इनमें से आया-जाया जा सकता है। इनकी ऊँचाई 900 से 1600 मी. है। पश्चिमी घाट में पर्वतीय वर्षा होती है। यह वर्षा घाट के पश्चिमी ढाल पर आर्द्र हवा के टकराकर ऊपर उठने से होती है। इस घाट की ऊँचाई उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती जाती है। अनाईमुडी (2695 मी.) तथा डोडा बेटा (2633 मी.) इस भाग के प्रमुख ऊँचे शिखर हैं।
(ii) पूर्वी घाट-पूर्वी घाट दक्षिण के पठार के पूर्वी किनारे पर स्थित है। पूर्वी घाट की औसत ऊँचाई 600 मी. है। इनका विस्तार महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरी तक है। ये अनियमित हैं। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने इनको जगह-जगह पर काट दिया है। शिखर महेन्द्रगिरी (1500 मी.) पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा शिखर है। पूर्वी घाट के दक्षिण-पश्चिम में शेवराय तथा जावेडी की पहाड़ियाँ स्थित हैं।
(4) उपजाऊ मृदा-प्रायद्वीपीय पठार में लावा निर्मित उपजाऊ काली मृदा पाई जाती है। इसे 'दक्कन ट्रैप' के नाम से भी जाना जाता है।
(5) खनिज सम्पदा-प्रायद्वीपीय पठार में आग्नेय चट्टानों की उपस्थिति पाई जाती है। प्राचीनतम चट्टानों से निर्मित होने के कारण इसमें विपुल खनिज सम्पदा के भण्डार पाये जाते हैं।
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Question 45 Marks
प्रायद्वीपीय पठार का वर्णन कीजिए।
Answer
प्रायद्वीपीय पठार प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन अग्र प्रकार है-
(1) स्थिति, आकृति एवं निर्माण-प्रायद्वीपीय पठार उत्तर के मैदान के दक्षिण में स्थित है। यह एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपान्तरित शैलों से बना है। यह बहुत प्राचीनतम भूभाग है। यह गोंडवानालैण्ड के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं।
(2) मुख्य भाग-प्रायद्वीपीय पठार को निम्न दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
(i) मध्य उच्च भूमि-नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित प्रायद्वीपीय पठार का भू-भाग मध्य उच्च भूमि कहलाता है। इसके अन्तर्गत मालवा का पठार, बुन्देलखण्ड का पठार तथा छोटा नागपुर पठार शामिल हैं। अरावली श्रेणी तथा विन्ध्य श्रेणी इस भाग की मुख्य पर्वत श्रेणियाँ हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ चम्बल, सिंध, बेतवा तथा केन हैं जो दक्षिण पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ बहती हैं।
(ii) दक्षिण का पठार-दक्षिण का पठार की आकृति त्रिभुजाकार है। यह नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। प्रायद्वीपीय पठार का यह भाग ज्यादा बड़ा है।
मुख्य पहाड़ियाँ एवं श्रृंखलाएँ-उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है। अन्य शृंखलाओं में महादेव, कैमूर की पहाड़ी तथा मैकाल श्रृंखला मुख्य हैं। इस पठार का एक भाग उत्तर-पूर्व में भी देखा जा सकता है, जिसे स्थानीय रूप से मेघालय, कार्बी एंगलौंग पठार तथा उत्तर कचार पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। इस हिस्से में पश्चिम से पूर्व की ओर तीन महत्त्वपूर्ण श्रृंखलाएँ गारो, खासी तथा जयन्तिया हैं।
प्रमुख नदियाँ एवं ढाल-महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती आदि इस प्रदेश की प्रमुख नदियाँ हैं। दक्षिण के पठार का ढाल पूर्व की तरफ है, इसी कारण इस क्षेत्र की अधिकतर नदियाँ यथा-महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि पूर्व दिशा में प्रवाहित होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, केवल नर्मदा व ताप्ती नदियाँ ही पश्चिम में अरब सागर में गिरती हैं।
(3) घाट-दक्षिण के पठार के पश्चिमी तथा पूर्वी सिरे पर क्रमशः पश्चिमी तथा पूर्वी घाट हैं।
(i) पश्चिमी घाट-दक्षिण के पठार का पश्चिम की तरफ उठा हुआ किनारा पश्चिमी घाट के नाम से जाना जाता है। यह पश्चिमी तट के समानान्तर स्थित है। ये लगातार हैं तथा केवल दरों के द्वारा ही इनमें से आया-जाया जा सकता है। इनकी ऊँचाई 900 से 1600 मी. है। पश्चिमी घाट में पर्वतीय वर्षा होती है। यह वर्षा घाट के पश्चिमी ढाल पर आर्द्र हवा के टकराकर ऊपर उठने से होती है। इस घाट की ऊँचाई उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती जाती है। अनाईमुडी (2695 मी.) तथा डोडा बेटा (2633 मी.) इस भाग के प्रमुख ऊँचे शिखर हैं।
(ii) पूर्वी घाट-पूर्वी घाट दक्षिण के पठार के पूर्वी किनारे पर स्थित है। पूर्वी घाट की औसत ऊँचाई 600 मी. है। इनका विस्तार महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरी तक है। ये अनियमित हैं। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने इनको जगह-जगह पर काट दिया है। शिखर महेन्द्रगिरी (1500 मी.) पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा शिखर है। पूर्वी घाट के दक्षिण-पश्चिम में शेवराय तथा जावेडी की पहाड़ियाँ स्थित हैं।
(4) उपजाऊ मृदा-प्रायद्वीपीय पठार में लावा निर्मित उपजाऊ काली मृदा पाई जाती है। इसे 'दक्कन ट्रैप' के नाम से भी जाना जाता है।
(5) खनिज सम्पदा-प्रायद्वीपीय पठार में आग्नेय चट्टानों की उपस्थिति पाई जाती है। प्राचीनतम चट्टानों से निर्मित होने के कारण इसमें विपुल खनिज सम्पदा के भण्डार पाये जाते हैं।
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Question 55 Marks
हिमालय पर्वतीय क्षेत्र के प्रमुख भागों का भौगोलिक वर्णन कीजिये।
Answer
हिमालय पर्वत श्रृंखला हिमालय पर्वत श्रृंखला का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है-
(1) स्थिति, आकृति एवं विस्तार-हिमालय पर्वत श्रृंखला भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत है। यह एक नवीन एवं वलित पर्वत श्रृंखला है। हिमालय पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम से पूर्व दिशा में सिन्धु से लेकर ब्रह्मपुत्र तक फैली हैं। ये 2400 किमी. की लम्बाई में एक अर्द्ध-वृत्त का निर्माण करती हैं। कश्मीर में इसकी चौड़ाई 400 किमी. तथा अरुणाचल में 150 किमी. है। यह विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है तथा अत्यधिक असम है। इसके पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है।
(2) विभाजन-देशान्तरीय विस्तार के साथ हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं को निम्न तीन मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है- (i) महान या आन्तरिक हिमालय या हिमाद्रि-यह सर्वाधिक निरन्तर श्रेणी है, जिसकी औसत ऊँचाई 6,000 मी. है। इसमें दुनिया की सर्वाधिक ऊँची चोटी भी स्थित है। इसका आन्तरिक भाग ग्रेनाइट का बना हुआ है। इसके मोड़ की प्रकृति असममित है। यह साल भर बर्फ से ढंका रहता है तथा इससे कई हिमनद बाहर निकलते हैं।
(ii) निम्न हिमालय-इसे हिमाचल भी कहा जाता है। यह हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है तथा सर्वाधिक कटे-फटे पर्वत तन्त्र का निर्माण करता है। इसकी ऊँचाई 3,700 मी. से 4500 मी. के बीच है। यह श्रेणी अपने हिल स्टेशनों के लिए प्रसिद्ध है।
(iii) शिवालिक-यह हिमालय की सबसे बाहरी श्रेणी है। इसकी ऊँचाई 900 मी. से 1,100 मी. के बीच तथा चौड़ाई 10 से 50 किमी. के बीच है। यह सुदूर उत्तर में स्थित मुख्य हिमालयी श्रेणियों से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई गई अवसादों से बनी है। इसमें कई प्रसिद्ध 'दून' स्थित हैं।
पश्चिम से पूर्व तक स्थित क्षेत्रों के आधार पर हिमालय को निम्न प्रकार से विभाजित किया जा सकता है-
(i) पंजाब हिमालय-सतलुज एवं सिन्धु के बीच स्थित क्षेत्र। (ii) कुमाऊँ हिमालय-सतलुज एवं काली नदियों के बीच। (iii) नेपाल हिमालय-काली तथा तिस्ता नदियों के बीच। (iv) असम हिमालय-तिस्ता तथा दिहांग नदियों के बीच।
(3) पूर्वांचल-ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय की सबसे पूर्वी सीमा बनाती है। दिहांग गार्ज के बाद हिमालय दक्षिण की ओर एक तीव्र मोड़ बनाते हुए भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है। इन्हें पूर्वांचल या पूर्वी पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है। ये पहाड़ियाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों में विस्तृत हैं। ये अवसादी शैल की बनी हैं। यहाँ घने जंगल हैं। पूर्वांचल में पटकाई, नागा, मिजो तथा मणिपुर पहाड़ियाँ आती हैं।
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Question 65 Marks
हिमालय पर्वत श्रृंखला का वर्णन कीजिए।
Answer
हिमालय पर्वत श्रृंखला हिमालय पर्वत श्रृंखला का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है-
(1) स्थिति, आकृति एवं विस्तार-हिमालय पर्वत श्रृंखला भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत है। यह एक नवीन एवं वलित पर्वत श्रृंखला है। हिमालय पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम से पूर्व दिशा में सिन्धु से लेकर ब्रह्मपुत्र तक फैली हैं। ये 2400 किमी. की लम्बाई में एक अर्द्ध-वृत्त का निर्माण करती हैं। कश्मीर में इसकी चौड़ाई 400 किमी. तथा अरुणाचल में 150 किमी. है। यह विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है तथा अत्यधिक असम है। इसके पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है।
(2) विभाजन-देशान्तरीय विस्तार के साथ हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं को निम्न तीन मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है- (i) महान या आन्तरिक हिमालय या हिमाद्रि-यह सर्वाधिक निरन्तर श्रेणी है, जिसकी औसत ऊँचाई 6,000 मी. है। इसमें दुनिया की सर्वाधिक ऊँची चोटी भी स्थित है। इसका आन्तरिक भाग ग्रेनाइट का बना हुआ है। इसके मोड़ की प्रकृति असममित है। यह साल भर बर्फ से ढंका रहता है तथा इससे कई हिमनद बाहर निकलते हैं।
(ii) निम्न हिमालय-इसे हिमाचल भी कहा जाता है। यह हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है तथा सर्वाधिक कटे-फटे पर्वत तन्त्र का निर्माण करता है। इसकी ऊँचाई 3,700 मी. से 4500 मी. के बीच है। यह श्रेणी अपने हिल स्टेशनों के लिए प्रसिद्ध है।
(iii) शिवालिक-यह हिमालय की सबसे बाहरी श्रेणी है। इसकी ऊँचाई 900 मी. से 1,100 मी. के बीच तथा चौड़ाई 10 से 50 किमी. के बीच है। यह सुदूर उत्तर में स्थित मुख्य हिमालयी श्रेणियों से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई गई अवसादों से बनी है। इसमें कई प्रसिद्ध 'दून' स्थित हैं।
पश्चिम से पूर्व तक स्थित क्षेत्रों के आधार पर हिमालय को निम्न प्रकार से विभाजित किया जा सकता है-
(i) पंजाब हिमालय-सतलुज एवं सिन्धु के बीच स्थित क्षेत्र। (ii) कुमाऊँ हिमालय-सतलुज एवं काली नदियों के बीच। (iii) नेपाल हिमालय-काली तथा तिस्ता नदियों के बीच। (iv) असम हिमालय-तिस्ता तथा दिहांग नदियों के बीच।
(3) पूर्वांचल-ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय की सबसे पूर्वी सीमा बनाती है। दिहांग गार्ज के बाद हिमालय दक्षिण की ओर एक तीव्र मोड़ बनाते हुए भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है। इन्हें पूर्वांचल या पूर्वी पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है। ये पहाड़ियाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों में विस्तृत हैं। ये अवसादी शैल की बनी हैं। यहाँ घने जंगल हैं। पूर्वांचल में पटकाई, नागा, मिजो तथा मणिपुर पहाड़ियाँ आती हैं।
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Question 75 Marks
भारत के भू-आकृतिक विभाजन का वर्णन कीजिए।
Answer
भारत के भौतिक स्वरूप भौगोलिक रूप से अत्यधिक विस्तृत क्षेत्र में फैले होने के कारण भारत का भौगोलिक उच्चावच एकसमान नहीं है। उसमें अनेक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भौतिक विभिन्नताओं के आधार पर भारत को निम्न भौतिक स्वरूपों में बाँटा गया है-
(1) हिमालय पर्वत श्रृंखला-यह भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है। भूगर्भीय रूप से यह युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से मोड़दार पर्वत श्रृंखला है। यह अत्यधिक असम शृंखला है। यह पर्वत श्रृंखला 2400 किमी. की लम्बाई में एक अर्द्ध-वृत्त में फैली है। कश्मीर में इसकी चौड़ाई 400 किमी. तथा अरुणाचल में 150 किमी. है। इस पर्वत श्रृंखला में विश्व की सर्वाधिक ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट स्थित है।
(2) उत्तरी मैदान-यह मैदान लगभग 2,400 किमी. लम्बा तथा 240 से 320 किमी. चौड़ा है। यह तीन नदी प्रणालियों सिन्ध गंगा तथा ब्रह्मपत्र के आपसी संक्रियाओं का परिणाम है। यह उपजाऊ
(3) प्रायद्वीपीय पठार-यह आग्नेय एवं कायान्तरित चट्टानों से बनी एक उच्च भूमि है। इसमें चौड़ी एवं उथली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। इस पठार के दो प्रमुख भाग हैं-मध्य उच्च भूमि तथा दक्कन का पठार। (4) भारतीय मरुस्थल-यह अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारों की ओर स्थित है। यहाँ की जलवायु शुष्क है तथा बहुत कम मात्रा में वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। यहाँ अधिकांश भागों पर रेत के टीले पाए जाते हैं।
(5) तटीय मैदान-ये मैदान प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी एवं पश्चिमी किनारों के अनुदिश फैले हुए हैं।
(6)द्वीप समूह-इसमें दो द्वीप-समूह शामिल हैं-लक्षद्वीप द्वीप-समूह तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह । लक्षद्वीप द्वीप-समूह अरब सागर में स्थित है जबकि अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं।
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Question 85 Marks
भारत के प्रमुख भौतिक स्वरूपों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer
भारत के भौतिक स्वरूप भौगोलिक रूप से अत्यधिक विस्तृत क्षेत्र में फैले होने के कारण भारत का भौगोलिक उच्चावच एकसमान नहीं है। उसमें अनेक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भौतिक विभिन्नताओं के आधार पर भारत को निम्न भौतिक स्वरूपों में बाँटा गया है-
(1) हिमालय पर्वत श्रृंखला-यह भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है। भूगर्भीय रूप से यह युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से मोड़दार पर्वत श्रृंखला है। यह अत्यधिक असम शृंखला है। यह पर्वत श्रृंखला 2400 किमी. की लम्बाई में एक अर्द्ध-वृत्त में फैली है। कश्मीर में इसकी चौड़ाई 400 किमी. तथा अरुणाचल में 150 किमी. है। इस पर्वत श्रृंखला में विश्व की सर्वाधिक ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट स्थित है।
(2) उत्तरी मैदान-यह मैदान लगभग 2,400 किमी. लम्बा तथा 240 से 320 किमी. चौड़ा है। यह तीन नदी प्रणालियों सिन्ध गंगा तथा ब्रह्मपत्र के आपसी संक्रियाओं का परिणाम है। यह उपजाऊ
(3) प्रायद्वीपीय पठार-यह आग्नेय एवं कायान्तरित चट्टानों से बनी एक उच्च भूमि है। इसमें चौड़ी एवं उथली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। इस पठार के दो प्रमुख भाग हैं-मध्य उच्च भूमि तथा दक्कन का पठार। (4) भारतीय मरुस्थल-यह अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारों की ओर स्थित है। यहाँ की जलवायु शुष्क है तथा बहुत कम मात्रा में वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। यहाँ अधिकांश भागों पर रेत के टीले पाए जाते हैं।
(5) तटीय मैदान-ये मैदान प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी एवं पश्चिमी किनारों के अनुदिश फैले हुए हैं।
(6)द्वीप समूह-इसमें दो द्वीप-समूह शामिल हैं-लक्षद्वीप द्वीप-समूह तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह । लक्षद्वीप द्वीप-समूह अरब सागर में स्थित है जबकि अण्डमान एवं निकोबार द्वीप-समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं।
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