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लघु उत्तरीय प्रश्न [4M]

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Question 14 Marks
वन मृदा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer
वन मदा-वन मृदाएँ प्रायः ऐसे पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं जहाँ पर्याप्त वर्षा- वन उपलब्ध हैं। इन मृदाओं का गठन पर्वतीय पर्यावरण के अनुसार बदलता रहता है। नदी घाटियों में जहाँ ये मृदाएँ दोमट और सिल्टदार होती हैं, वहाँ ऊपरी ढालों पर इनका गठन मोटे कणों का होता है। हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों में इन मृदाओं का अत्यधिक अपरदन होता है और ये अधिसिलिक (acidic) तथा ह्यूमस रहित होती हैं। नदी घाटियों के निचले क्षेत्रों, विशेषकर नदी सोपानों और जलोढ़ पंखों आदि में ये मृदाएँ अत्यन्त उपजाऊ होती हैं।
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Question 24 Marks
मरुस्थली मृदा पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer
मरुस्थली मृदा- भारत में मरुस्थली मृदा मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है। मरुस्थली मृदा की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं-
मरुस्थली मृदाओं का रंग लाल और भूरा होता है।
ये मृदाएँ प्रायः रेतीली और लवणीय होती हैं। कुछ क्षेत्रों में नमक की मात्रा इतनी अधिक है कि झीलों से जल वाष्पीकृत करके खाने का नमक भी बनाया जाता है।
इन मृदाओं में ह्यूमस और नमी की मात्रा कम होती है।
इस प्रकार की मृदा की सतह के नीचे कैल्शियम की मात्रा बढ़ती चली जाती है और नीचे की परतों में चुने के कंकर की सतह पाई जाती है। इसके कारण मृदा में जल अंत:स्यंदन (infiltration) बाधित हो जाता है।
इस मृदा को सही तरीके से सिंचित करके कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
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Question 34 Marks
रेगर मृदा किन-किन क्षेत्रों में पाई जाती है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
Answer
काली मृदा (रेगर मृदा) के क्षेत्र-काली मृदाएँ महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पठार पर पाई जाती हैं और दक्षिण-पूर्वी दिशा में गोदावरी और कृष्णा नदियों की घाटियों तक फैली हैं।
काली मृदा (रेगर मृदा) की विशेषताएँ-
काली मृदा बहुत बारीक कणों अर्थात् मृत्तिका से बनी है।
इसकी नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है।
काली मृदाएँ कैल्शियम कार्बोनेट, मैगनीशियम, पोटाश और चूने जैसे पौष्टिक तत्त्वों से परिपूर्ण होती हैं।
इनमें फास्फोरस की मात्रा कम होती है। गर्म और शुष्क मौसम में इन मृदाओं में गहरी दरारें पड़ जाती हैं जिससे इनमें वायु का मिश्रण अच्छी तरह हो जाता है। गीली होने पर ये मृदाएँ चिपचिपी हो जाती हैं।
काली मृदाएँ लावा जनक शैलों से बनी होती हैं।
इनका रंग काला होता है तथा इन्हें 'रेगर' मृदाएँ भी कहा जाता है। काली मृदाएँ कपास की खेती के लिए बहुत अच्छी होती हैं।
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Question 44 Marks
काली मृदा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer
काली मृदा (रेगर मृदा) के क्षेत्र-काली मृदाएँ महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पठार पर पाई जाती हैं और दक्षिण-पूर्वी दिशा में गोदावरी और कृष्णा नदियों की घाटियों तक फैली हैं।
काली मृदा (रेगर मृदा) की विशेषताएँ-
काली मृदा बहुत बारीक कणों अर्थात् मृत्तिका से बनी है।
इसकी नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है।
काली मृदाएँ कैल्शियम कार्बोनेट, मैगनीशियम, पोटाश और चूने जैसे पौष्टिक तत्त्वों से परिपूर्ण होती हैं।
इनमें फास्फोरस की मात्रा कम होती है। गर्म और शुष्क मौसम में इन मृदाओं में गहरी दरारें पड़ जाती हैं जिससे इनमें वायु का मिश्रण अच्छी तरह हो जाता है। गीली होने पर ये मृदाएँ चिपचिपी हो जाती हैं।
काली मृदाएँ लावा जनक शैलों से बनी होती हैं।
इनका रंग काला होता है तथा इन्हें 'रेगर' मृदाएँ भी कहा जाता है। काली मृदाएँ कपास की खेती के लिए बहुत अच्छी होती हैं।
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Question 54 Marks
मृदा संसाधन पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer
मृदा संसाधन-पृथ्वी पर मृदा सबसे महत्त्वपूर्ण नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधन है। यह पेड-पौधों के विकास का माध्यम है जो पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीवों का पोषण करती है। मृदा एक जीवंत तंत्र है। मृदा निर्माण की प्रक्रिया बहुत लम्बी है। कुछ सेंटीमीटर गहरी मृदा बनने में भी लाखों वर्ष लग जाते हैं। मृदा बनने की प्रक्रिया में उच्चावच, जनक शैल अथवा संस्तर शैल, जलवायु, वनस्पति और अन्य जैव पदार्थ और समय मुख्य कारक हैं। प्रकृति के अनेकों तत्व जैसे तापमान परिवर्तन, बहते जल की क्रिया, पवन, हिमनदी और अपघटन क्रियाएँ आदि का मृदा बनने की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। मृदा में होने वाले रासायनिक और जैविक परिवर्तन भी महत्त्वपूर्ण हैं। मृदा जैव (ह्यूमस) और अजैव दोनों प्रकार के पदार्थों से बनती है।
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Question 64 Marks
रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन, 1992 पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
1992 में आयोजित रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन की प्रमुख बातें निम्न प्रकार हैं-
प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन जून, 1992 में ब्राजील के शहर रियो डी जेनरो में आयोजित किया गया।
इस सम्मलन में विश्व के 100 से भी अधिक राष्ट्राध्यक्ष एकत्रित हुए।
सम्मेलन का आयोजन विश्व स्तर पर उभरते पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास की समस्याओं का हल ढूँढ़ने के लिए किया गया था। इस सम्मेलन में एकत्रित नेताओं ने भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन और जैविक विविधता पर एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए।
रियो सम्मेलन में भूमंडलीय वन सिद्धान्तों (Forest Principles) पर सहमति जताई गई और 21वीं शताब्दी में सतत पोषणीय विकास के लिए एजेंडा 21 को स्वीकृति प्रदान की गई। इसका उद्देश्य भूमण्डलीय सतत पोषणीय विकास हासिल करना है।
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Question 74 Marks
संसाधनों के संरक्षण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हुए प्रयासों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
Answer
संसाधन संरक्षण हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निम्न प्रयास किये गये-
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित तरीके से संसाधन संरक्षण की वकालत 1968 में क्लब ऑफ रोम ने की।
1974 में शुमेसर ने अपनी पुस्तक 'स्माल इज ब्यूटीफुल' में संसाधन संरक्षण पर गाँधीजी के दर्शन की एक बार फिर से पुनरावृत्ति की।
1987 में ब्रुन्ड्टलैंड आयोग रिपोर्ट द्वारा वैश्विक स्तर पर संसाधन संरक्षण में मूलाधार योगदान किया गया। इस रिपोर्ट ने सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development) की संकल्पना प्रस्तुत की और संसाधन संरक्षण की वकालत की। यह रिपोर्ट बाद में हमारा सांझा भविष्य (Our Common Future) शीर्षक से पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई।
पर्यावरण संरक्षण हेतु रियो डी जेनेरो, ब्राजील में 1992 में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में सतत पोषणीय विकास हेतु एजेंडा 21 को स्वीकृति प्रदान की गई।
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Question 84 Marks
मनुष्यों द्वारा संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से क्या समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं? बतलाइये।
Answer
मनुष्यों द्वारा संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से निम्नलिखित मुख्य समस्याएँ पैदा हुई हैं-
कुछ व्यक्तियों के लालचवश संसाधनों का ह्रास।
संसाधन समाज के कुछ ही लोगों के हाथ में आ गए हैं, जिससे समाज दो हिस्सों संसाधन संपन्न एवं संसाधनहीन अर्थात् अमीर और गरीब में बँट गया।
संसाधनों के अंधाधुंध शोषण से वैश्विक पारिस्थितिकी संकट पैदा हो गया है जैसे भूमंडलीय तापन, ओजोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि निम्नीकरण आदि हैं।
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Question 94 Marks
भारत में संसाधनों की उपलब्धता में बहुत विविधता है, समझाइए।
Answer
भारत में संसाधनों की उपलब्धता में बहुत अधिक विविधता पाई जाती है। यहाँ ऐसे प्रदेश भी हैं जहाँ एक तरह के संसाधनों की प्रचुरता है, परन्तु दूसरे तरह के संसाधनों की कमी है। कुछ ऐसे प्रदेश भी हैं, जो संसाधनों की दृष्टि से आत्मनिर्भर हैं और कुछ ऐसे प्रदेश भी हैं, जहाँ महत्त्वपूर्ण संसाधनों की अत्यधिक कमी है। उदाहरण के लिए, झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में खनिजों और कोयले के प्रचुर भंडार हैं। अरुणाचल प्रदेश में जल संसाधन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, परन्तु मूल विकास की कमी है। राजस्थान में पवन और सौर ऊर्जा संसाधनों की बहुतायत है, लेकिन जल संसाधनों की कमी है। लद्दाख का शीत मरुस्थल सांस्कृतिक विरासत का धनी है परन्तु यहाँ जल, आधारभूत, अवसंरचना तथा कुछ महत्त्वपूर्ण खनिजों की कमी है।इस प्रकार भारत में संसाधनों की उपलब्धता में क्षेत्रवार बहुत विविधता पाई जाती है।
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Question 104 Marks
राष्ट्रीय संसाधन क्या होते हैं? समझाइए।
Answer
राष्ट्रीय संसाधन-तकनीकी तौर पर देश में पाये जाने वाले सभी संसाधन राष्ट्रीय संसाधन होते हैं। देश के सारे खनिज पदार्थ, जल संसाधन, वन, वन्य जीवन, राजनीतिक सीमाओं के अन्दर सारी भूमि और 12 समुद्री मील (22.2 किमी.) तक महासागरीय क्षेत्र (भू-भागीय समुद्र) व इसमें पाए जाने वाले संसाधन राष्ट्र की संपदा होते हैं। इसके साथ ही देश की सरकार को कानूनी अधिकार होता है कि वह व्यक्तिगत संसाधनों को भी आम जनता के हित में अधिग्रहित कर सकती है। इसीलिए कई जगह सड़कें, नहरें और रेल लाइनें व्यक्तिगत स्वामित्व वाले खेतों में भी बनी हुई होती हैं। शहरी विकास प्राधिकरणों को सरकार ने भूमि अधिग्रहण का अधिकार दिया हुआ है।
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Question 114 Marks
समाप्यता के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer
समाप्यता के आधार पर संसाधन निम्न दो प्रकार के होते हैं-
(1) नवीकरण योग्य संसाधन-वे संसाधन जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा नवीकृत या पुनः उत्पन्न किया जा सकता है, उन्हें नवीकरण योग्य अथवा पुनः पूर्ति योग्य संसाधन कहा जाता है। उदाहरणार्थ, सौर तथा पवन ऊर्जा, जल, वन व वन्य जीवन। इन संसाधनों को सतत् अथवा प्रवाह संसाधनों में विभाजित किया गया है।
(2) अनवीकरण योग्य संसाधन-इन संसाधनों का विकास एक लंबे भू-वैज्ञानिक अंतराल में होता है। खनिज और जीवाश्म ईंधन इस प्रकार के संसाधनों के उदाहरण हैं। इनके बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं। इनमें से कुछ संसाधन जैसे धातुएँ पुनः चक्रीय हैं और कुछ साधन जैसे जीवाश्म ईंधन अचक्रीय हैं व एक बार के प्रयोग के साथ ही खत्म हो जाते हैं।
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Question 124 Marks
मृदा अपरदन को कैसे रोका जा सकता है?
Answer
मृदा अपरदन को निम्न तरीकों से रोका जा सकता है-
समोच्च जुताई-समोच्च जुताई द्वारा अपरदन को कम किया जा सकता है। ढाल वाली भूमि की जुताई समोच्च रेखाओं के समानान्तर करने से ढाल के साथ जल बहाव की गति घटती है।
सोपान कृषि भूमि में ढालों पर सीढ़ीदार कृषि करने से भूमि अपरदन नियंत्रित होता है।
पट्टी कृषि-एक बड़ी कृषि भूमि को छोटी-छोटी पट्टियों में बाँटकर फसलों के बीच घास की पट्टियाँ उगाकर वायु की गति को कम करके भूमि अपरदन को रोका जा सकता है।
रक्षक मेखला पेड़ों को एक कतार में लगाकर वायु गति को कम करके भी भूमि अपरदन को रोका जाता है।
मानवीय क्रियाओं पर नियंत्रण-वनोन्मूलन, अति पशुचारण, निर्माण तथा अवैध खनन आदि पर नियंत्रण लगाकर भी मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
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Question 134 Marks
मृदा अपरदन क्या है? मृदा किस-किस प्रकार अपरदित होती है?
Answer
मृदा अपरदन- मृदा के कटाव एवं उसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं।
मृदा अपरदन के कारक-
मानवीय तथा प्राकृतिक दोनों प्रकार के कारक मृदा अपरदन के लिए उत्तरदायी हैं।
कृषि के गलत तरीकों से मृदा अपरदन होता है। गलत ढंग से हल चलाने से, जैसे-ढाल पर ऊपर से नीचे की ओर हल चलाने से वाहिकाएँ बन जाती हैं, जिसके अन्दर से बहता पानी मृदा को अपरदित करता है। शुष्क एवं बलुई क्षेत्रों में तीव्र हवा मृदा अपरदन का प्रमुख कारण है।
पेड़ों की अविवेकपूर्ण कटाई तथा वनोन्मूलन के कारण बार-बार बातें आती हैं जो मृदा को हानि पहुँचाती हैं। अति पशुचारण, खनन एवं निर्माण कार्य भी मृदा को अपरदित करने में सहायता करते हैं।
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Question 144 Marks
भारत की मुख्य भू-आकृतियों का उल्लेख कीजिये।
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Question 154 Marks
प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन की प्रमुख बातें लिखिए।
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Question 164 Marks
पुराने जलोढ़ एवं नवीन जलोढ़ में अन्तर बताइए।
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Question 184 Marks
जलोढ़ मृदा की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।
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Question 194 Marks
भारत में संसाधन नियोजन के प्रमुख सोपानों का उल्लेख कीजिए।
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Question 204 Marks
रियो-डी-जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन, 1992 का आयोजन क्यों किया गया? स्पष्ट कीजिए।
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Question 214 Marks
व्यक्तिगत संसाधन तथा सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधनों में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
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