Question
आदर्श विद्यार्थी

Answer

विद्यार्थी का अर्थविद्यार्थी का अर्थ है–विद्या पाने वाला। आदर्श विद्यार्थी वही है जो सीखने की इच्छा से ओतप्रोत हो, जिसमें ज्ञान पाने की गहरी ललक हो। विद्यार्थी अपने जीवन में सर्वाधिक महत्त्व विद्या को देता है।
जिज्ञासा और अदा विद्यार्थी का सबसे पहला गुण है—जिज्ञासा। वह नए-नए विषयों के बारे में नित नई जानकारी चाहता है। वह केवल पुस्तकों और अध्यापकों के भरोसे ही नहीं रहता, अपितु स्वयं मेहनत करके ज्ञान प्राप्त करता है। सच्चा छात्र श्रद्धावान होता है। कहावत भी है… ‘श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्’। श्रद्धावान ही ज्ञान पा सकता है।
तपस्वी सच्चा छात्र सांसारिक सुख और आराम का कायल नहीं होता। वह कठोर जीवन जीकर तपस्या का आनंद प्राप्त करता है। संस्कृत में एक सूक्ति भी है
‘सखार्थिनः कतो विद्या, विद्यार्थिनः कतो सखम्’
आदर्श विद्यार्थी परिश्रम, लगन तपस्या की आँच में पिघलकर स्वयं को सोना बनाता है। जो छात्र सुख-सुविधा और आराम के चक्कर में पड़े रहते हैं, वे अपने जीवन की नींव को ही कमजोर बना लेते हैं।
अनशासित और नियमित जीवन- आदर्श छात्र अपनी निश्चित दिनचर्या बनाता है और उसका कठोरता से पालन करता है। वह अपनी पढ़ाई, खेल-कूद, व्यायाम, मनोरंजन तथा अन्य गतिविधियों में तालमेल बैठाता है। उसके अध्ययन के घंटे निश्चित होते हैं जिनके साथ वह कभी समझौता नहीं करता। वह खेल-कूद और व्यायाम के लिए भी निश्चित समय रखता है।
सादा जीवन आदर्श छात्र फैशन और ग्लैमर की दुनिया से दूर रहता है। वह सादा जीवन जीता है और उच्च विचार मन में धारण करता है। जो छात्र बनाव-शृंगार, व्यसन, सैर-सपाटा, चस्केबाजी आदि में आनंद लेते हैं, वे विद्या के लक्ष्य से भटक जाते हैं।
पाठयेतर गतिविधियों में रुचि-सच्चा छात्र केवल पाठ्यक्रम तक ही सीमित नहीं रहता। वह विद्यालय में होने वाली अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। गाना, अभिनय, एन.सी.सी., स्काउट, खेलकूद, भाषण आदि में से किसी-न-किसी में वह अवश्य भाग लेता है।

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