मनाने का समय-दीपावली का त्योहार कार्तिक मास में मनाया जाता है। धनतेरस से भाईदूज तक यह त्योहार मनाया जाता है। अमावस्या की रात को लक्ष्मीपूजन किया जाता है और दीपों की कतारें सजाई जाती हैं।
मनाने का कारण-हिन्दू जनता के मतानुसार वनवास से चौदह वर्ष उफ्रान्त राम अयोध्या लौटे तो लोगों ने दीपों से अपने घरों को सजाकर उनका स्वागत किया। कुछ लोग इसका सम्बन्ध कृष्ण द्वारा नरकासुर वध की कथा से जोड़ते हैं। जैन धर्म वाले महावीर स्वामी से सम्बन्धित कोई कथा कहते हैं तो कुछ लोग इस दिन हनुमान की जयन्ती बताते मनाने की विधि-इस त्योहार को मनाने से पहले सभी व्यक्ति अपने-अपने घरों व दुकानों की सफाई करते हैं और मकानों को सजाते हैं।
शहरों में लोग बिजली की रंग-बिरंगी रोशनी से घरों व दुकानों को सजाते हैं। धनतेरस को गृहिणियाँ नये बर्तन खरीदना शुभ मानती हैं। दीपावली के दिन प्रत्येक घर में लक्ष्मी-पूजन होता है। दूसरे दिन गोवर्धन-पूजा की जाती है। 'भाई-दूज' को बहिनें अपने भाइयों के ललाट पर तिलक लगाती हैं। इस प्रकार यह त्योहार पाँच दिन तक बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है।
उपसंहार-हिन्दुओं के त्योहारों में दीपावली का विशेष महत्त्व है। यह हमारी सामूहिक मंगलेच्छा का प्रतीक है। इस दिन लक्ष्मी-पूजन करके सबकी उन्नति और समृद्धि की कामना की जाती है।
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