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3 अंक प्रश्न

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Question 13 Marks
कशेरुकी के हृदयों में विकासीय परिवर्तनों का वर्णन करें।
Answer
सभी कशेरुकी में कक्षों से बना हुआ पेशी हृदय होता है। मछलियों में दो कक्षीय हृदय होता है, जिसमें एक आलिंद तथा एक निलय होता है। उभयचरों तथा सरीसृपों (रेप्टाइल्स) का (मगरमच्छ को छोड़कर) हृदय तीन कक्षों से बना है जिसमें दो आलिन्द तथा एक निलय होता है जबकि मगरमच्छ, पक्षियों तथा स्तनधारियों में हृदय चार कक्षों का बना होता है जिसमें दो आलिन्द तथा दो निलय होते हैं।
मछलियों में हृदय विऑक्सीजनित रुधिर बाहर से पम्प करता है जो श्लेष द्वारा ऑक्सीजनित होकर शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाया जाता है तथा वहाँ से विऑक्सीजनित रक्त हृदय में वापस आता है। इस क्रिया को एकल परिसंचरण कहते हैं। उभयचरों व सरीसृपों में बायाँ आलिन्द/क्लोम फेफड़ों/त्वचा से ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त करता है तथा दाहिना आलिन्द शरीर के दूसरे भागों से विऑक्सीजनित रुधिर प्राप्त करता है, लेकिन वे रक्त को निलय में मिश्रित कर बाहर की ओर पम्प करते हैं। इस क्रिया को अपूर्ण दोहरा परिसंचरण कहते हैं।
पक्षियों एवं स्तनधारियों में ऑक्सीजनित, विऑक्सीजनित रक्त क्रमशः बायें व दायें आलिन्दों में आता है, जहाँ से वह उसी क्रम में बायें-दायें एवं बायें निलयों में जाता है। निलय बिना रक्त को मिलाये इन्हें पम्प करता है अर्थात् दो तरह के परिसंचरण पथ इन प्राणियों में मिलते हैं।
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Question 23 Marks
भेद स्पष्ट करें -
खुला व बन्द परिसंचरण तन्त्र
Answer
क्र.सं.खुला परिसंचरण तंत्र (Open Circulatory System)बन्द परिसंचरण तंत्र (Closed Circulatory System)
1.वह रुधिर परिसंचरण तन्त्र जिसमें रुधिर पूर्ण रूप से बन्द नलिकाओं में नहीं बहता है, खुला परिसंचरण तंत्र कहलाता है।ऐसा रुधिर परिसंचरण जिसमें रुधिर बंद नलिकाओं में बहता है, बंद रुधिर ऊतकों के सम्पर्क में रहता है। परिसंचरण तंत्र कहते हैं।
2.रुधिर ऊतकों के सम्पर्क में रहता है।रुधिर ऊतकों के सम्पर्क में नहीं रहता है।
3.रुधिर का प्रवाह धीमा होता है।रुधिर का प्रवाह तेज होता है।
4.श्वसन वर्णक (यदि उपस्थित हो तो) प्लाज्मा में घुला रहता है। RBC अनुपस्थित ।
उदाहरण - कीट, मकड़ी, कॉकरोच, घोंघा एवं सीपी।
श्वसन वर्णक उपस्थित होता है, यह प्लाज्मा में घुला भी हो सकता है, किन्तु प्रायः RBC में पाया जाता है।
उदाहरण - मनुष्य, खरगोश, केंचुआ आदि।
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Question 33 Marks
भेद स्पष्ट करें -
रुधिर एवं लसीका
Answer
क्र.सं.रुधिर (Blood)लसीका (Lymph)
1.सामान्यतः लाल रंग का होता है।यह रंगविहीन होता है।
2.लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) युक्त होता है।RBC का अभाव होता है।
3.प्रोटीन की उच्च मात्रा उपस्थित होती है।प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।
4.पचित भोजन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।पचित भोजन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।
5.फाइब्रिनोजन अधिक होता है।फाइब्रिनोजन की मात्रा कम होती है।
6.$O_2$ अधिक ।$O_2$ कम।
7.उपापचयी उत्सर्जी अन्तः उत्पाद कम होते हैं।उपापचयी उत्सर्जी अन्तः उत्पाद अधिक होते हैं।
8.न्यूट्रोफिल्स की अधिकता।लिम्फोसाइट्स की अधिकता।
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Question 43 Marks
दोहरे परिसंचरण से क्या तात्पर्य है? इसकी क्या महत्ता है?
Answer
दोहरा परिसंचरण- रक्त का एक चक्र में दो बार हृदय से गुजरना-पहली बार शरीर का समस्त अशुद्ध रुधिर हृदय के दाहिने आलिन्द में एकत्रित होकर दाहिने निलय से होते हुए फेफड़ों में जाता है तथा दूसरी बार हृदय के बायें आलिन्द में फेफड़ों से फुफ्फुस शिराओं द्वारा एकत्रित शुद्ध रुधिर महाधमनी द्वारा समस्त शरीर में पम्प किया जाता है। इस प्रकार के रुधिर परिभ्रमण को दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) कहते हैं।
महत्ता-
(1) शुद्ध (Oxygenated) तथा अशुद्ध (Deoxygenated) रुधिर आपस में मिश्रित नहीं होते हैं।
(2) इसके द्वारा शरीर का तापमान समान बना रहता है।
(3) इसके द्वारा ग्रीवा देहिक चाप में दाब अधिक बन जाता है, इससे रुधिर आसानी से शरीर में पम्प कर दिया जाता है।
(4) इसके कारण वृक्क निवाहिका तन्त्र (Renal Portal System) की आवश्यकता नहीं होती है।
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Question 53 Marks
लसीका एवं रुधिर में अन्तर बताएँ।
Answer
क्र.सं.लसीका (Lymph)रुधिर (Blood)
1.यह रंगविहीन होता है।सामान्यतः लाल रंग का होता है।
2.RBC का अभाव होता है।लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) युक्त होता है।
3.प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।प्रोटीन की उच्च मात्रा उपस्थित होती है।
4.पचित भोजन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।पचित भोजन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।
5.फाइब्रिनोजन की मात्रा कम होती है।फाइब्रिनोजन अधिक होता है।
6.$O_2$ कम ।$O_2$ अधिक ।
7.उपापचयी उत्सर्जी अन्तः उत्पाद अधिक होते हैं।उपापचयी उत्सर्जी अन्तः उत्पाद कम होते हैं।
8.लिम्फोसाइट्स की अधिकता।न्यूट्रोफिल्स की अधिकता।
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Question 63 Marks
हृदय ध्वनियों की व्याख्या करें।
Answer
एक कार्डियक चक्र के दौरान दो प्रकार की ध्वनियाँ निकलती हैं जिन्हें हृदय ध्वनियाँ (Heart Sounds) कहते हैं।
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(1) प्रथम हृदय ध्वनि (First heart Sound) - निलय प्रकुंचन के आरम्भ को व्यक्त करती है व इस दौरान मिट्रल (Mitral) व ट्राइकस्पिड कपाट (Tricuspid Valve) के बन्द होने से ध्वनि उत्पन्न होती है। यह ध्वनि लब (LUBB) के रूप में होती है।
(2) द्वितीय हृदय ध्वनि (Second Heart Sound) - निलय प्रकुंचन के आरम्भ का द्योतक है। यह ध्वनि (SLV) (अर्द्ध चन्द्राकार कपाटों) के बन्द होने से उत्पन्न होती है। यह डप (DUBB) के रूप में सुनाई देती है।
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Question 73 Marks
आलिन्द निलय गांठ (AVN) तथा आलिन्द निलय बंडल (AVB) का हृदय के कार्य में क्या महत्त्व है?
Answer
आलिन्द निलय गांठ (AVN) तथा आलिन्द निलय बंडल (AVB) का महत्त्व - धड़कन की शुरुआत आलिन्द निलय पर्व (SAN) के स्वतः संकुचन से शुरू होती है, इसलिए इसे पेसमेकर कहते हैं। सर्वप्रथम SAN का संकुचन होता है जिसके फलस्वरूप दोनों आलिन्दों का संकुचन होता है। SAN के कुछ तन्तु आलिन्द निलय गाँठ (AVN) को संकुचन प्रेरणा देते हैं। AVN को लोवर नोड तथा हृदय का दूसरा पेसमेकर भी कहते हैं। AVN से ये संकुचन प्रेरणाएँ आलिन्द निलय बंडलों (AVB) तथा पुरकिन्जे के तन्तुओं की सहायता से दोनों निलयों की दीवारों में जाती है। इसके कारण निलयों का संकुचन होता है।
अर्थात् AVN व AVB पेसमेकर (SAN) से प्राप्त संकुचन प्रेरणाओं को पुरकिन्जे के तन्तुओं में पहुँचाते हैं जिसके कारण निलयों में संकुचन में होता है।
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Question 83 Marks
समूहन (Agglutination) किसे कहते हैं? रुधिर समूहों के मध्य प्रतिक्रिया को आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए।
Answer
समूहन (Agglutination) - यदि किसी व्यक्ति के रुधिर में उससे भिन्न रुधिर समूह का रुधिर मिला दिया जाता है तो ऐन्टीजन-ऐन्टीबॉडी प्रतिक्रिया के कारण उसके रक्ताणु परस्पर चिपककर गुच्छे बना लेते हैं। इस प्रतिक्रिया को समूहन कहते हैं।
रुधिर समूहों के मध्य प्रतिक्रिया निम्न हैं-

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Question 93 Marks
मनुष्य के हृदय की बाह्य संरचना का चित्र बनाकर संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
Answer
मानव हृदय की बाह्य संरचना (External Structure of Human Heart) - मानव का हृदय औसतन एक बन्द मुट्ठी के समान होता है। इसका वजन 300 ग्राम के लगभग है। यह वक्ष गुहा में कुछ बायीं ओर दोनों फेफड़ों के मध्य फुफ्फुस मध्यावकाश में स्थित होता है। हृदय के ऊपर पाये जाने वाले आवरण को हृदयावरण (Pericardium) कहते हैं। पेरिकार्डियम की भीतरी परत विसरल स्तर (Visceral Layer) कहलाती है तथा बाहरी परत को पैराइटल परत (Parietal Layer) कहते हैं। इन दोनों स्तरों के बीच एक लसदार द्रव्य भरा होता है जिसे परिहृदय तरल (Pericardial Fluid) कहते हैं।

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Question 103 Marks
एकल परिसंचरण को आरेख बनाकर समझाइए।
Answer
इस प्रकार का परिसंचरण मछलियों में पाया जाता है। मछलियों के हृदयों में दो ही कक्ष होते हैं जिसमें क्रमशः एक आलिन्द (Auricle) तथा एक निलय (Ventricle) होता है। मछलियों में हृदय विऑक्सीजनित (Deoxygenated) रुधिर को पम्प करता है जो क्लोमो द्वारा ऑक्सीजनित (Oxygenated) होकर शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाया जाता है तथा वहाँ से विऑक्सीजनित रुधिर हृदय में वापस आता है। इस क्रिया को एकल परिसंचरण (Single circulation) कहते हैं।
रुधिर का हृदय में एक बार आना एकल परिसंचरण कहलाता है।

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Question 113 Marks
रुधिर दाब एवं नब्ज या नाड़ी (pulse) को समझाइए।
Answer
प्रकुंचन (हृदय के संकुचन) के दौरान निलय संकुचित हो जाते हैं और रक्त को बलपूर्वक धमनियों में प्रवाहित कर देते हैं और ये धमनियाँ रुधिर को सारे शरीर में ले जाती हैं। धमनियों में प्रवाहित हो रहा रुधिर उनकी प्रत्यास्थ भित्तियों पर दबाव डालता है। इसी दबाव को रुधिर दाब (Blood Pressure) कहते हैं।
निलयों के संकुचन के समय रुधिर दाब अधिक ऊँचा होता है और उसे प्रकुंचनी दाब (Systolic pressure) कहते हैं। निलयों में जब शिथिलन होता है तब यह दाब घट जाता है। इस अपेक्षा निम्न दाब को अनुशिथिलनी दाब (diastolic pressure) कहते हैं। रुधिर दाब को मापने वाले यंत्र को स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer) कहते हैं।
रुधिर दाब के पठनांक 120/80 का अर्थ है कि व्यक्ति का प्रकुंचनी दाब 120 mm पारा तथा अनुशिथिलनी दाब 80 mm पारा है। एक स्वस्थ वयस्क का प्ररूपी पठनांक 120/80 mm पारा होता है।
अनुशिथिलनी तथा प्रकुंचनी दाबों का अन्तर कलाई पर धमनियों की धड़कन के रूप में महसूस किया जा सकता है। कलाई पर इस धड़कन को नब्ज या नाड़ी (Pulse) कहते हैं। कलाई पर एक स्थान के ऊपर महसूस की जाने वाली धड़कन (प्रकुंचन के कारण) की प्रति मिनट संख्या को नाड़ीदर कहते हैं। यह संख्या हृदय-स्पन्दों की संख्या के बराबर होती है। अर्थात् सामान्य वयस्क में लगभग 72 स्पंद प्रति मिनट ।
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Question 123 Marks
रुधिर परिसंचरण तन्त्र किसे कहते हैं? एकल परिसंचरण व दोहरे परिसंचरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer
रुधिर परिसंचरण तन्त्र - मनुष्य में O2 व CO2, पोषक पदार्थों, उत्सर्जी पदार्थों का स्रावी पदार्थों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पहुँचाने वाले तन्त्र को रुधिर परिसंचरण तंत्र कहते हैं।
एकल परिसंचरण व दोहरे परिसंचरण में अन्तर
(Differences between Single Circulation and Double Circulation)
क्र.सं.एकल परिसंचरण (Single Circulation)दोहरा परिसंचरण (Double Circulation)
1.एक पूरे चक्र में रुधिर हृदय से एक बार गुजरता है।रुधिर हृदय से दो बार गुजरता है।
2.हृदय विऑक्सीजनित (Deoxygenated) रुधिर को पम्प करता है।हृदय विऑक्सीजनित रुधिर को फेफड़ों के लिए पम्प करता है एवं ऑक्सीजनित (Oxygenated) रुधिर को शरीर में भेजता है।
3.गिल्स द्वारा रुधिर को ऑक्सीजनित किया जाता है।फेफड़ों द्वारा रुधिर को ऑक्सीजनित किया जाता है।
4.इस प्रकार का परिसंचरण मछलियों में पाया जाता है।इस प्रकार का परिसंचरण स्तनधारियों, पक्षी वर्ग, सरीसृप आदि में पाया जाता है।
5.हृदय में दो कक्ष होते हैं जिन्हें क्रमशः आलिन्द व निलय कहते हैं।हृदय में चार कक्ष होते हैं जिन्हें क्रमशः दो आलिन्द व दो निलय कहते हैं।
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Question 133 Marks
मानव में कौनसा निवाहिका तंत्र पाया जाता है? इस तंत्र के कोई तीन महत्व लिखिए।
Answer
मानव में यकृत निवाहिका तंत्र पाया जाता है।
यकृत निवाहिका तंत्र का महत्व निम्न है-
(1) आहार नाल से आने वाले रक्त में पचित भोजन (ग्लूकोज व अमीनो अम्ल) रहता है। आधिक्य ग्लूकोज को यकृत द्वारा ग्लाइकोजन में बदलकर संचित कर लिया जाता है जो बाद में आवश्यकता होने पर उपयोग किया जाता है। जब किसी जीव को भोजन की कमी अनुभव होती है, ग्लाइकोजन ग्लूकोज में बदलता है और यकृत शिराओं द्वारा यह ग्लूकोज रक्त प्रवाह में पहुँचा दिया जाता है।
(2) हानिप्रद नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ (जैसे अमोनिया) यूरिया में बदल जाते हैं जो बाद में वृक्कों द्वारा उत्सर्जित कर दिए जाते हैं। इस प्रकार रक्त हानिप्रद नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों से मुक्त (detoxified) हो जाता हैं।
(3) यकृत रक्त प्रोटीन्स का निर्माण करता है, जो रक्त परिसंचरण में पहुँचा दी जाती हैं।
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Question 143 Marks
हृद चक्र किसे कहते हैं? दायां निलय एवं बायां निलय में अन्तर लिखिए।
Answer
हृद चक्र (Cardiac cycle) - एक हृदय स्पंदन के शुरू होने से लेकर अगले हृदय स्पंदन की शुरूआत के मध्य होने वाली विभिन्न क्रमिक घटनाओं को हृद चक्र या कार्डियक साइकल कहते हैं।
दायां निलय एवं बायां निलय में अन्तर
(Differences between Right ventricle and Left ventricle)
क्र.सं.दायां निलय (Right ventricle)बायां निलय (Left ventricle)
1.दायां निलय बायें निलय से छोटा होता है।बायां निलय दायें निलय से तुलनात्मक बड़ा होता है।
2.मॉडरेटर बैण्ड उपस्थित।मॉडरेटर बैण्ड की कमी।
3.डी-ऑक्सीजनेटेड रक्त प्राप्त करता है और धकेलता (भेजता) है।ऑक्सीजनयुक्त रक्त प्राप्त करता है और पम्प करता है।
4.इसकी दीवार बायें निलय की दीवार से पतली होती है।
आकार-अर्द्धचन्द्राकार (Crescent) होता है।
बायें निलय की दीवार दायें निलय की दीवार से मोटी होती है।
आकार-उभयोतल (Biconvex) होता है।
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Question 153 Marks
शिरा आलिन्द नोड व आलिन्द निलय नोड में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer
शिरा आलिन्द नोड व आलिन्द निलय नोड में अन्तर
(Differences between Sinu Auricular Node and Auriculo Ventricular Node)
क्र.सं.शिरा आलिन्द नोड (Sinu Auricular Node)आलिन्द निलय नोड (Auriculo Ventricular Node)
1.इसे SA नोड कहते हैं।इसे AV नोड कहते हैं।
2.यह दायें आलिन्द की दीवार पर स्थित होता है।यह इन्टरऑरिकुलर सेप्टम के पिछले सिरे पर निलय के पास स्थित होता है।
3.यह हृदय की धड़कन को आरम्भ करता है। इसे गति चालक कहते हैं।यह हृदय के आवेग की तरंगों को ग्रहण करके हिस बण्डल के पेशी तन्तुओं में संचालन करता है।
4.इसमें पुरकिन्जे तन्तु एवं हिज बण्डल नहीं होते हैं।इसमें पुरकिन्जे तन्तु तथा हिज बण्डल होते हैं।
5.मेड्यूला में स्थित कार्डियक केन्द्र इसका नियन्त्रण करता है।यह SA नोड से उत्पन्न हृदय आवेग तरंगों से उत्तेजित होता है।
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Question 163 Marks
लसीका किसे कहते हैं? T कोशिकाएँ एवं B कोशिकाओं में कोई चार अन्तर लिखिए।
Answer
लसीका (Lymph) - रक्त कोशिकाएँ शरीर के प्रत्येक अंग तथा ऊतक तक नहीं पहुँच पाती हैं, सिर्फ प्लाज्मा और श्वेताणु रक्त कोशिकाओं की दीवार (जो एण्डोथिलियम स्तर से बनी होती है) में से छनकर ऊतक कोशिकाओं के बीच के स्थान में पहुँच जाती है, यही छना हुआ द्रव लसीका (Lymph) कहलाता है।
T-कोशिकाओं एवं B-कोशिकाओं में अन्तर
(Differences between T-cells and B-cells)
क्र.सं.T-कोशिकाएँ (T-cells)B-कोशिकाएँ (B-cells)
1.T कोशिकाएँ थाइमस ग्रन्थि में परिपक्व होती हैं।लसीकाभ अंगों में जैसे - टॉन्सिलों में परिपक्व होती हैं।
2.ये कोशिकाएँ प्रतिजनों को पहचान कर उन्हें नष्ट कर देती हैं।एंटीजनों की पहचान अपनी सतह पर संवेदी अंगों के द्वारा करती हैं।
3.ये सीधे आक्रमण करती हैं।आक्रमण के लिए बड़ी संख्या में प्रतिरक्षी उत्पन्न करती हैं।
4.इनका जीवनकाल 3-4 वर्ष का होता है।प्रतिरक्षी थोड़े ही समय तक जीवित रहती हैं।
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