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लघु उत्तरीय प्रश्न (3 गुण)

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Question 13 Marks
नेपोलियन के पतन के कोई चार कारण बताओ।
Answer
नेपोलयन के पतन के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
महत्त्वाकांक्षा-नेपोलियन अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति था। उसकी महत्त्वाकांक्षाओं का कोई अन्त नहीं था। यह उसके पतन का एक प्रमुख कारण रही।
साम्राज्यवादी भावना-नेपोलियन में साम्राज्यवादी भावना प्रबल रूप में थी। यह भावना भी उसके पतन का एक कारण बनी। सैनिकवाद-नेपोलियन का साम्राज्यवाद सैनिक शक्ति पर आधारित था। सैनिकवाद के प्रसार ने यूरोप में भीषण युद्धों को जन्म दिया, जिससे फ्रांस की सैनिक शक्ति निरंतर कम होती गई।
युद्धप्रियता-साम्राज्यवादी लिप्सा, सैनिकवाद ने उसे युद्धप्रिय बना दिया। लोग उसे हमलावर मानने लगे और यह उसके पतन का कारण बनी। अन्ततः 1815 में वाटर लू में उसकी हार हुई।
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Question 23 Marks
नेपोलियन बोनापार्ट की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
Answer
नेपोलियन बोनापार्ट की उपलब्धियों का मूल्यांकन निम्न बिन्दुओं में किया जा सकता है
सन् 1804 में नेपोलियन बोनापार्ट ने खुद को फ्रांस का सम्राट घोषित कर दिया तथा फ्रांस की राजनैतिक अस्थिरता को समाप्त किया।
इसके बाद उसने पड़ोस के यूरोपीय देशों की विजय यात्रा शुरू की। पुराने राजवंशों को हटाकर उसने नए साम्राज्य बनाए और उनकी बागडोर अपने खानदान के लोगों के हाथ में दे दी।
नेपोलियन ने यूरोप का आधुनिकीकरण किया। उसने निजी संपत्ति की सुरक्षा के कानून बनाए और दशमलव पद्धति पर आधारित नाप-तौल की एक समान प्रणाली चलायी।
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Question 33 Marks
क्रांतिकारी सरकार ने महिलाओं के जीवन में सुधार लाने हेतु कौन-कौनसे कानून लागू किए?
Answer
प्रारंभिक वर्षों में क्रांतिकारी सरकार ने महिलाओं के जीवन में सुधार लाने वाले निम्न प्रमुख कानून लागू किए-
सरकारी विद्यालयों की स्थापना के साथ ही सभी लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा को अनिवार्य बना दिया गया।
अब पिता उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए बाध्य नहीं कर सकते थे। शादी को स्वैच्छिक अनुबंध माना गया और नागरिक कानूनों के तहत उनका पंजीकरण किया जाने लगा। तलाक को कानूनी रूप दिया गया और मर्द-औरत दोनों को ही इसकी अर्जी देने का अधिकार दिया गया।
अब महिलाएँ व्यावसायिक प्रशिक्षण ले सकती थीं, कलाकार बन सकती थीं और छोटे-मोटे व्यवसाय चला सकती थीं।
लेकिन मताधिकार और समान वेतन का अधिकार उन्हें नहीं मिला। इसके लिए उनका आंदोलन जारी रहा। अन्ततः 1946 में उन्हें मताधिकार प्राप्त हुआ।
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Question 43 Marks
क्रांति में फ्रांसीसी महिलाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए।
Answer
क्रांति में फ्रांसीसी महिलाओं की भूमिका-फ्रांसीसी समाज में क्रांति लाने में महिलाएँ भी सक्रिय रूप से शामिल थीं। उन्होंने क्रांतिकारी सरकार पर उनके जीवन में सधार लाने के लिए आवश्यक डाला। इस हेतु उन्होंने स्वयं के राजनैतिक क्लब एवं अखबार शुरू किए तथा निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए-
सभी वर्गों की महिलाओं को शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए।
उन्हें भी पुरुषों के समाज मजदूरी दी जाए।
उन्हें भी पुरुषों के समान राजनैतिक अधिकार दिए जाएं।
उन्होंने मताधिकार, निर्वाचित होने तथा राजनैतिक पद ग्रहण कर सकने की मांग की। फ्रांस के विभिन्न शहरों में महिलाओं के ऐसे लगभग साठ राजनैतिक क्लब अस्तित्व में आए।
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Question 53 Marks
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में महिलाओं की दशा का वर्णन कीजिये।
Answer
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में महिलाओं की दशा का वर्णन निम्न बिन्दुओं में किया जा सकता है-
तीसरे एस्टेट की अधिकतर महिलाओं को जीविकोपार्जन के लिए काम करना पड़ता था।
उनमें से अधिकतर को शिक्षा प्राप्त नहीं थी।
एक मजदूर के रूप में महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा कम मजदूरी मिलती थी।
उन्हें कम उम्र में ही अपने माता-पिता द्वारा शादी करने के लिए बाध्य किया जाता था।
अपनी नौकरी के साथ-साथ उन्हें अपने परिवारों की भी देखभाल करनी पड़ती थी।
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Question 63 Marks
डिरेक्ट्री शासित फ्रांस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
Answer
डिरेक्ट्री शासन से आशय-1794 ई. में फ्रांस में जैकोबिन सरकार के पतन के बाद फ्रांस की सत्ता मध्यम वर्ग के सम्पन्न लोगों के हाथ में आ गई । फ्रांस के नये संविधान में दो चुनी हुई विधान परिषदों के गठन का प्रावधान था। इन परिषदों ने पांच सदस्यों वाली एक कार्यपालिका को नियुक्त किया जिसे 'डिरेक्ट्री' कहा गया।
इस व्यवस्था के अन्तर्गत एक व्यक्ति के हाथ में शक्तियों के केन्द्रीकरण पर रोक लगाई गई। लेकिन इन डिरेक्टरों का झगड़ा अक्सर विधान परिषदों से होता था और तब परिषद् उन्हें बर्खास्त करने की कोशिश करती। इस प्रकार एक राजनैतिक अस्थिरता का वातावरण बना जिसने नेपोलियन बोनापार्ट के सैनिक शासन का मार्ग प्रशस्त किया।
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Question 73 Marks
ओलम्प दे गूज' के जीवन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer
फ्रांस की क्रांति में महिलाओं ने भी भाग लिया था। ओलम्प दे गूज नामक महिला क्रांतिकालीन फ्रांस की राजनीतिक रूप से सक्रिय महिलाओं में सबसे महत्त्वपूर्ण थीं। इनका जन्म 1748 में हुआ था तथा मृत्यु 1793 में हुई थी। उन्होंने संविधान तथा 'पुरुष एवं नागरिक अधिकार घोषणापत्र' का विरोध किया था क्योंकि उसमें महिलाओं को मानव मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया था। सन् 1793 में ओलम्प दे गूज ने महिला क्लबों को जबर्दस्ती बंद कर देने के लिए जैकोबिन सरकार की आलोचना की। इस पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर नेशनल कन्वेंशन द्वारा देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया। इसके तुरंत बाद उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया।
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Question 83 Marks
जैकोबिन क्लब पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
जैकोबिन क्लब फ्रांस का एक प्रमुख राजनैतिक क्लब था। इसके सदस्य मुख्यतः समाज के कम समृद्ध वर्ग से संबंध रखते थे; जैसे-छोटे दुकानदार, कारीगर, जूते बनाने वाले, पेस्ट्री बनाने वाले, घड़ीसाज, छपाई करने वाले, नौकर तथा दैनिक मजदूर आदि।
जैकोबिन क्लब का नेता मैक्समिलियन रोब्सपियर था। गोदी में काम करने वाले कामगारों की तरह धारीदार लंबी पतलून उनकी पोशाक का हिस्सा थी। उन्होंने ऐसा स्वयं को समाज के फैशनपरस्त कुलीन वर्ग से अलग रखने के लिए किया। कुलीन लोग घुटनों तक ब्रीचेस पहनते थे। जैकोबिन क्लब के सदस्यों का यह पहनावा ब्रीचेस पहनने वाले लोगों की सत्ता समाप्ति की घोषणा करने का उनका तरीका था।
जैकोबिन क्लब के सदस्यों को 'सौं कुलाँत' के नाम से जाना जाने लगा जिसका शाब्दिक अर्थ था-'बिना घुटन्ने वाले'।
सौं कुलाँत लोग एक लाल टोपी भी पहनते थे, जो आजादी की प्रतीक थी।
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Question 93 Marks
नेशनल असेम्बली द्वारा किये गये प्रमुख सुधारों का वर्णन कीजिए।
Answer
नेशनल असेम्बली द्वारा किये गये प्रमुख सुधार निम्न प्रकार हैं:
नेशनल असेम्बली ने करों, कर्तव्यों और बन्धनों वाली सामन्ती व्यवस्था के उन्मूलन का आदेश पारित किया। पादरी वर्ग के लोगों को भी अपने विशेषाधिकार छोड़ने के लिए विवश किया गया।
धार्मिक कर समाप्त कर दिया गया।
चर्च के स्वामित्व वाली भूमि जब्त कर ली गई।
जनता को समानता, स्वतन्त्रता तथा भ्रातृत्व के साथ मौलिक अधिकार दिये गये।
सम्राट की शक्तियों को सीमित किया गया तथा इन शक्तियों को विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में विभाजित व हस्तांतरित कर फ्रांस में संवैधानिक राजतंत्र की नींव डाली।
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Question 103 Marks
जीविका संकट क्या है? अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में इसके लिए उत्तरदायी दो कारकों का उल्लेख करें।
Answer
जीविका संकट-जीविका संकट ऐसी चरम स्थिति होती है जिसमें जीवित रहने के न्यूनतम साधन भी खतरे में पड़ने लगते हैं।
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में जीविका संकट के लिए उत्तरदायी दो कारक-
(1) फ्रांस की जनसंख्या 1715 में लगभग 2.3 करोड़ थी जो 1789 में 2.8 करोड़ हो गई। इसी कारण खाद्यान्नों की मांग में तेजी से वृद्धि हुई । खाद्यान्नों का उत्पादन माँग के अनुसार नहीं बढ़ रहा था। इसलिए पावरोटी की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ीं, जो कि बहुसंख्यकों का मुख्य आहार था। परन्तु मजदूरी बढ़ती हुई कीमतों के अनुसार नहीं बढ़ती थी। इस प्रकार अमीरों तथा गरीबों में अंतर बढ़ता गया।
(2) जब भी कभी सूखे या ओलों का प्रकोप होने से पैदावार गिर जाती थी, तब भी जीविका संकट पैदा हो जाता था।
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Question 113 Marks
फ्रांसीसी उपनिवेशों में दास-प्रथा की क्या स्थिति थी तथा यह प्रथा अन्ततः कैसे और कब समाप्त हुई?
Answer
अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में फ्रांस में दास-प्रथा की स्थिति निम्न प्रकार थी-
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में दास-प्रथा की ज्यादा निंदा नहीं हुई। दास-व्यापार पर निर्भर व्यापारियों के विरोध के भय से नेशनल असेंबली में कोई कानून पारित नहीं किया गया।
लेकिन अंततः सन् 1794 के कन्वेंशन द्वारा फ्रांसीसी उपनिवेशों में सभी दासों की मुक्ति का कानून पारित कर दिया गया। यह जैकोबिन शासन का क्रांतिकारी सामाजिक सुधार था। किन्तु यह कानून एक छोटी-सी अवधि तक ही लागू रहा।
दस वर्ष बाद ही 1804 में नेपोलियन ने दास-प्रथा पुनः शुरू कर दी। बागान-मालिकों को अपने आर्थिक हित साधने के लिए अफ्रीकी नीग्रो लोगों को गुलाम बनाने की स्वतंत्रता मिल गयी। अन्ततः फ्रांसीसी उपनिवेशों से दास-प्रथा का निर्णायक उन्मूलन 1848 में किया गया।
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Question 123 Marks
अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में फ्रांस की दासता के विषय में क्या स्थिति थी? किन्हीं तीन स्थितियों को स्पष्ट कीजिए।
Answer
अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में फ्रांस में दास-प्रथा की स्थिति निम्न प्रकार थी-
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस में दास-प्रथा की ज्यादा निंदा नहीं हुई। दास-व्यापार पर निर्भर व्यापारियों के विरोध के भय से नेशनल असेंबली में कोई कानून पारित नहीं किया गया।
लेकिन अंततः सन् 1794 के कन्वेंशन द्वारा फ्रांसीसी उपनिवेशों में सभी दासों की मुक्ति का कानून पारित कर दिया गया। यह जैकोबिन शासन का क्रांतिकारी सामाजिक सुधार था। किन्तु यह कानून एक छोटी-सी अवधि तक ही लागू रहा।
दस वर्ष बाद ही 1804 में नेपोलियन ने दास-प्रथा पुनः शुरू कर दी। बागान-मालिकों को अपने आर्थिक हित साधने के लिए अफ्रीकी नीग्रो लोगों को गुलाम बनाने की स्वतंत्रता मिल गयी। अन्ततः फ्रांसीसी उपनिवेशों से दास-प्रथा का निर्णायक उन्मूलन 1848 में किया गया।
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Question 133 Marks
फ्रांस की क्रांतिकारी सरकार ने महिलाओं के लाभ के लिए क्या कानून पारित किये?
Answer
फ्रांस की क्रांतिकारी सरकार ने महिलाओं के लाभ के लिए निम्न कानून पारित किये-
सरकारी विद्यालयों की स्थापना के साथ ही सभी लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा को अनिवार्य बना दिया गया।
अब उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता था। शादी को स्वैच्छिक अनुबंध माना गया और नागरिक कानूनों के तहत उनका पंजीकरण किया जाने लगा।
तलाक को कानूनी रूप दिया गया और पुरुष-महिला दोनों को ही इसकी अर्जी देने का अधिकार दिया गया।
अब महिलाएँ व्यावसायिक प्रशिक्षण ले सकती थीं, कलाकार बन सकती थीं तथा छोटे-मोटे व्यवसाय चला सकती थीं।
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Question 143 Marks
फ्रांस के इतिहास में कौनसा काल'आतंक का राज' के नाम से जाना जाता है? इस काल की प्रमुख बातों को संक्षेप में लिखिए।
Answer
रोबेस्प्येर-रोबेस्प्येर जैकोबिनों का प्रमुख नेता था। 1792 में बनी जैकोबिन सरकार का वह प्रमुख था।
आतंक का राज-फ्रांस के इतिहास में सन् 1793 से 1794 तक के रोबेस्प्येर के शासन काल को 'आतंक का युग' अथवा 'आतंक का राज' कहा जाता है। इसके निम्न कारण हैं-
(1) इस काल के दौरान रोबेस्प्येर ने कठोर नियंत्रण तथा दण्ड की सख्त नीति को अपनाया।
(2) अपने विरोधियों जैसे-कुलीन एवं पादरी, अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य, उसकी कार्यशैली से असहमति रखने वाले पार्टी सदस्य, सभी को बंदी बनाकर उन पर मुकदमा चलाया गया तथा न्यायालय द्वारा दोषी ठहराये जाने पर उन्हें गिलोटिन पर चढ़ाकर उनका सिर कत्ल कर दिया गया।
(3) रोबेस्प्येर ने कानून बनाकर मजदूरी एवं कीमतों की अधिकतम सीमा तय कर दी। गोश्त तथा पावरोटी की राशनिंग कर दी गई। किसानों को अपना अनाज शहरों में ले जाकर तय कीमत पर बेचने के लिए बाध्य किया गया। सभी नागरिकों को 'समता रोटी' खाना अनिवार्य कर दिया गया। बोलचाल और संबोधन में भी बराबरी का आचार-व्यवहार लागू करने की कोशिश की गई।
(4) उसके काल में चर्चों को बन्द कर दिया गया तथा उनके भवनों को बैरक या दफ्तर बना दिया गया।
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Question 153 Marks
रोबेस्येर कौन था? उसके शासन का 'आतंक का शासन' के नाम से क्यों जाना जाता है?
Answer
रोबेस्प्येर-रोबेस्प्येर जैकोबिनों का प्रमुख नेता था। 1792 में बनी जैकोबिन सरकार का वह प्रमुख था।
आतंक का राज-फ्रांस के इतिहास में सन् 1793 से 1794 तक के रोबेस्प्येर के शासन काल को 'आतंक का युग' अथवा 'आतंक का राज' कहा जाता है। इसके निम्न कारण हैं-
(1) इस काल के दौरान रोबेस्प्येर ने कठोर नियंत्रण तथा दण्ड की सख्त नीति को अपनाया।
(2) अपने विरोधियों जैसे-कुलीन एवं पादरी, अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य, उसकी कार्यशैली से असहमति रखने वाले पार्टी सदस्य, सभी को बंदी बनाकर उन पर मुकदमा चलाया गया तथा न्यायालय द्वारा दोषी ठहराये जाने पर उन्हें गिलोटिन पर चढ़ाकर उनका सिर कत्ल कर दिया गया।
(3) रोबेस्प्येर ने कानून बनाकर मजदूरी एवं कीमतों की अधिकतम सीमा तय कर दी। गोश्त तथा पावरोटी की राशनिंग कर दी गई। किसानों को अपना अनाज शहरों में ले जाकर तय कीमत पर बेचने के लिए बाध्य किया गया। सभी नागरिकों को 'समता रोटी' खाना अनिवार्य कर दिया गया। बोलचाल और संबोधन में भी बराबरी का आचार-व्यवहार लागू करने की कोशिश की गई।
(4) उसके काल में चर्चों को बन्द कर दिया गया तथा उनके भवनों को बैरक या दफ्तर बना दिया गया।
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Question 163 Marks
फ्रांस में आतंक का राज' पर एक टिप्पणी लिखो।
Answer
रोबेस्प्येर-रोबेस्प्येर जैकोबिनों का प्रमुख नेता था। 1792 में बनी जैकोबिन सरकार का वह प्रमुख था।
आतंक का राज-फ्रांस के इतिहास में सन् 1793 से 1794 तक के रोबेस्प्येर के शासन काल को 'आतंक का युग' अथवा 'आतंक का राज' कहा जाता है। इसके निम्न कारण हैं-
(1) इस काल के दौरान रोबेस्प्येर ने कठोर नियंत्रण तथा दण्ड की सख्त नीति को अपनाया।
(2) अपने विरोधियों जैसे-कुलीन एवं पादरी, अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य, उसकी कार्यशैली से असहमति रखने वाले पार्टी सदस्य, सभी को बंदी बनाकर उन पर मुकदमा चलाया गया तथा न्यायालय द्वारा दोषी ठहराये जाने पर उन्हें गिलोटिन पर चढ़ाकर उनका सिर कत्ल कर दिया गया।
(3) रोबेस्प्येर ने कानून बनाकर मजदूरी एवं कीमतों की अधिकतम सीमा तय कर दी। गोश्त तथा पावरोटी की राशनिंग कर दी गई। किसानों को अपना अनाज शहरों में ले जाकर तय कीमत पर बेचने के लिए बाध्य किया गया। सभी नागरिकों को 'समता रोटी' खाना अनिवार्य कर दिया गया। बोलचाल और संबोधन में भी बराबरी का आचार-व्यवहार लागू करने की कोशिश की गई।
(4) उसके काल में चर्चों को बन्द कर दिया गया तथा उनके भवनों को बैरक या दफ्तर बना दिया गया।
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Question 173 Marks
फ्रांस की क्रांति में जैकोबिन की क्या भूमिका थी?
Answer
फ्रांस की क्रांति में जैकोबिन की भूमिका निम्नलिखित थी-
जैकोबिन लोगों के राजनीतिक क्लब थे। लोग इन क्लबों में सरकारी नीतियों और अपनी कार्य योजना पर बहस करते थे। मैक्समिलियन रोबेस्प्येर उनका नेता था। जैकोबिन के एक बड़े वर्ग ने गोदी कामगारों की तरह धारीदार लम्बी पतलून पहनने का निर्णय किया। ऐसा उन्होंने कुलीनों से खुद को अलग करने के लिए किया। यह उनका कुलीनों की सत्ता समाप्ति का ऐलान था।
सन् 1792 में जैकोबिनों ने खाद्य पदार्थों की महँगाई एवं अभाव से नाराज होकर राजतंत्र को समाप्त करने के लिए हिंसक विद्रोह की योजना बनायी।
10 अगस्त, 1792 की सुबह उन्होंने ट्यूलेरिए के महल पर धावा बोल कर राजा को कई घण्टों तक बन्धक बनाये रखा।
असेम्बली ने शाही परिवार को जेल में डाल देने का प्रस्ताव किया। नए चुनाव कराये गए। 21 वर्ष से अधिक उम्र वाले सभी पुरुषों को मताधिकार दिया गया तथा 21 सितम्बर, 1792 को इसने राजतंत्र को समाप्त कर दिया तथा फ्रांस को एक गणतंत्र घोषित किया। 21 जनवरी, 1793 को लुई XVI को फाँसी दे दी गई।
रोबेस्प्येर के नेतृत्व में सन् 1793 से 1794 तक फ्रांस पर शासन किया जिसे 'आतंक का युग' कहा जाता है।
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Question 183 Marks
फ्रांस की क्रान्ति में लॉक, रूसो तथा मॉन्तेस्क्यू के विचारों ने किस प्रकार योगदान दिया?
Answer
फ्रांस की क्रान्ति में लॉक, रूसो तथा मॉन्तेस्क्यू के विचारों ने बहुत योगदान दिया।
लॉक-लॉक ने राजा के दैवी और निरंकुश अधिकारों के सिद्धान्त का खंडन किया।
रूसो-रूसो ने अपनी पुस्तक 'द सोशल कॉन्ट्रैक्ट' में प्रत्येक सदस्य द्वारा एक मत देने के लोकतांत्रिक सिद्धान्त को प्रस्तुत किया था।
मॉन्तेस्क्यू-मॉन्तेस्क्यू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द स्पिरिट ऑफ द लॉज' में सरकार के अन्दर विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के बीच सत्ता विभाजन की बात कही।
फ्रांस की जनता उपर्युक्त दार्शनिकों के विचारों से बहुत प्रभावित हुई तथा इससे क्रांति को बल मिला।
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Question 193 Marks
फ्रांस में राष्ट्रीय सभा द्वारा 1791 में बनाये गये संविधान की प्रमुख विशेषतायें बताइये।
Answer
फ्रांस के 1791 के संविधान की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-
इसने फ्रांस में संवैधानिक राजतन्त्र की नींव डाली तथा सम्राट की शक्तियों को सीमित कर दिया। इसने शासन की शक्तियों को विभिन्न संस्थाओं-विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका में विभाजित एवं हस्तांतरित कर दिया।
इसने कानून बनाने का अधिकार नेशनल असेम्बली को सौंप दिया।
इसमें 25 वर्ष से अधिक उम्र वाले केवल ऐसे पुरुषों को ही मताधिकार दिया गया जो कम-से-कम तीन दिन की मजदूरी के बराबर कर चुकाते थे। इसमें जीवन के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के अधिकार तथा कानून के समक्ष समानता के अधिकार को नैसर्गिक एवं अहरणीय अधिकार के रूप में स्थापित किया गया था।
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Question 203 Marks
फ्रांस की क्रांति के तीन महत्त्वपूर्ण विचार क्या हैं? 1791 के संविधान के अन्तर्गत उनकी किस प्रकार गारंटी दी गई?
Answer
फ्रांस की क्रांति के तीन महत्त्वपूर्ण विचार निम्न हैं-
जीवन का अधिकार
अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार कानूनी बराबरी का अधिकार
1791 के संविधान के अन्तर्गत इन्हें नैसर्गिक एवं अहरणीय अधिकार के रूप में स्थान दिया गया। इसका अर्थ था कि ये अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को जन्मजात रूप से प्राप्त थे तथा इन अधिकारों को छीना नहीं जा सकता था। राज्य का यह कर्त्तव्य माना गया कि वह प्रत्येक नागरिक के नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा करे।।
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